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देहरादून में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक... सार्वजनिक परिवहन, कूड़ा प्रबंधन पर ध्यान देने की ज़रूरत

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: October 24, 2019, 6:59 PM IST
देहरादून में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक... सार्वजनिक परिवहन, कूड़ा प्रबंधन पर ध्यान देने की ज़रूरत
गैर सरकारी संगठन गति फ़ाउंडेशन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देहरादून में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक हो गई है.

गति फ़ाउंडेशन (Gati Foundation) की रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि इस स्थिति सुधारने के लिए सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) और अपशिष्ट कूड़ा प्रबंधन (Garbage Management) पर खास ध्यान दिया जाए.

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देहरादून. कभी अपनी साफ़ आबोहवा के लिए देश भर में मशहूर देहरादून में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक हो गई है. इसकी बड़ी वजह यह है कि खराब सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की वजह से वाहनों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है. गैर सरकारी संगठन गति फ़ाउंडेशन की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार कचरे को खुले में जलाए जाने, खाली प्लॉटों में कचरा फेंकने और दिल्ली से दून आने वाले पुराने वाहन भी वायु प्रदूषण के लिए गंभीर समस्या हैं. रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि इस स्थिति सुधारने के लिए सार्वजनिक परिवहन और अपशिष्ट कूड़ा प्रबंधन पर खास ध्यान दिया जाए.

दून पॉल्यूशन टेल्स अभियान

गति के ‘दून पॉल्यूशन टेल्स अभियान’ की थीम ‘वायु प्रदूषण को हराओ‘ थी. अभियान में उन लोगों के जीवन को समझने और उनका डॉक्यूमेंटेशन करने की कोशिश की गई, जिनका ज़्यादातर समय शहर में प्रदूषित वायु के बीच में गुज़रता है. इसमें ऑटो चालक, स्ट्रीट वेंडर, ट्रैफिक पुलिस अधिकारी, कैब ड्राइवर, स्ट्रीट स्वीपर और छात्रों को मुख्य रूप से शामिल किया गया.

अभियान में मेडिकल प्रेक्टिशनर्स, आरटीओ देहरादून, सिटी पेट्रोल यूनिट, अपशिष्ट प्रबंधन विशेषज्ञ के साथ ही देहरादून वासियों  ने हिस्सा लिया. वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सरकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भी अपने सुझाव साझा किए. देहरादून के एआरटीओ अरविंद पांडे ने कहा कि वाहन मालिकों के लिए पीयूसी अनिवार्य किए जाने से वायु प्रदूषण के मामले में राहत मिल सकती है.

दृष्टि आई केयर अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर गौरव लूथरा ने कहा कि प्रदूषण के स्तर में वृद्धि के कारण एलर्जी के पारंपरिक पैटर्न में काफी बदलाव आया है. एलर्जी से संबंधित मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि आ रही है और यह समस्या बच्चों, बड़ों सबमें देखी जा रही है.

रिपोर्ट में अनियंत्रित रूप से बड़े पैमाने पर खुले में जलाये जा रहे कचरे को भी वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बताया गया है. अभियान के दौरान शहर के अंदर कई स्थानों पर खुले में कचरा जलता पाया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरवासियों द्वारा खुले में कूड़ा जलाना समस्या आम बात होती चली जा रही है. प्रेमनगर, घंटाघर, ईसी रोड और राजपुर रोड कुछ ऐसी जगहें हैं जहां टीम ने खुले में कूड़ा जलते हुए देखा.

गति फाउंडेशन के ऋषभ श्रीवास्तव के अनुसार अभियान का उद्देश्य वायु प्रदूषण के मुद्दे पर लोगों को अधिक व्यावहारिक और मानवीय बनाना था. उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण का मुद्दा अक्सर दिल्ली या बेंगलुरु जैसे महानगरों तक ही केंद्रित रह जाता है, जबकि देहरादून जैसा छोटा शहर भी खराब वायु गुणवत्ता से जूझ रहा है.
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First published: October 24, 2019, 3:44 PM IST
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