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छिटकते दलित वोटों को बटोरने के लिए बीजेपी तैयार... आरक्षण बढ़ाने को 2022 में बनाएगी मुद्दा
Dehradun News in Hindi

Kishore Kumar Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: December 31, 2019, 1:15 PM IST
छिटकते दलित वोटों को बटोरने के लिए बीजेपी तैयार... आरक्षण बढ़ाने को 2022 में बनाएगी मुद्दा
छत्तीसगढ़ बीजेपी. (File Photo)

2017 और 2019 के चुनावों में भाजपा को दलितों का बम्पर वोट मिला था लेकिन निकाय और पंचायतों में यह वोट बीजेपी से खिसक गया था.

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देहरादून. उत्तराखंड विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र सात जनवरी को बुलाया गया है. इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण को अगले 10 साल के लिए जारी रखने के  प्रस्ताव को पारित कराया जाएगा. बता दें कि उत्तराखंड में लगभग 21 फ़ीसदी वोट दलित समुदायों का है. इस पर न सिर्फ भाजपा बल्कि कांग्रेस और बसपा की भी नज़र रही है. इतना बड़ा वोट बैंक प्रदेश की सत्ता पर काबिज़ करने के लिए काफ़ी है. इसलिए जानकार मान रहे हैं कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के 10 साल के लिए आरक्षण बढ़ाने के मुद्दे को बीजेपी 2022 में कैश करेगी.

राजनीतिक इस्तेमाल होगा 

जानकारों के मुतबिक भाजपा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण की अवधि बढ़ाने के  प्रस्ताव का उत्तराखंड के 2022 के चुनावों में फ़ायदा ज़रूर उठाना चाहेगी. वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ दिनेश जुयाल कहते हैं कि यूं तो यह संविधान में दी गई व्यवस्था के अनुसार हो रहा है लेकिन यह तय है कि इसका राजनीतिक इस्तेमाल ज़रूर किया जाएगा. जुयाल कहते हैं कि दरअसल दलितों को राजनीतिक दल हमेशा वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करते आए हैं.



देखा जाए तो 2017 और 2019 के चुनावों में भाजपा को दलितों का बम्पर वोट मिला था लेकिन निकाय और पंचायतों में यह वोट बीजेपी से खिसक गया. ऐसे में बीजेपी की पूरी कोशिश रही है कि 10 साल  के लिए आरक्षण बढ़ाने के मुद्दों का राजनीतिकरण करके आने वाले चुनावों में फायदा लिया जाए. इसके लिए इस मुद्दे को ज़िन्दा रखा जाए.



जनहित के फ़ैसले लेती है बीजेपी 

भाजपा प्रदेश महामंत्री खजान दास दावा करते हैं कि बीजेपी कोई भी काम राजनीति के लिए नहीं करती बल्कि जनहित के लिए करती है. दलितों के सवाल पर बीजेपी महामंत्री कहते हैं कि बीजेपी की केंद्र और राज्य की सरकारों ने दलितों के उत्थान के लिए कई काम किए हैं और इसलिए वे बीजेपी के साथ हैं.

अब यह देखना होगा कि बीजेपी फिर से कैसे दलितों के वोटों को अपने पाले में करती है क्योंकि भाजपा के हाथों से लगातार एक के बाद के राज्य निकल रहे हैं. ऐसे में भाजपा कोई भी मौका और मुद्दा नहीं छोड़ना चाहती, जिससे उससे राजनीतिक फ़ायदा न हो.

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First published: December 31, 2019, 1:15 PM IST
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