क्लाइमेट चेंजः ख़तरे में राज्य वृक्ष बुरांस भी, फरवरी में खिलने लगा अप्रैल का फूल

केवल फूल और वनस्पति ही नहीं मौसम का असर जानवरों में भी देखने को मिल रहा है. वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक जयराज बताते हैं कि सांप जो गर्मियों में बाहर निकलते थे वो बहुत जल्दी दिखाई देने लगे हैं. वही हिमलयी क्षेत्र के भालू को सर्दियों के मौसम में ही आसानी से देखा जा रहा है.

Robin Singh Chauhan | ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 14, 2018, 3:41 PM IST
Robin Singh Chauhan | ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 14, 2018, 3:41 PM IST
पूरी दुनिया में तेजी से मौसम में बदलाव आ रहे है और उच्च हिमालयी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. बल्कि यहां हालात और ज्यादा गंभीर इसलिए हो जाते हैं क्योंकि क्लाइमेट चेंज की वजह से कई प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है. इस बदलाव का इशारा उत्तराखण्ड के ऊंचाई वाले इलाकों में कुदरत देने लगी है और लगभग 10 से 12 हजार फ़ीट पर पाए जाने वाले बुरांस के फूल पर भी संकट मंडरा रहा है.

इन सर्दियों में बेहद कम बर्फ़बारी की वजह से औली में होने वाली स्कीइंग प्रतियोगिता को रद्द करना पडा. दरअसल पिछले कुछ सालों से पहाड़ों में बर्फबारी लगातार घट रही है. इसको क्लाइमेट चेंज के नजरिए से देखा जा रहा है.

संकेत मिलने लगे हैं कि मौसम में बदलाव आ रहा है और उच्च हिमालयी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. उत्तराखंड के राज्य वृक्ष बुरांस का फूल समय से पहले ही पहाड़ों में खिलने लगा है. एफआरआई के पूर्व वैज्ञानिक डॉक्टर सुभाष नौटियाल 35 साल के मौसम पर एकत्रित डाटा के आकलन से बताते हैं कि औसत तापमान में तो बहुत ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है लेकिन न्यूनतम और अधिकतम तापमान में बहुत बड़ा अंतर आ गया है.

मौसम में आए इस बदलाव के कई तरह के असर ऊंचाई वाले इलाकों में देखने को मिल रहे हैं. खास तौर पर उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले बुरांस के फूलों का समय से पहले खिल जाना सभी लोगों को अचरज में डाल रहा है.

अप्रैल के महीने में खिलने वाले इस फूल को अब फरवरी के महीने में ही खिला हुआ देखा जा रहा है. जिसका कारण है कि इन फूलों के खिलने के अनुकूल मौसम इन्हें पहले ही मिल रहा है. जो पर्यावरण में आए बदलाव का नतीजा है.

केवल फूल और वनस्पति ही नहीं मौसम का असर जानवरों में भी देखने को मिल रहा है. वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक जयराज बताते हैं कि सांप जो गर्मियों में बाहर निकलते थे वो बहुत जल्दी दिखाई देने लगे हैं. वही हिमलयी क्षेत्र के भालू को सर्दियों के मौसम में ही आसानी से देखा जा रहा है.

क्लाइमेट चेंज का असर पर्यटन पर भी पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. स्कीइंग के दीवाने औली में स्कीइंग करने पूरी दुनिया से पहुंचा करते थे. कम बर्फबारी की वजह से अब स्कीइंग करने आने वालों को निराशा हाथ लग रही है. लंबे समय से एडवेंचर स्पोर्टस से जुडे मंजुल रावत बताते हैं कि बदलते मौसम की वजह से उन्हें अपने शेड्यूल बदलने पड रहे हैं और पर्यटन पर इसका असर पड़ रहा है.
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इस पूरे बदलाव का एक खतरनाक पहलू भी है. इस बदलते मौसम की वजह से उच्च हिमालयी क्षेत्रों मे कई दुर्लभ प्रजातियों पर संकट मंडराने लगा है. मौसम की मार से बुरांस जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में पाए जाने वाले फूलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है यहां तक कि उनके सीडिंग प्रोसेस पर भी असर पड़ रहा है. इसके साथ ही वह कीट जो इन फूलों के लिए बीज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने का काम करते है उनके लिए भी ये संकट की घड़ी है.

समय आ गया है कि इन आ रहे बदलावों पर नीतिगत तरीके से जूझा जाए क्योंकि हिमालय में आ रहे बदलाव का असर आधी दुनिया पर पड़ सकता है.
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