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Chardham Deaths : 80 से ज्यादा मौतों की वजह साफ नहीं, एक्सपर्ट ने दी कोरोना संक्रमण के असर की थ्योरी!

चार धाम में लगातार बड़ी संख्या में हो रही मौतों से चिंता बढ़ती जा रही है.

चार धाम में लगातार बड़ी संख्या में हो रही मौतों से चिंता बढ़ती जा रही है.

Char Dham Yatra : ठंड, ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी जैसे मुश्किल हालात के चलते पहले भी चारधाम यात्रियों की मौतें होती रही हैं लेकिन 6 महीने के यात्रा सीज़न के एक महीने से भी कम वक्त में इतनी मौतों ने सबकी चिंता बढ़ाई है. जानिए अब कोविड के प्रभाव को लेकर क्या थ्योरी आ रही है.

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देहरादून. कोविड की वजह से दो साल बाद बहाल हो सकी चार धाम यात्रा में अब तक 92 लोगों की मौत हो चुकी है. ये मौतें क्यों हो रही हैं? 25 मई तक ​80 लोगों की मौत के कारण को gलेकर स्वास्थ्य विभाग के पास कोई जवाब नहीं है. अब तक माना जा रहा था कि जिन लोगों को पहले से ही बीपी, डायबिटीज़ या हाइपरटेंशन जैसी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर शिकायतें हैं, उन्हीं की मौत हो रही है, लेकिन अब हेल्थ एक्सपर्ट इन मौतों के पीछे कोरोना वायरस के असर की थ्योरी भी दे रहे हैं.

चार धाम यात्रा 3 मई से शुरू हुई और 25 मई तक हुई मौतों के आंकड़े को लेकर जब न्यूज़ 18 ने पड़ताल की, तो स्वास्थ्य विभाग के पास कारणों को लेकर कोई पुख्ता जवाब नहीं मिला. 25 मई यानी बुधवार को 11 लोगों की मौत हुई. इनमें सबसे ज़्यादा 5 लोगों की जान केदारनाथ धाम की यात्रा में गई. केदारनाथ में कुल मौतों का आंकड़ा अब तक 41 तक पहुंच चुका है. शासन और प्रशासन लगातार मेडिकल चेकअप करवाकर आने की ही अपील कर रहे हैं.

स्वास्थ्य विभाग के साफ निर्देश हैं कि यात्रा से पहले चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में 50 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों की हेल्थ स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से हो. न्यूज़ 18 ने उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर शैलजा भट्ट से पूछा कि आखिर इन मौतों के पीछे वजह क्या है? तो उन्होंने कहा कि अब तक कुछ स्पष्ट नहीं है क्योंकि पोस्टमार्टम में कई वजहें बताई नहीं जा सकतीं और कई लोगों ने पोस्टमार्टम करवाने से ही इनकार कर दिया.

क्या है कोविड के असर की थ्योरी?
डॉ. शैलजा के मुताबिक अब तक कोई भी मौत अस्पताल में नहीं हुई, बल्कि मृतक ही अस्पताल तक लाये गये इसलिए वजह को लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता. दूसरी तरफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ इन मौतों के पीछे कह रहे हैं कोरोना वायरस ने पीड़ितों के फेफड़ों और हृदय पर सीधा असर डाला है. ऐसे में ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी मौत की बड़ी वजह बनती है.

सीनियर फिजिशियन केडी जोशी का कहना है कि ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी का सबसे ज़्यादा असर हार्ट, लंग्स और माइंड पर ही पड़ता है. चूंकि कोविड का असर भी संक्रमित लोगों के इन्हीं अंगों पर ज़्यादा रहा इसलिए हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क पर कोविड के प्रभावों से जूझ रहे मरीज़ कम ऑक्सीजन वाले इलाकों में न जाएं. उन्होंने कहा लोगों को सेहत का पूरा ख्याल रखना चाहिए. यात्रा तभी करें जब पूरी तरह खुद को स्वस्थ और फिट महसूस करें.

Tags: Char Dham Yatra, Corona effect, Deaths

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