चंद कदम की दूरी तय कर DM तक नहीं पहुंच सका CM का ऑर्डर... शुक्रवार को देहरादून में नहीं खुलीं 7 से 7 तक दुकानें

सीएम ने गुरुवार को दुकानें सुबह 7 से शाम 7 तक खोलने का फ़ैसला लिया था लेकिन इस बारे में देहरादून के ज़िलाधिकारी को पता नहीं चला.

आखिर देहरादून के डीएम की जीत हुई और मुख्य सचिव को प्रदेश भर के लिए 7 से 7 का आदेश लागू करना पड़ा.

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देहरादून. उत्तराखंड में सरकारी फैसले समय पर अमल  में आ जाएं, ऐसा कम ही देखने को मिल रहा है. कमाल तो यह है कि मुख्यमंत्री के आदेश देहरादून के ज़िलाधिकारी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. इस बात पर थोड़ा अचरज हो सकता है जब दुनिया भर में कोरोना पर हुई कोई भी डेवलपमेंट मिनटों में यहां तक पहुंच जा रही है तो सरकारी आदेश, वह भी मुख्यमंत्री के, कहीं गुम हो जा रहे हैं. शुक्रवार को पूरे दिन भर देहरादून में लोगों में इस बात का असमंजस बना रहा कि दुकानें 7 बजे तक खुली रहेंगी या 4 बजे ही बंद करनी पड़ेंगी. आखिर देहरादून के डीएम  की जीत हुई और मुख्य सचिव को प्रदेश भर के लिए 7 से 7 का आदेश लागू करना पड़ा.

ऑर्डर नहीं पहुंचे

गुरुवार देर शाम मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने आवास पर मीटिंग ली थी जिसमें यह फैसला किया गया था कि प्रदेश भर में सुबह 7 बजे से लेकर शाम के 7 बजे तक दुकानें खुली रहेंगी. इस ऑर्डर को लागू करवाने की ज़िम्मदारी ज़िला अधिकारियों को दी गई थी ताकि वह अपने ज़िले की परिस्थतियों के अनुरूप फ़ैसला ले सकें. लेकिन कमाल यह हो गया कि मुख्यमंत्री का यह फ़ैसला देहरादून के ज़िलाधिकारी तक आज दिन भर पहुंचा ही नहीं.

देहरादून के ज़िलाधिकारी आशीष श्रीवस्ताव ने इस बारे में पूछने पर जवाब दिया कि उनके पास 'ऑर्डर नहीं पहुंचे' इसकी वजह से आज 4 बजे ही दुकान बंद की गईं. लेकिन इससे पहले उत्तराखंड के टीवी चैलनों, न्यूज़ वेबसाइटों और फिर अखबारों ने भी सीएम के फ़ैसले की ख़बर प्रकाशित कर दी थी. इसकी वजह से दिन भर दुकानदार और लोग भी यह मानते रहे कि अब दुकानें 7 बजे तक खुलनी हैं.

CM के आदेश vs DM के आदेश 

शाम 4 बजे पुलिस प्रशासन ने सब्ज़ी मंडी से लेकर बाज़ारों तक में चक्कर लगाने शुरु किए कि दुकानें बंद की जाएं. इसके बाद आनन-फानन में लोगों ने दुकानें बंद करनी शुरु कीं.

कुछ लोग पुलिसकर्मियों से बहस भी करते दिखे कि सीएम के ऑर्डर हैं 7 बजे तक दुकान खोलने के... इस पर एक पुलिसकर्मी ने कहा, "डीएम के तो नहीं हैं न. समय हो गया है आप तुरंत दुकानें बंद करें."

lockdown confusion, शाम चार बजे दुकानें बंद कराते पुलिसकर्मी. गुरुवार के मुख्यमंत्री के आदेश की वजह से लोगों में दुकानें खुलने के समय को लेकर कंफ्यूज़न था.
शाम चार बजे दुकानें बंद कराते पुलिसकर्मी. गुरुवार के मुख्यमंत्री के आदेश की वजह से लोगों में दुकानें खुलने के समय को लेकर कंफ्यूज़न था.


पहले भी रहा है असमंजस 

वैसे ही कोई पहला मामला नहीं है जब लॉकडाउन में उत्तराखंड में इस तरह की असमंजस की स्थिति देखने को मिली हो. इससे पहले गाड़ियों के ऑड-ईवन दिन पर चलने को लेकर सरकार के लिए गए फैसले पर भी इसी तरह की स्थिति बनी थी. यह नियम प्रदेश में लागू कब से होगा या होगा भी या नहीं? इस पर राजधानी के लोग परेशान रहे. हालांकि बाद में एक दिन के ट्रायल के बाद सरकार ने खुद इस फैसले को वापस ले लिया था.

इससे पहले भारत सरकार की तरफ से लॉकडाउन-4 के ऐलान के वक्त भी सैलून-स्पा खोलने के भारत सरकार के ऑर्डर को जिलों में लागू किए जाने को लेकर असमंजस बना था. कुछ ने सैलून खोले तो कुछ ने बंद रखे. तब भी देहरादून के ज़िलाधिकारी को राज्य सरकार का ऑर्डर नहीं मिल पाया था.

रास्ता भटक गया...

कोरोना से दुनिया भर में बहुत सारी चीज़ें ठप पड़ी हैं लेकिन दुनिया चलती रही है तो इसकी वजह है कि संचार के माध्यम काम करते रहे हैं. लेकिन देवभूमि उत्तराखंड में लगता है इन्होंने भी काम करना बंद कर दिया है.

वैसे शुक्रवार को तो लोग यह भी कहते मिले कि अगर मुख्यमंत्री का आदेश पैदल भी चलता तो भी कुछ मिनटों में डीएम तक पहुंच जाता. लेकिन शायद वह रास्ता भटक गया... या सिस्टम.

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