पंचायत चुनाव परिणामों की समीक्षा करेगी भाजपा... ढाई साल में क्यों गिरा पार्टी का ग्राफ़
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पंचायत चुनाव परिणामों की समीक्षा करेगी भाजपा... ढाई साल में क्यों गिरा पार्टी का ग्राफ़
भाजपा ने इन चुनावों में जीत के लिए जो तैयारी की थी परिणाम उसके मुताबिक वोट नहीं मिले.

संगठन (Party Organisation) के लिहाज से उत्तराखंड (Uttarakhand) में भाजपा (BJP) के आगे कोई पार्टी नहीं टिकती. इसलिए भी भाजपा माथे पर चिंता की लकीरें इतनी गहरी हैं.

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देहरादून. उत्तराखंड भाजपा (Uttarakhand BJP) भले ही यह दावा कर रही है कि पंचायत चुनावों (Panchayat Election) में पार्टी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन चुनाव के नतीजों (Election Results) ने भाजपा को आत्म समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है.  वजह साफ़ है कि भाजपा इन चुनावों में जीत के लिए जो तैयारी की थी परिणाम उसके मुताबिक नहीं मिले. पार्टी अब इन चुनाव परिणामों की समीक्षा करने जा रही है हालांकि नेता यह भी कह रहे हैं यह रुटीन समीक्षा है.

हर चुनाव बाद की जाती है समीक्षा 

भाजपा की पंचायत चुनावों की समीक्षा में चुनावों में अपेक्षा से कम सीटें आने का तो मुद्दा रहेगा ही समीक्षा बैठक में पार्टी इस बात की भी पड़ताल करेगी कि वोट किस मुद्दे पर मिला और किस पर नहीं. भाजपा प्रदेश महामंत्री खजान दास ने कहा कि पार्टी हर चुनाव के बाद समीक्षा करती है. इस समीक्षा में कई पहलुओं के साथ देखा जाएगा कि क्या कमी रही और कहां.



भाजपा के प्रदेश महामंत्री खजान दास कहते हैं कि चुनाव के बाद पूछताछ सबसे की जाती है और इसमें बड़ा-छोटा नहीं देखा जाता. पार्टी कार्यकर्ताओं, विधायकों, वरिष्ठ नेताओं सबसे चुनाव परिणामों को लेकर बात करेगी.
चुनाव अधिकारी देंगे रिपोर्ट 

दरअसल विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मिली बम्पर जीत का क्रम उत्तराखंड चुनावों में कायम नहीं रह पाया है और पंचायत चुनावों में पार्टी पहले नंबर से खिसककर दूसरे स्थान पर आ गई है. अब पार्टी इस बात की समीक्षा करेगी कि उत्तराखंड पंचायत चुनावों में उसकी चमक फीकी कैसे पड़ गई.

पौड़ी ज़िले के चुनाव प्रभारी वीरेंद्र सिंह बिष्ट कहते हैं कि समीक्षा बैठक में सभी चुनाव अधिकारी अपने ज़िले की रिपोर्ट देंगे. बिष्ट के मुताबिक चुनाव के दौरान परेशानियों और कारणों को बताया जाएगा.

सबसे मजबूत संगठन 

बहरहाल दो राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने उत्तराखंड भाजपा को चौकन्ना कर दिया है कि प्रचंड जनादेश मिलने के बाद मात्र ढाई साल में ही पार्टी को पंचायत चुनावों में पटखनी क्यों मिली.

संगठन के लिहाज से उत्तराखंड में भाजपा के आगे कोई पार्टी नहीं टिकती, न ही चुनाव तैयारियों के हिसाब से. इसलिए भी भाजपा माथे पर चिंता की लकीरें इतनी गहरी हैं.

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