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Char Dham Yatra में दो साल के सब्र का बांध टूटा, कारोबारी शुक्रगुजार तो प्रशासन भगवान से कर रहा गुहार!

केदारनाथ में हाल ही श्रद्धालुओं की भीड़ की यह तस्वीर सुर्खियों में रही.

केदारनाथ में हाल ही श्रद्धालुओं की भीड़ की यह तस्वीर सुर्खियों में रही.

गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शुरू हुए एक हफ्ता, तो केदारनाथ यात्रा को चार दिन और बद्रीनाथ की यात्रा को 30 घंटे से ज़्यादा वक्त पूरा हो चुका है. इतने समय में कितने श्रद्धालु कहां पहुंच चुके हैं? किस तरह व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं और कैसे प्रशासन लाचार नज़र आ रहा है? सब कुछ यहां जानें.

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देहरादून. दो साल के कोरोना काल के बाद चार धाम तीर्थ यात्रा में यात्रियों का हुजूम उमड़ने का अंदाज़ा पहले ही था और ऐसा ही हो रहा है. स्थानीय व्यवसायी एक तरफ भगवान का शुक्र अदा कर रहे हैं लेकिन मुसीबत पुलिस और प्रशासन की हो गई है. चारों धामों केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री में अब तक यानी एक हफ्ते के भीतर तक़रीबन दो लाख लोग पहुंच चुके हैं. यह आंकड़ा ज़्यादा भी हो सकता है क्योंकि हज़ारों लोग बगैर रजिस्ट्रेशन के भी पहुंच रहे हैं. ऐसे में व्यवस्थाओं को लेकर चौतरफा चुनौतियां ही दिख रही हैं.

3 मई को जब यात्रा शुरू होनी थी, तब तक करीब 3 लाख यात्री उत्तराखंड के पर्यटन विभाग के पोर्टल पर रजिस्ट्रशेन करवा चुके थे. अब स्थनीय लोग बता रहे हैं कि हज़ारों यात्री बगैर रजिस्ट्रेशन के पहुंचे हैं. यह भी एक संकेत है कि केदारनाथ से श्रद्धालुओं की भीड़ की जो हालिया तस्वीरें सामने आईं, उनमें किलोमीटर लंबी कतार में लोग नज़र आए. ताज़ा आंकड़ों की मानें तो उत्तरकाशी में गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में ही अब तक 1 लाख से ज़्यादा यात्री पहुंच चुके हैं.

भीड़, नियम और पुलिस की कोशिशें!
पुलिस का कहना है कि केदारनाथ और बद्रीनाथ के खुलने का समय चूंकि वीकेंड के आसपास रहा इसलिए भारी भीड़ उमड़ी. दावा यह है कि भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने तमाम कदम उठाए. न्यूज़18 से बातचीत में डीजीपी अशोक कुमार ने कहा, ‘एहतियात के तौर पर हमने बगैर रजिस्ट्रेशन वाले लोगों को धाम की तरफ न जाने देना तय किया.’

इससे पहले, केदारनाथ में 12000, बद्रीनाथ में 15000, गंगोत्री में 7000 और यमुनोत्री में 4000 श्रद्धालुओं को रोज़ दर्शन के लिए अनुमति दिए जाने के फैसले पर असमंजस रही. अब अधिकारियों का कहना है कि वह इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के निर्णायक रुख का इंतज़ार कर रहे हैं. भारी भीड़ का नतीजा यह है कि यात्रियों को होटल या लॉज नहीं मिल रहे हैं. वहीं, उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे पर सोमवार और मंगलवार घंटों तक के जाम की स्थिति बनी, तो लोग पानी और चाय तक को तरस गए.

स्वास्थ्य सेवाओं का क्या है हाल?
अब तक 20 चार धाम यात्रियों की मौत हुई है. ज़्यादातर लोग हृदय संबंधी शिकायतों से काल कवलित हुए. पर्यटन विभाग के ब्योरे के मुताबिक चारों धाम 10000 फीट से ज़्यादा ऊंचाई पर स्थित हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर कम होता है इसलिए कमज़ोर दिल के लोगों को तकलीफ होती ही है. 2013 की आपदा के बाद से ​चार धाम रूट पर तैनात डॉक्टरों से क्लीयरेंस अनिवार्य था, पर इस बार यह नियम नहीं है.

न्यूज़18 से स्वास्थ्य विभाग की डीजी डॉ. शैलजा भट्ट ने कहा, ‘हमने स्वास्थ्य सुविधाएं दी हैं लेकिन हर यात्री की जांच के लिए डॉक्टर मुहैया नहीं कराया जा सकता. हमें अंदाज़ा था कि ज़्यादातर लोग दिल के रोगों से ग्रस्त हो सकते हैं इसलिए हमने डॉक्टरों की ट्रेनिंग भी करवाई थी.’ इधर, स्वास्थ्य मंत्री धनसिंह रावत ने कहा, हृदय रोग से निपटने वाली एंबुलेंसों की व्यवस्था यात्रा रूट पर है और अन्य सेवाएं भी बढ़ाई जा रही हैं.

गौरतलब है कि 22 मई से हेमकुंड साहिब की यात्रा भी शुरू होने वाली है. यह तीर्थ स्थान 15200 फीट की ऊंचाई पर है, जहां सिख समुदाय के श्रद्धालु पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से खासकर बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.

Tags: Char Dham Yatra, Uttarakhand Tourism

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