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    पार्टी ऑफ़िस में बीजेपी ने खींची विभाजन रेखा... कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू, दूर से अलग नज़र आएंगे

    बीजेपी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना ड्रेस के कोई भी कर्मचारी ऑफिस में प्रवेश नहीं कर सकेगा. उन्हें दो शर्ट और एक पैंट का कपड़ा दे दिया गया है जिसकी कीमत सैलेरी से काटी जाएगी.
    बीजेपी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना ड्रेस के कोई भी कर्मचारी ऑफिस में प्रवेश नहीं कर सकेगा. उन्हें दो शर्ट और एक पैंट का कपड़ा दे दिया गया है जिसकी कीमत सैलेरी से काटी जाएगी.

    कांग्रेस का कहना है कि इस पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए, बीजेपी का कैरेक्टर ही कॉर्पोरेट रहा है.

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    देहरादून. कार्यकर्ताओं और संसाधनों के साथ लगातार विस्तार करती ने अब पूरी तरह कॉर्पोरेट कल्चर को अपना लिया है. कॉर्पोरेट कंपनियों की तरह बीजेपी ने अब अपने ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया है. यही नहीं कोविड-19 प्रोटोकॉल को ताक पर रखकर बीजेपी ने कोरोना काल के दौरान भी बायोमेट्रिक सिस्टम लागू रखा हालांकि इससे कोरोना फैलने की आशंका बनी रही. इससे बीजेपी ऑफ़िस में कर्मचारियों में नाराज़गी है, तो कांग्रेस ने भी मौका मिलते ही हमला बोल दिया है. कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी है ही कॉर्पोरेट घरानों की पार्टी.

    सैलेरी से कटेगी ड्रेस की कीमत 

    बीजेपी प्रदेश कार्यालय में ऑफिस बॉय से लेकर करीब 15 से बीस कर्मचारी काम करते हैं. इनमें अधिकतर बीजेपी की विचाराधारा से ही संबंध रखने वाले हैं या उन परिवारों से हैं, जिनका बीजेपी से किसी न किसी नाते संबंध रहा है. यानी कि ये लोग बीजेपी से जुड़ाव महसूस करते हैं. लेकिन सभी कर्मचारियों को ड्रेस में आने के फ़रमान से ये खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं.



    बीजेपी ने अपने कर्मचारियों के लिए स्काई ब्लू शर्ट और काली पेंट का ड्रेस कोड लागू कर दिया है. कर्मचारी यह ड्रेस पहनकर ऑफिस आने लगे हैं. नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारी बताते हैं कि बिना ड्रेस के कोई भी कर्मचारी ऑफिस में प्रवेश नहीं कर सकेगा. उन्हें दो शर्ट और एक पैंट का कपड़ा दे दिया गया है जिसकी कीमत सैलेरी से काटी जाएगी.
    बीजेपी का कैरेक्टर कॉर्पोरेट 

    ड्रेस कोड लागू करने के एस फ़ैसले से बीजेपी के भी कई नेता सहमत नहीं दिखे. वे अपने-अपने स्तर पर उचित मंच पर इसकी नाराजगी भी जता चुके हैं लेकिन, पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल इसकी हिमायत करते हैं. गोयल का कहना है कि इससे कर्मचारी और कार्यकर्ताओं के बीच एक डेकोरम बना रहेगा. गोयल का कहना है कि बीजेपी एक अनुशासित पार्टी है और अनुशासन ज़रूरी है.

    दूसरी तरफ़ कांग्रेस ने लगे हाथ बीजेपी पर राजनीति का व्यवसायीकरण करने का आरोप लगाया है. कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि इस पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए, बीजेपी का कैरेक्टर ही कॉर्पोरेट रहा है. बीजेपी का आम आदमी से कोई लेना-देना नहीं है, वह कॉर्पोरेट घरानों की पार्टी है. इसलिए वह कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दे इस पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

    कोरोना काल में बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन

    भाजपा प्रदेश कार्यालय में बायोमैट्रिक मशीन भी लगाई गई हैं. प्रदेश भर को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने वाली बीजेपी के इस ऑफिस में कोरोना कॉल में भी बायामेट्रिक रजिस्ट्रेशन को जारी रखा गया. कर्मचारियों के लिए ऑफिस आकर पंचिंग करनी ज़रूरी है लेकिन कोई बोलने वाला नहीं है. सात-आठ हजार रुपये प्रतिमाह के मानदेय पर तैनात गरीब युवक इतना साहस नहीं कर पाते कि वे इस व्यवस्था के खिलाफ मुंह भी खोल पाएं.

    बहरहाल,  कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड के निर्देश और बायोमेट्रिक जारी रखने का फ़ैसला पार्टी हाईकमान का है या फिर स्थानीय स्तर पर ही लिया गया है बीजेपी में यह भी कोई बताने को तैयार नहीं है. हालांकि इतना ज़रूर है कि बीजेपी ने पार्टी के अंदर कर्मचारियों और कार्यकर्तों के बीच लाइन को पूरी तरह साफ़ कर दिया है.

    कमाल की बात है कि पार्टी ऑफ़िस में काम करने वालों को अलग खांचे में खड़ी करने वाली यह वही पार्टी है जिसने एक चाय पिलाने वाले को देश को प्रधानमंत्री बनाया है.
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