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देवस्थानम बोर्ड पर बवाल: चार धाम पुरोहितों ने शीर्षासन कर किया आंदोलन, क्या अब फैसला करेगी सरकार?

देवस्थानम बोर्ड पर बवाल: चार धाम पुरोहितों ने शीर्षासन कर किया आंदोलन, क्या अब फैसला करेगी सरकार?

तीर्थ पुरोहित शीर्षासन लगाकर विरोध प्रदर्शन पहले भी करते रहे हैं.

तीर्थ पुरोहित शीर्षासन लगाकर विरोध प्रदर्शन पहले भी करते रहे हैं.

Uttarakhand Election : चार धाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत संस्था के बैनर तले उत्तराखंड के तीर्थ पुरोहितों ने प्रत्यक्ष तौर पर सरकार के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोल दिया है. राज्य में विधानसभा चुनाव (Assembly Election) से पहले सरकार एक बड़े मुद्दे पर पूरी तरह घिर गई है. आक्रोश रैली और काले दिन की घोषणा पुरोहित कर रहे हैं तो दूसरी तरफ पुष्कर सिंह धामी सरकार पर कानून वापस लेने का दबाव कई कारणों से बन चुका है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Goverment) बैकफुट पर आएगी? आई भी तो कब और कैसे होगा ये सब?

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    देहरादून. उत्तराखंड के तीर्थ पुरोहितों ने देवस्थानम् बोर्ड के खिलाफ अपना आंदोलन तेज़ करते हुए सरकार के घेराव का सिलसिला शुरू कर दिया है. चार धाम के पुरोहितों ने मंगलवार को उत्तराखंड के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के आधिकारिक आवास पर धरना प्रदर्शन किया और ‘शीर्षासन’ लगाकर विरोध जताया. 2019 में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के समय में बनाए गए देवस्थानम बोर्ड एक्ट को पंडों-पुरोहितों के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन बताते हुए इसे भंग करने की लंबे समय से अपनी मांग को दोहराते हुए प्रदर्शनकारी पुरोहितों ने कहा कि सरकार नहीं मानी तो प्रदर्शन और उग्र होगा, वहीं उनियाल ने 30 नवंबर तक मामले को सुलझा लिये जाने की बात कही.

    केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों से जुड़े पुरोहितों ने मंगलवार को राज्य सरकार के मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पर विरोध प्रदर्शन किया तो नाराज़ पुरोहितों से उनियाल मिलने पहुंचे. पीटीआई की खबर के मुताबिक उनियाल ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वो 30 नवंबर तक प्रतीक्षा करें, इसके बाद एक बड़ा फैसला लिया जाएगा. इससे पहले चारों धामों की यात्रा संपन्न होने से ऐन पहले ही पुरोहितों ने पुष्कर सिंह धामी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को तेज़ करने की बात कही थी. इसी क्रम में इस विरोध प्रदर्शन को राजधानी देहरादून तक लेकर आया गया.

    क्या सरकार वापस लेगी कानून?

    तीर्थ पुरोहितों के प्रदर्शन और आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या धामी सरकार अपनी ही पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के इस एक्ट को वापस लेगी. असल में इस एक्ट की वापसी को लेकर बड़ी स्थितियां बन रही हैं, जिन्हें एक नज़र में ऐसे समझा जाना चाहिए.

    1. उनियाल ने पुरोहितों से कहा कि 30 नवंबर के बाद सरकार बड़ा फैसला लेगी. इसका सीधा अर्थ यही समझा जा रहा है कि सरकार ने मांग मानते हुए बोर्ड को भंग करने का मन बना लिया है.

    2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल में विवादित कृषि कानूनों को वापस ले चुके हैं, जिनके खिलाफ 11 महीने लंबा प्रदर्शन किसानों ने किया. पुरोहित भी 2019 में एक्ट बनने के समय से ही विरोध दर्ज करा रहे हैं और पिछले कई महीनों से शांत धरने देते रहे हैं. पीएम मोदी की तर्ज़ पर सीएम धामी पर भी एक्ट वापसी का दबाव बनता दिख रहा है.

    3. इस मामले पर विचार करने वाली कमेटी अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप चुकी है. विधानसभा का आगामी शीतकालीन सत्र गैरसैंण में होने जा रहा है. चुनावों को देखते हुए इस मौके पर राज्य सरकार बड़ी सौगात दे सकती है.

    4. चूंकि तीर्थ पुरोहितों का सीधा प्रभाव कम से कम 3 विधानसभा सीटों और विस्तृत तौर पर करीब 9 सीटों पर माना जाता है, इसलिए सरकार चुनाव के समय उन्हें नाराज़ नहीं कर सकती.

    5. पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने बोर्ड के नियंत्रण से मंदिरों को बाहर करने की बात कही थी, लेकिन वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके इसलिए भी धामी पर दबाव है.

    27 नवंबर मनाएंगे‘काला दिन’, निकालेंगे ‘आक्रोश रैली’

    प्रदर्शन उग्र करने की चेतावनी पहले ही दे चुके तीर्थ पुरोहितों ने कहा है कि 27 नवंबर 2019 को यह एक्ट बनाया गया था और इस दिन को ‘काले दिन’ के तौर पर मनाते हुए पुरोहित समाज आगामी 27 नवंबर को ‘आक्रोश रैली’ निकालेगा. गौरतलब है कि चार धाम यात्रा के अंतिम दिनों में केदारनाथ पहुंचे त्रिवेंद्र सिंह रावत को पुरोहितों ने मंदिर से खदेड़ दिया था. दूसरी ओर, कांग्रेस नेता केदारनाथ से लेकर देहरादून तक पुरोहितों की मांगों का समर्थन कर घोषणा कर चुके हैं कि कांग्रेस की सरकार बनते ही इस बोर्ड को भंग किया जाएगा.

    Tags: Char Dham, Protest Against Devasthanam Act, Uttarakhand Assembly Election 2022, Uttarakhand Government, Uttarakhand news

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