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कैग रिपोर्ट ने खोली त्रिवेंद्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन की पोल… कर्ज़ का ब्याज़ चुकाने के लिए कर्ज़ लेने की नौबत

News18 Uttarakhand
Updated: December 10, 2019, 7:33 PM IST
कैग रिपोर्ट ने खोली त्रिवेंद्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन की पोल… कर्ज़ का ब्याज़ चुकाने के लिए कर्ज़ लेने की नौबत
उत्तराखंड विधानसभा में आज वित्त वर्ष 2017-18 की कैग रिपोर्ट पेश की गई.

मार्च 2017 को सत्ता में आई त्रिवेंद्र सरकार (Trivendra Government) के कार्यकाल की पहली कैग रिपोर्ट है.

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देहरादून. उत्तराखंड विधानसभा (Uttarakhand Assembly) में आज वित्त वर्ष 2017-18 की कैग रिपोर्ट (CAG Report) पेश की गई. यह रिपोर्ट मार्च 2017 को सत्ता में आई त्रिवेंद्र सरकार (Trivendra Goernment) के कार्यकाल की पहली रिपोर्ट है. रिपोर्ट में राज्य  सरकार के वित्तीय प्रबंधन (Financial Management) पर बड़े सवाल खड़े किए गए हैं. कैग रिपोर्ट के अनुसार ‘आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया’ की तर्ज पर चल रही उत्तराखंड (Uttarakhand) की हालत यह है कि इसे उधार लिए गए पैसे के ब्याज का भुगतान करने के लिए भी कर्ज़ लेना पड़ सकता है.

बढ़ा राजस्व घाटा 

कैग रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 से 18 के बीच राजस्व व्यय तो 16 फ़ीसदी की सालाना औसत से बढ़ा, लेकिन  आय में वृद्धि 11 फ़ीसदी ही रही. यही नहीं इस दौरान राज्य  का कुल खर्च भी  20 हज़ार करोड़ रुपये से बढ़कर पैंतीस हजार करोड़ पर पहुंच गया. राजस्व घाटा भी 383 करोड़ से बढ़कर 1,978 करोड़ पर पहुंच गया.

सरकार दावा कर रही है कि हालात काबू में हैं और विपक्ष सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है.

एक आधार कार्य से लिंक 761 राशन कार्ड

अपात्र लाभार्थियों को योजना में शामिल कर लिया गया और जो पात्र थे उन्हें बाहर कर दिया गया.

विभाग के पास पर्याप्त बजट होने के बावजूद अनावश्यक रूप से आरबीआई से करीब पांच सौ करोड़़ की कैश क्रेडिट लिमिट बनाई गई और इसके कारण राजकोष को 19 करोड़़ रुपये की चपत लग गई.गड़बड़़ियों का आलम यह था कि टिहरी में 573, अल्मोड़़ा में 107, ऊधमसिंह नगर में 30,पौड़ी में 51 राशन कार्ड को एक ही आधार कार्ड से लिंक किया गया था.

पेंशन में गड़बड़ियां

इसी तरह समाज कल्याण् विभाग में वृद्धावस्था पेंशन वितरण में भी अंधेरगर्दी की गई.

614 लाभार्थियों को 17 लाख रुपए अधिक का भुगतान कर दिया गया.

पिथौरागढ़, ऊधमसिंह नगर, चंपावत ज़िलों में ऐसे 74 लाभार्थी थे जिनको मृत्यु के बाद भी पेंशन दी जा रही थी.

चार करोड़ रुपये ऐसे व्यक्तियों को पेंशन के रूप में दे दिए गए जो पात्र ही नहीं थे.

85 पेंशनधारी ऐसे थे जिन्हें दोबारा पेंशन के रूप में करीब 21 लाख रूपया का भुगतान कर दिया गया.

रिपोर्ट सामने आने के बाद समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

बिना लाइसेंस चल रहे 13 ब्लड बैंक

कैग रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हैं. राज्य में कुल 35 ब्लड बैंक में से 13 ऐसे हैं जो सालों से बिना लाइसेंस संचालित हो रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों से करार भंग होने के बाद  क्षतिपूर्ति के 18 करोड़ रुपये वसूल नहीं कर पाया और न ही दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई.

कैग की विस्तृत रिपोर्ट में ऐसी गड़बड़ियों, लापरवाहियों की भरमार है जिनकी वजह से राज्य के वित्तीय संसाधनों को चूना लगा है और राज्य के निवासियों को वह लाभ नहीं मिले जिनके वह हकदार थे.

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First published: December 10, 2019, 6:19 PM IST
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