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...तो इसलिए उत्तराखंड में ज़्यादा होती हैं बादल फटने की घटनाएं

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: July 4, 2019, 3:29 PM IST
...तो इसलिए उत्तराखंड में ज़्यादा होती हैं बादल फटने की घटनाएं
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाक़ों में हर साल बादल फटने की घटनाओं के समाचार सामने आते हैं. (फ़ाइल फ़ोटो- पिथौरागढ़)

मौसम विभाग की डिक्शनरी में बादल फटने या क्लाउड बर्स्ट जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं है. मौसम विभाग अतिवृष्टि की बात कहता है.

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उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाओं और तबाही की ख़बरें हर साल मॉनसून में आती हैं. हर साल राज्य के मैदानी क्षेत्रों में बारिश की वजह से पानी भरने की घटनाएं होती हैं तो पहाड़ी इलाक़ों में भारी बारिश की वजह से वेग के साथ आता पानी और मलबा तबाही मचा देता है. अक्सर इसे बादल फटने की संज्ञा दी जाती है हालांकि मौसम विभाग इनकी पुष्टि करने से इनकार कर देता है.

क्या है बादल फटना?

मौसम विभाग की डिक्शनरी में बादल फटने या क्लाउड बर्स्ट जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं है. मौसम विभाग अतिवृष्टि की बात कहता है. किसी जगह पर अगर एक घंटे के दौरान लगातार 100 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की जाती है तो उसे अति वृष्टि माना जाता है. इतनी ज़्यादा बारिश किसी भी जगह में आफ़त ला सकती है.

रुद्रप्रयाग में मॉनसून की पहली बारिश में ही बरसी आफ़त, सार चमसील गांव के ऊपर बादल फटा

रुद्रप्रयाग में गुरुवार सुबह बादल फटने की घटना के संदर्भ में पूछे जाने पर मौसम विभाग, देहरादून के निदेशक विक्रम सिंह कहते हैं कि जब तक रेन फ़ॉल मॉनीटरिंग न हो तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि किसी जगह अतिवृष्टि हुई है या नहीं. हालांकि पहाड़ के भूगोल की वजह से 100 मिलीमीटर से कम बारिश भी तबाही ला सकती है. पहाड़ में होने वाली बारिश तेज़ी से नीचे आती है और ऐसी जगहों पर जहां जंगल न हों और पानी के रास्ते में निर्माण या अवरोध हों यह आफ़त साबित होती है.

इस वजह से उत्तराखंड में ज़्यादा ‘फटते हैं बादल’

मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि दरअसल ऐसा अक्सर मॉनसून की हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ के टकराने की वजह से होता है. उत्तराखंड में ऐसा मॉनसून सीज़न के दौरान ऐसा मौसम कई बार बनता है जब पूर्व से आने वाली मॉनसून की हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ आमने-सामने आ जाते हैं. दोनों ही एक-दूसरे को रास्ता नहीं देते और इसलिए एक ही जगह भारी बारिश हो जाती है.
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क्या उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां, पहाड़ और घाटियां, इसके लिए आदर्श स्थिति पैदा करती हैं?

इसके जवाब में मौसम वैज्ञानिक कहते हैं कि कुछ इस कारण भी हो सकता है लेकिन मुख्य वजह साउथ ईस्टर्ली और साउथ वेस्टर्ली विंड के आमने-सामने आ जाने के कारण होता है. साउथ ईस्टर्ली मॉनसून ट्रफ़ की हवाएं हैं और साउथ वेस्टर्ली वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की. इन दोनों के इंट्रैक्शन से अचानक बहुत ज़्यादा बारिश होती है.

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First published: July 4, 2019, 3:13 PM IST
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