लाइव टीवी

अब शिक्षा विभाग में अनिवार्य सेवा निवृत्ति की तैयारी... 5000 से ज़्यादा शिक्षकों की होगी छुट्टी

Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: November 1, 2019, 11:14 AM IST
अब शिक्षा विभाग में अनिवार्य सेवा निवृत्ति की तैयारी... 5000 से ज़्यादा शिक्षकों की होगी छुट्टी
उत्तराखंड शिक्षा विभाग 5000 से ज़्यादा शिक्षकों को अनिवार्य सेवा निवृत्ति देने जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

शिक्षा विभाग ने सभी खण्ड शिक्षाधिकारियों (Block education officers) को 15 नवम्बर तक ऐसे एलटी सहायक अध्यापकों (LT Assistant Teachers) की लिस्ट देने को कहा है जो बच्चों को पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं लेते.

  • Share this:
देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) शिक्षा विभाग (Education Department) 5,000 से ज़्यादा शिक्षकों की छुट्टी करने जा रहा है. सभी सरकारी नौकरियों (Government Jobs) की तरह यहां भी गाज 50 साल से ज़्यादा आयु के शिक्षकों (Teachers) पर गिरने वाली है. आधार भी वही है, काम में मन न लगना या ठीक से काम कर पाने के काबिल न होना. ऐसा भी नहीं कि यह विचार के स्तर पर ही है. शिक्षा विभाग ने सभी खण्ड शिक्षाधिकारियों को 15 नवम्बर तक ऐसे सहायक अध्यापकों की लिस्ट देने को कहा है जो बच्चों को पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं लेते.

खराब रिज़ल्ट वालों पर फ़ोकस 

उत्तराखण्ड में राजकीय और अशासकीय प्राइमरी और माध्यमिक स्कूलों में करीब 65,000 शिक्षक हैं. शिक्षा विभाग अब इनकी संख्या कम करने का फ़ैसला कर चुका है. अब 50 साल की उम्र पार कर चुके ऐसे शिक्षकों की अब खैर नहीं जिनका बच्चों को पढ़ाने में मन नहीं लगता और वे 60-70 हज़ार रुपये तनख्वाह हर महीने उठा रहे हैं.

शिक्षा विभाग के निदेशक आरके कुंवर ने न्यूज़ 18 को बताया कि सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को गढ़वाल और कुमाऊं के ऐसे शिक्षकों की लिस्ट तैयार करने के लिए कहा गया है जो अनुपस्थित रहते हैं और जिनके स्कूलों का रिज़ल्ट पिछले कुछ सालों से खराब आ रहा है.

बीमार भी नहीं ले रहे वीआरएस 

समस्या यह भी है कि शिक्षा विभाग में लम्बी बीमारी से ग्रस्त शिक्षक भी वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) लेने को तैयार नहीं और हर साल 60 से 70 हज़ार तक का वेतन उठा रहे हैं. विभाग 5,000 से ज़्यादा ऐसे शिक्षकों को रिटायरमेन्ट देगा ताकि नए लोगों को मौका मिल सके. ज़ाहिर तौर पर शिक्षक संगठन इस कदम का विरोध कर रहे हैं.

उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारना एक बड़ी चुनौती है. हर साल शिक्षा पर प्रदेश में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया जाता है लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आता नज़र नहीं आ रहा है. सरकारी स्कूल खाली होते जा रहे हैं और स्कूलों के नाम पर छोटी-बड़ी दुकानें बढ़ती जा रही हैं. ऐसे में कठोर उठाना शिक्षा विभाग के लिए भी ज़रूरी है.
Loading...

ये भी देखें: 

उत्तराखंड के मंत्री अरविंद पांडे ने दी इस्तीफे की धमकी, जानें क्यों?

पहाड़ों के बजाय UP, बिहार में नौकरी कर रहे हैं उत्तराखंड के कई शिक्षक: शिक्षा मंत्री

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देहरादून से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 1, 2019, 11:07 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...