‘अजय भट्ट की बात मानें सीएम, गरुड़ गंगा के पत्थर घिसकर पानी को सारे अस्पतालों में पहुंचाएं’

गाइनकॉलजिस्ट डॉक्टर अलका पुनेठा कहती हैं कि न तो उन्होंने ऐसा कभी पढ़ा है, न देखा है, न सुना है. वह ऐसा कोई भी प्रयोग करके देखने की संभावना से भी इनकार करती हैं

News18 Uttarakhand
Updated: July 19, 2019, 1:14 PM IST
‘अजय भट्ट की बात मानें सीएम, गरुड़ गंगा के पत्थर घिसकर पानी को सारे अस्पतालों में पहुंचाएं’
गरुड़ गंगा नदी के तट पर बना है
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Updated: July 19, 2019, 1:14 PM IST
संसद में सांसद अजय भट्ट के सिजेरियन डिलिवरी पर दिए बयान को कांग्रेस ने हास्यास्पद बताया है तो डॉक्टरों का कहना है कि न तो उन्होंने कभी ऐसा कुछ पढ़ा है, न सुना है और न ही वह यह प्रयोग कभी करने जा रहे हैं. बीजेपी अलबत्ता बचाव की मुद्रा में है और पार्टी प्रवक्ता कह रहे हैं कि अजय भट्ट के कहने का वह मतलब नहीं था जो निकाला जा रहा है. उनका अर्थ कुछ और ही था.

न करवाएं सिजेरियन डिलिवरी… नॉर्मल डिलिवरी के लिए अजय भट्ट का ये अचूक नुस्खा आज़माएं!

बता दें कि होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा के दौरान अजय भट्ट  ने लोकसभा में कहा कि जोशीमठ रूट पर पड़ने वाली गरुड़ गंगा के पत्थर को रगड़ कर एक कप पानी के साथ प्रेगनेंट महिला पी ले तो डिलिवरी नॉर्मल होती है. उन्होंने इसे चमत्कार बताया और यह भी दावा किया कि अगर सांप-बिच्छू के काटने पर कोई उसका पत्थर घिसकर उसका लेप लगा ले तो ज़हर का असर खत्म हो जाता है.

हमलावर कांग्रेस, बचाव में बीजेपी

इस बयान को पर कांग्रेस ने हास्यास्पद बताया. कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि अब लोगों का समझ जाना चाहिए कि उन्होंने कैसे लोगों को चुनकर संसद में भेजा है. उन्होंने यह भी कहा कि अजय भट्ट को यह सलाह उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री यानि सीएम को देनी चाहिए कि गरुड़ गंगा के पत्थरों को घिसकर उस पानी की बॉटलिंग कर सभी हॉस्पिटल में भिजवाएं ताकि किसी की सिजेरियन डिलीवरी न हो.

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उधर बीजेपी अपने प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान पर बचाव की मुद्रा में है. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान कहते हैं कि अजय भट्ट के कहने का यह अर्थ नहीं था जो निकाला जा रहा है. वह तो पारंपरिक तौर-तरीकों से इलाज की जानकारी शेयर करना चाहते थे.
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डॉक्टरों ने हाथ जोड़े 

अजय भट्ट का बताया नुस्खा डॉक्टरों की समझ नहीं आ रहा. सालों से बतौर गाइनकॉलजिस्ट काम रही डॉक्टर अलका पुनेठा हज़ारों कर डिलिवरी करवा चुकी हैं. वह कहती हैं कि सिजेरियन डिलीवरी अक्सर तभी की जाती है जब मां या बच्चे को कोई दिक्कत होती है. वह ऐसी कई दिक्कतें गिनवाते हुए कहती हैं कि उन्हें नहीं लगता कि कोई भी पानी पीने से वह दिक्कत दूर हो सकती है.

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डॉक्टर पुनेठा कहती हैं कि न तो उन्होंने ऐसा कभी पढ़ा है, न देखा है, न सुना है. वह ऐसा कोई भी प्रयोग करके देखने की संभावना से भी इनकार करती हैं और कहती हैं वह तो साइंटिफ़िक ढंग से ही इलाज करेंगी, डिलिवरी करवाएंगी.

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First published: July 19, 2019, 1:14 PM IST
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