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जेल में बंद बदमाश सोशल नेटवर्क साइट्स से मजबूत कर रहे हैं अपना क्राइम नेटवर्क, जानिए कैसे...

satendra bartwal | News18 Uttarakhand
Updated: November 4, 2019, 11:54 AM IST
जेल में बंद बदमाश सोशल नेटवर्क साइट्स से मजबूत कर रहे हैं अपना क्राइम नेटवर्क, जानिए कैसे...
उत्तराखंड की जेलों में बंद कैदी सोशल नेटवर्क के ज़रिए अपना क्राइम नेटवर्क मजबूत कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक स्टोरी)

साइबर एक्सपर्ट (cyber expert) कहते हैं कि ये सोशल मीडिया साइट्स (Social Media sited) विदेशों की हैं और उनके नियम भी वहीं के हिसाब से बने होते हैं इसलिए इन साइट्स पर निगरानी आसान नहीं होती.

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देहरादून. उत्तराखण्ड की जेलों (Uttarakhand Jail) में कैद अपराधियों के रिमोट के ज़रिए अपराध करवाने के कई किस्से मौजदू हैं. पुलिस के लिए चिंता की बात यह है कि अब जेलों में बंद ये अपराधी तकनीक का सहारा ले सोशल नेटवर्क (Social Network) के ज़रिए भी अपने अपराध के नेटवर्क (Crime Network) का विस्तार कर रहे हैं. वॉट्सऐप कॉल (Whatsapp Call), फ़ेसबुक वीडियो कॉल (Facebook Video Call) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल ये अधिकारी लोगों को धमकाने और अपने गुर्गों से संपर्क साधने के लिए कर रहे हैं. जानकारों का मानना है कि नई तकनीक के पीछे छुपे इन बदमाशों तक पहुंचना भी आसान नहीं होता.

मुश्किल है ट्रेस करना

हरिद्वार की ज़िला जेल हो या फिर रुड़की जेल, यहां बंद कुख्यात बदमाशों के क्राइम पुलिस के लिए एक चुनौती बनते रहे हैं लेकिन अब नई तकनीक ने पुलिस की मुश्किल और बढ़ा दी हैं. जेलों में बंद बदमाश सोशल मीडिया के ज़रिए अपने दायरे का विस्तार कर रहे हैं. वाट्सऐप, आईएमओ, फेसबुक, इन्स्टाग्राम, स्काइप जैसी सोशल मीडिया साइट्स से वीडियो कॉल कर ये बदमाश अपना नेटवर्क मजबूत कर रहे हैं.

इन साइट्स का सहारा लेने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि इनकी कॉल का रिकार्ड नहीं होता. इसकी वजह से पुलिस बदमाशों को ट्रेस नहीं कर पा रही है.

जेल में स्मार्ट फ़ोन

हरिद्वार और रुड़की जेलों से पुलिस को पहले भी बदमाशों के पास मोबाइल फोन होने के सबूत मिले हैं. रुड़की में एक साल पहले ही अचानक की गई चेकिंग में पुलिस को 3 कैदियों के पास से एन्ड्राएड मोबाइल फ़ोन बरामद हुए थे. इनमें तत्कालीन डिप्टी जेलर नरेन्द्र सिंह खंपा की हत्या का आरोपी भी शामिल था.

इसलिए है निगरानी मुश्किल
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सोशल साइटस पर क्राइम के तार मजबूत करते बदमाशों की हरकतों को लेकर पुलिस भी सतर्क है. डीजी लॉ एन्ड ऑर्डर का कहना है कि सर्विलांस से ऐसे बदमाशों की हर हरकत पर नज़र रखी जा रही है.

लेकिन यह बात बदमाश भी जानते हैं कि सोशल साइट्स पर कॉल रिकॉर्डिंग का डेटा कलेक्ट करना आसान नहीं है. साइबर एक्सपर्ट कहते हैं कि सोशल मीडिया की सभी पॉपुलर साइट्स विदेशों की हैं और उनके नियम भी वहीं के हिसाब से बने होते हैं इसलिए इन साइट्स पर निगरानी भी आसान नहीं होती.

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First published: November 4, 2019, 11:52 AM IST
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