पंचायत चुनाव: विधानसभा और लोकसभा में परचम लहराने वाली उत्‍तराखंड BJP के सामने हैं ये 5 बड़ी चुनौतियां

विधानसभा के बाद लोकसभा चुनावों में भी पार्टी ने मोदी के नाम को ही आगे रखा और वोटरों को ये यकीन दिलाया कि उनका हर वोट मोदी को पड़ रहा है. इसके साथ ही पूर्व सैनिक बहुल्य प्रदेश में राष्ट्रवाद का सेंटीमेंट भी खूब चला.

Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: July 31, 2019, 6:03 PM IST
पंचायत चुनाव: विधानसभा और लोकसभा में परचम लहराने वाली उत्‍तराखंड BJP के सामने हैं ये 5 बड़ी चुनौतियां
नगर निकाय चुनावों में अपनी जीत से उत्साहित भाजपा की नजरें पंचायत चुनावों पर है.
Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: July 31, 2019, 6:03 PM IST
उत्‍तराखंड में विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बाजी मारी वाली भारतीय जनता पार्टी पंचायत चुनावों में भी अपनी जीत को लेकर आशवस्त है. वैसे उसके सामने पांच चुनौतियां है, जिसका तोड़ उन्हें ढूंढना होगा. 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत में डबल इंजन का नारा सबसे कारगर साबित हुआ और कांग्रेस को भाजपा ने 11 की संख्या तक समेट दिया और 57 संख्या वाले उत्तराखण्ड में ऐतिहासिक बहुमत हासिल कर लिया था. यकीनन भाजपा के हर बड़े नेता ने कहा कि अगर केंद्र और राज्य में दोनों जगह भाजपा की सरकार होगी तो सूबे में विकास का इंजन दुगनी रफ्तार से दौडेगा. जबकि प्रधानमंत्री मोदी पर भी उत्तराखंड के वोटर ने पूरा भरोसा जताया.

लोकसभा में यूं मारी बाजी
लोकसभा चुनावों में भी पार्टी ने मोदी के नाम को ही आगे रखा और प्रचार में वोटरों को ये यकीन दिलाया कि उनका हर वोट मोदी को पड़ रहा है. इसके साथ ही पूर्व सैनिक बहुल्य प्रदेश में राष्ट्रवाद का सेंटीमेंट भी खूब चला.

अब नगर निकाय चुनावों में अपनी जीत से उत्साहित भाजपा की नजरें पंचायत चुनावों पर है, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं. अपनी जीत को दोहराने की राह में पार्टी के समाने कई चुनौतियां हैं.

पहली चुनौती
ये चुनाव बिना सिंबल के होना है और यहां पार्टी से ज्यादा प्रत्याशी महत्तवपूर्ण होगा. अगर पार्टी सही प्रत्याशी पर दांव नहीं लगा पाई तो नतीजे उसकी उम्मीदों से उलट हो सकते हैं. ‌

ये चुनाव बिना सिंबल के होना है और यहां पार्टी से ज्यादा प्रत्याशी महत्तवपूर्ण होगा.

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दूसरी चुनौती
पंचायत चुनावों में मोदी से ज्यादा राज्य सरकार के अभी तक के कार्यकाल का लिटमस टेस्ट होगा. इस बार पार्टी प्रधानमंत्री के चेहरे का इस्‍तेमाल करने से परहेज कर सकती है. पार्टी से समर्थित प्रत्याशी भी अगर प्रधानमंत्री के नाम का प्रयोग करते हैं तो ये प्रयोग बैक फायर कर सकता है.

तीसरी चुनौती
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट पर दौहरी जिम्मेदारी है. वह नैनीताल से सांसद भी हैं. वहीं पंचायत चुनावों को लेकर उन्हें संगठन स्तर पर रणनीति बनाने के लिए समय निकालना होगा.

चौथी चुनौती
इस समय पार्टी में खाली पड़े पद भी एक बड़ा सरर्दद है. संगठन मंत्री का पद लंबे समय से खाली पड़ा है, तो पूरी प्रदेश कार्यकारणी अभी एक्सटेंशन पर चल रही है. इसकी वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष भी अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं.

पांचवींं चुनौती
पंचायती राज संशोधन एक्ट के संशोधन पर अपनों की नारजगी झेल रही पार्टी. हाल ही में पंचायती राज संशोघन एक्ट लाया गया जिसमें दो से ज्यादा बच्चों वाले प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है. पार्टी के अंदर ही इसका विरोध भी है.

जिला पंचायत सदस्य अमेंद्र बिष्ट बताते है कि भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनों की नाराजगी है.  उन्‍होंने कहा कि जिस इलाके से वो प्रतिनिधि हैं वहां पर भाजपा के नेता खुलेआम अपनी नाराजगी दिखा रहे हैं. जबकि पार्टी की कई बैठकों में भी ये मसला उठा है.

भाजपा को है ये उम्‍मीद
इन चुनौतियों के बावजूद पार्टी का कहना है कि वो अपनी जीत को दौहराएगी और पंचायतों में एक बार फिर से परचम लहराने वाली है. भाजपा के मीडिया प्रभारी देवेंद्र भसीन का कहना है कि सरकार के काम पर लोग इस बार वोट डालेंगे. हाल ही में जो संशोधन हुए हैं उसका आम जनता ने उनका स्वागत किया है. ऐसे में किसी नुकसान की कोई बात ही खड़ी नहीं होती.

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First published: July 31, 2019, 6:00 PM IST
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