सीएम आवास से तीन किलोमीटर दूर सूख गए हैं नल, हज़ारों लोग प्यासे

दिल्ली-मुंबई के रईसों ने बड़े फार्म हाउस बनवाए हैं जिनके लिए बेतरतीब पानी की बोरिंग की जाती है और इसकी वजह से प्राकृतिक स्रोत में पानी लगातार खत्म हो रहा है.

Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: April 16, 2018, 8:02 PM IST
सीएम आवास से तीन किलोमीटर दूर सूख गए हैं नल, हज़ारों लोग प्यासे
सूबे के मुखिया के निवास से करीब तीन किलोमीटर दूर है गल्जवाड़ी गांव. यहां सात हजार से ज्यादा की आबादी को प्यास बुझाने के लिए कई बार 8 किलोमीटर तक पैदल चलना पडता है.
Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: April 16, 2018, 8:02 PM IST
पीने का पानी मुहैया कराने को लेकर विभाग और उसके मंत्री भले ही लाख दावे करें लेकिन असल हकीकत आपको देहरादून में सीएम आवास से महज तीन किलोमीटर पर ही दिखाई दे जाएगी. यहां सात हज़ार से ज्यादा की आबादी के नलों में पानी नहीं आ रहा है.

गर्मियों के मौसम में पानी की किल्लत न हो इसके लिए विभाग के अफ़सर और विभाग के मंत्री बंद कमरों में मीटिंग करते है और पानी की किल्लत से लड़ने के लिए कमर भी कसते हैं. पेयजल मंत्री प्रकाश पंत गर्मियां शुरू होते ही पीने के पानी के लिए किसी को पसीना नहीं बहाना पड़ेगा.

लेकिन एसी कमरों में हुई बैठक की पोल सीएम ऑफ़िस से तीन किलोमीटर की दूरी पर ही खुल जाती है. सूबे के मुखिया के निवास से करीब तीन किलोमीटर दूर है गल्जवाड़ी गांव. यहां सात हजार से ज्यादा की आबादी को प्यास बुझाने के लिए कई बार 8 किलोमीटर तक पैदल चलना पडता है.

गल्जवाड़ी की प्रधान लीला शर्मा बताती हैं कि स्कूलों में पानी नहीं है इसलिए स्कूलों को वरीयता देते हुए वहां पर पानी का इतजाम किया है. बाकी आबादी रामभरोसे है.

थोड़ी दूरी पर है बिष्ट गांव. यहां की हालत भी बहुत जुदा नहीं हैं. पानी की कमी से मुसीबत बढ़ती है महिलाओं के लिए. जब घरों के नल सूख जाते हैं तो गाँव के प्राकृतिक स्त्रोत की तरफ रुख करना पड़ता है. लेकिन गर्मियों में वह भी प्यास बुझाने में नाकाम रहता है.

जब आदमियों के लिए पानी नहीं तो पशुओं के लिए कहां से आएगा? कोशिश करेंगे तो इन लोगों की मुश्किलों का पहाड़ दिखाई देगा. रात को उठ कर बडी मुश्किल से पशुओं के हलक तर किए जाते हैं.

बिष्ट गांव की प्रधान कहती हैं कि पानी है नहीं और स्त्रोत सू्ख रहे हैं तो इसकी वजह शायद इन गांवों की खूबसूरती भी है. मसूरी की तलहटी में बसे ये गांव रईसों के लिए ऐशगाह हैं. यहां दिल्ली-मुंबई के रईसों ने बड़े फार्म हाउस बनवाए हैं जिनके लिए बेतरतीब पानी की बोरिंग की जाती है और कीमत चुकानी पड़ती है स्थानीय लोगों को. पानी के अंधाधुंध दोहन से आस-पास के प्राकृतिक स्रोतों में पानी लगातार खत्म हो रहा है.

विडंबना यह भी है कि चंद किलोमीटर दूर एसी कमरों में जब राज्य के कर्ता-धर्ता पानी की किल्लत दूर करने के लिए योजनाएं बना रहे होते हैं और सारे इंतज़ाम करने के दावे कर रहे होते हैं तब उन्हें ज़मीनी हकीकत का पता ही नहीं होता. और इसीलिए साल-दर-साल गल्जवाड़ी, बिष्ट गांव के लोगों का पानी के लिए संघर्ष बढ़ता जा रहा है.
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