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हिमालयी जलस्रोतों के पुनर्जीवन के लिए 1203 करोड़ के प्रोजेक्ट को केंद्र की सैद्धांतिक सहमति... होंगे ये सारे काम
Dehradun News in Hindi

News18 Uttarakhand
Updated: January 27, 2020, 5:44 PM IST
हिमालयी जलस्रोतों के पुनर्जीवन के लिए 1203 करोड़ के प्रोजेक्ट को केंद्र की सैद्धांतिक सहमति... होंगे ये सारे काम
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत निर्माणाधीन सूर्यधार झील का निरीक्षण करते हुए. (फ़ाइल फ़ोटो)

नीति आयोग द्वारा ‘जलसुरक्षा के लिए हिमालय के जलस्त्रोतों के पुनर्जीवन’ पर प्रकाशित रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए सिंचाई विभाग ने यह प्रोजेक्ट तैयार किया है.

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देहरादून. केंद्र सरकार ने लगभग 1203 करोड़ रुपये के उत्तराखण्ड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक स्वीकृति दी है. नीति आयोग द्वारा ‘जलसुरक्षा के लिए हिमालय के जलस्त्रोतों के पुनर्जीवन’ पर प्रकाशित रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए सिंचाई विभाग ने यह प्रोजेक्ट तैयार किया है. प्रोजेक्ट की प्री-फ़िज़ीबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर ली गई है. इसके तहत प्रस्तावित बांध, नहरों और तालाबों के निर्माण की डीपीआर बनाई जा रही है.

सकारात्मक आर्थिक, सामाजिक प्रभाव 

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के समक्ष प्रोजेक्ट का प्रस्तुतिकरण दिया गया. बताया गया कि प्रस्तावित ‘उत्तराखण्ड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट’’ के तहत जलस्त्रोतों के पुनर्जीवन, जलाशयों से गाद निकालने, तालाबों के निर्माण और नहरों के पुनरुद्धार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट पर गम्भीरता और समयबद्धता के साथ काम करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे प्रदेश को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलने के साथ ही सकारात्मक सामाजिक प्रभाव भी होंगे. पर्यावरण और वन्य जीवन के संरक्षण में भी यह प्रोजेक्ट सहायक रहेगा. परियोजना गरीबी उन्मूलन, अच्छा स्वास्थ्य, साफ़ पानी और स्वच्छता, क्लाइमेट एक्शन और भूमि पर जीवन जैसे स्थायी विकास लक्ष्यों की पूर्ति में सहायक होगी.

लागत 

सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जलस्त्रोतों के पुनर्जीवन के तहत जलस्त्रोतों की मैपिंग और स्प्रिंग शैड मैनेजमेंट किया जाएगा. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाईड्रॉलॉजी रुड़की ने लघु चेक डैम बनाने, ट्रेंचेज़ को रिचार्ज करने और कैचमेंट एरिया में पौधरोपण का सुझाव दिया है. स्त्रोतों के पुनर्जीवन पर लगभग 90 करोड़ रुपये की लागत आएगी.

मौजूदा नहरों के पुनरुद्धार के तहत 382 लघु सिंचाई की नहरों/गूलों की मरम्मत के लिए 95 योजनाओं का काम लिया गया है. इन 95 ग्रेविटी स्कीमों के पुनरुद्धार और नवीनीकरण पर 324 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है.ये बनेंगे झीलें और बांध 

जलाशयों के डिसिल्टिंग के तहत हरिपुरा और बौर जलाशयों की डिसिल्टिंग कर इनकी सिंचन क्षमता में सुधार लाया जाएगा. इस पर 176 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है.

प्रोजेक्ट में कुल 10 बांध और झीलों का निर्माण प्रस्तावित है. इनमें पूर्वी नयार नदी पर खैरासैंण झील, सतपुली के निकट झील, पश्चिमी नयार नदी पर पापड़तोली, पैठाणी, स्यूंसी और मरखोला झील, साकमुंडा नदी पर झील, थल नदी पर झील, खो नदी पर दुगड्डा में बैराज और रामगंगा नदी पर गैरसैंण झील शामिल हैं. इन 10 झीलों और बैराज के निर्माण पर 613 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है.

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First published: January 27, 2020, 5:42 PM IST
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