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NHM पिथौरागढ़ में संविदा पर तैनात अविवाहित लड़कियों का होगा प्रेग्नेंसी टेस्ट

NHM पिथौरागढ़ में संविदा पर तैनात अविवाहित लड़कियों का होगा प्रेग्नेंसी टेस्ट

उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत हाईकोर्ट के आदेशों को धता बताते हुए संविदा पर काम करने वाली महिलाओं को गर्भवती न होने पर ही नौकरी दी जा रही है.

उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत हाईकोर्ट के आदेशों को धता बताते हुए संविदा पर काम करने वाली महिलाओं को गर्भवती न होने पर ही नौकरी दी जा रही है.

यह आदेश जारी करने वाली सीएमओ उषा कहती हैं कि उन्हें इस बारे में पता नहीं था और उनसे अनजाने में इस आदेश पर हस्ताक्षर करवा लिए गए.

    उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत हाईकोर्ट के आदेशों को धता बताते हुए संविदा पर काम करने वाली महिलाओं को गर्भवती न होने पर ही नौकरी दी जा रही है. पिथौरागढ़ की मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बाकायदा महिला कर्मचारियों के प्रेग्नेंसी टेस्ट के आदेश जारी किए हैं.

    एनएचएम के तहत संविदा पर तैनात सभी महिला कर्मचारियों की सविंदा को जारी रखने के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाया जा रहा है. अगर टेस्ट पॉज़िटिव पाया जाता है यानि कि अगर महिला कर्मचारी गर्भवती होती हैं तो उनका अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.

    पिथौरागढ़ की मुख्य चिकित्सा अधिकारी उषा ने 28 मार्च, 2018 को इस आशय का आदेश जारी किया है. इस आदेश के बाद संविदा पर काम करने वाली हर महिला कर्मचारी जिनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट भी शामिल हैं, की परेशानी बढ़ गई है.

    ख़ास बात यह है कि संविदा पर तैनात उन महिला कर्मचारियों का भी प्रेग्नेंसी टेस्ट किया जाना है जिनकी शादी नहीं हुई है. महिला कर्मचारी इसे सीधे-सीधे मानहानि बता रही हैं.

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    हाईकोर्ट इसे पहले ही ग़लत ठहरा चुका है. लेकिन यह आदेश जारी करने वाली सीएमओ उषा कहती हैं कि उन्हें इस बारे में पता नहीं था और उनसे अनजाने में इस आदेश पर हस्ताक्षर करवा लिए गए. इस बारे में पूछे जाने पर एनएचएम के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संजय चौहान ने कहा कि ऐसे मामलों के बार-बार सामने आने से सभी हैं और इसे लेकर वह नैनीतील हाइकोर्ट की शरण में जाएंगे.

    इस मामले में राहत की बात यही है कि अभी यह पिथौरागढ़ का अकेला मामला है. लेकिन चिंता की बात यह है कि जब कार्यस्थल में आधी आबादी के अधिकारों को अधिकाधिक मान्यता मिलने लगी है तो ऐसी आदिम प्रवृत्ति और कार्यसंस्कृति कैसे बार-बार सिर उठा लेती है. सवाल यह भी है कि सीएमओ स्तर की अधिकारी, वह भी महिला अधिकारी को क्यों इस बात की जानकारी तक नहीं है?

    (भारती सकलानी की रिपोर्ट)

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