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बड़ी खबर - देवस्थानम बोर्ड से खफा चार धाम पुरोहित BJP को घेरेंगे, 15 सीटों से लड़ेंगे उत्तराखंड चुनाव

बड़ी खबर - देवस्थानम बोर्ड से खफा चार धाम पुरोहित BJP को घेरेंगे, 15 सीटों से लड़ेंगे उत्तराखंड चुनाव

देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ विरोध उत्तराखंड चुनाव मैदान तक पहुंचेगा.

देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ विरोध उत्तराखंड चुनाव मैदान तक पहुंचेगा.

Uttarakhand Election : चार धाम पुरो​हितों की समिति के प्रमुख कृष्णकांत कोठियाल के हवाले से एक खबर में कहा गया कि 'पुरोहितों को बीजेपी सरकार (BJP Government) में अब विश्वास नहीं रहा. हम पूरे देश में अपना संदेश यहां आने वाले श्रद्धालुओं के ज़रिये देने की योजना बना रहे हैं. हम उनसे बीजेपी के खिलाफ वोट देने की अपील करेंगे और सभी गणमान्य लोगों को पोस्टकार्ड भी इस बारे में भेजेंगे.' पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने जिस तरह लंबे किसान आंदोलन (Farmers Movement) के बाद कृषि कानून (Three Farm Laws) वापस लिये, अब उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) पर किस तरह दबाव बन रहा है और पुरोहित समाज कितना आक्रामक है, जानिए.

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    देहरादून. उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी खबर यह है कि कई महीनों से देवस्थानम बोर्ड को भंग किए जाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे तीर्थ पुरोहित भी चुनाव मैदान में उतरेंगे. चार धाम के तीर्थ पुरोहितों द्वारा बनाई गई हक हकूकधारी महापंचायत समिति ने ऐलान किया है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में 15 सीटों से अपने उम्मीदवार खड़े करेगी और राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी के खिलाफ बड़ा और ​आक्रामक प्रचार करेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुक्रवार को ही तीन कृषि कानून वापस लिये जाने की घोषणा के बाद इस तरह की चर्चाएं ज़ोरों पर हैं कि उत्तराखंड सरकार देवस्थानम बोर्ड एक्ट वापस लेने पर विचार कर सकती है, लेकिन इस तीर्थ पुरोहितों के तेवर से कई संकेत मिल रहे हैं.

    देवस्थानम बोर्ड मंदिरों पर पारंपरिक रूप से पुरोहितों के अधिकारों को खत्म करता है, ऐसा आरोप तीर्थ पुरोहितों का रहा है, जो त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के ज़माने में बने इस बोर्ड को तबसे ही खत्म किए जाने की मांग पर अड़े रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर की मानें तो अब तीर्थ पुरोहित न केवल चुनाव लड़ने के मूड में आ गए हैं बल्कि राज्य और केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में भी हैं. समिति के हवाले से खबर में कहा गया है कि पुरोहित समाज गैरसैंण में होने वाले आगामी विधानसभा सत्र के दौरान सरकार का घेराव भी करेगा.

    क्या कांग्रेस के हाथ लगेगी मुद्दे की बटेर?
    समिति के प्रमुख कृष्णकांत कोठियाल ने ये ऐलान और चेतावनी देते हुए कहा कि तीर्थ पुरोहित विपक्ष के पास भी जाएंगे. इस बयान का मतलब यह निकाला जा रहा है कि भाजपा के लिए तो बोर्ड मुश्किल खड़ी करेगा ही, कांग्रेस को इसका सियासी लाभ मिल सकता है. कांग्रेस पार्टी पुरोहितों को नज़रअंदाज़ किए जाने और मंदिरों की उपेक्षा करने का आरोप लगाकर सरकार के खिलाफ और पुरोहितों के समर्थन में अपना चुनावी प्रचार और तेज़ कर सकती है.

    हरीश रावत पहले ही उठा चुके हैं मुद्दा
    कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति प्रमुख हरीश रावत पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि कांग्रेस की सरकार बनी, तो इस बोर्ड को भंग कर दिया जाएगा. अब इस मुद्दे पर पुरोहितों का खुला समर्थन भी कांग्रेस को मिलने की संभावना बन रही है. इधर, गैरसैंण में शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को लेकर किसी ठोस ​फैसले की भी पूरी संभावना बन रही है और अगर इस बोर्ड एक्ट को खत्म किए जाने का फैसला लिया गया, तो चुनाव से कुछ ही पहले नये सिरे से मुद्दे और नैरैटिव तय करने की जंग शुरू होगी.

    गौरतलब है कि देवस्थानम बोर्ड का मुद्दा उत्तराखंड की तकरीबन एक दर्जन सीटों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह भी याद रखने की बात है कि 1 नवंबर को केदारनाथ पहुंचने पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को पुरोहित, पुजारी समुदाय ने काले झंंडे दिखाकर मंदिर में पूजा किए बगैर धाम से लौटने पर मजबूर कर दिया था.

    Tags: Anti government protests, Uttarakhand Assembly Election 2022, Uttarakhand news, Uttarakhand politics

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