सोन चिरैया के लिए अनुकूल नहीं गुजरात, मेल हुए समाप्त, 10 मादा पर भी मंडराया संकट

सोन चिरैया की लगातार घटती संख्या से चिंतित भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिक अब इनके संरक्षण के लिए फ्रांस के वैज्ञानिकों की मदद ले रहे हैं.

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: July 16, 2019, 8:20 PM IST
सोन चिरैया के लिए अनुकूल नहीं गुजरात, मेल हुए समाप्त, 10 मादा पर भी मंडराया संकट
भारत में सोन चिरैया 125 के करीब बची हैं.
Sunil Navprabhat
Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: July 16, 2019, 8:20 PM IST
पृथ्वी पर उड़ने वाले सबसे भारी पक्षियों में से एक ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अर्थात सोन चिरैया का अस्तित्व संकट में है. केवल भारत में पाई जाने वाली सोन चिरैया अब कुल 125 के आसपास बची हैं. हालांकि कई मीडिया रिपोर्ट्स में सोन चिरैया की संख्‍या करीब 130 बताई जा रही है. दरअसल, इससे चिंतित भारत सरकार अब इन्हें बचाने के लिए फ्रांस के वैज्ञानिकों की मदद ले रही है. करीब एक मीटर लंबाई वाली सोन चिरैया कभी देश के 12 राज्यों में पाई जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका क्षेत्र सिमटकर राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात तक हो गया.

संकट में है सोन चिरैया का वजूद
इनके संरक्षण में जुटे भारतीय वन्य जीव संस्थान (WII) के निदेशक वाईबी माथुर कहते हैं कि अब महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से भी सोन चिरैया गायब हो चुकी हैं. ज‍बकि गुजरात में केवल 10 बची हैं, लेकिन ये सभी फीमेल हैं. हालांकि बाकी की 115 सोन चिरैया राजस्थान में हैं.

डॉ. माथुर ने कहा, 'मांस और इनके खूबसूरत पंखों की सजावट के लिए लगातार इनका अवैध शिकार हो रहा है. इसके अलावा पावर लाइनों का जाल इनके लिए डेथ प्वाइंट साबित हो रहा है.'

भारतीय वन्य जीव संस्थान (WII) के निदेशक डॉ. वाईबी माथुर.


सरकार ने उठाया ये कदम
सोन चिरैया की लगातार घटती संख्या से चिंतित भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिक अब इनके संरक्षण के लिए फ्रांस के वैज्ञानिकों की मदद ले रहे हैं. संस्थान के निदेशक डॉ. माथुर का कहना है कि फ्रांस के ये साइंटिस्ट आबूधाबी में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की ही दूसरी प्रजाति के संरक्षण को लेकर काम कर रहे हैं. जहां वे कृत्रिम ब्रीडिंग के जरिए इस प्रजाति की संख्या बढ़ाने में कामयाब रहे हैं.
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सोन चिरैया को विलुप्‍त होने से बचाने के लिए राजस्थान के रामदेवरा में कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर बनाया जा रहा है.


इसी सिलसिले में फ्रांसिसी साइंटिस्टों की दो सदस्यीय टीम मई में राजस्थान गई थी. यहां राजस्थान के रामदेवरा में कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर बनाया जा रहा है, जिसमें ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के अंडों को रखा जाएगा और उनकी तब तक देखभाल की जाएगी जब तक बच्चे पैदा होने के साथ ही खुद उड़ने में सक्षम नहीं हो जाते. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के कंजर्वेशन को चलाए जा रहे इस प्रोजेक्ट पर देश-दुनिया के साइंटिस्टों, पर्यावरणविदों की नजर है. सवाल सिर्फ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण का नहीं है. सवाल ये है कि विकास की रप्तार में धीरे-धीरे कई प्रजातियां विलुप्त होती जा रही हैं.

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First published: July 16, 2019, 8:15 PM IST
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