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टिकट की सिफारिश करने वाले नेताओं के सहारे बागियों को मनाने में जुटी कांग्रेस

टिकट की सिफारिश करने वाले नेताओं के सहारे बागियों को मनाने में जुटी कांग्रेस

उत्तराखंड में टिकट बंटवारे के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मचा हुआ है. विधानसभा चुनाव में सिंबल नहीं मिलने से नाराज नेताओं का बागी होने का दौर चल पड़ा है. उन्हें मनाने के लिए भी पार्टी लगातार प्रयास करती नजर आ रही है.

उत्तराखंड में टिकट बंटवारे के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मचा हुआ है. विधानसभा चुनाव में सिंबल नहीं मिलने से नाराज नेताओं का बागी होने का दौर चल पड़ा है. उन्हें मनाने के लिए भी पार्टी लगातार प्रयास करती नजर आ रही है.

उत्तराखंड में टिकट बंटवारे के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मचा हुआ है. विधानसभा चुनाव में सिंबल नहीं मिलने से नाराज नेताओं का बागी होने का दौर चल पड़ा है. उन्हें मनाने के लिए भी पार्टी लगातार प्रयास करती नजर आ रही है.

    उत्तराखंड में टिकट बंटवारे के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मचा हुआ है. विधानसभा चुनाव में सिंबल नहीं मिलने से नाराज नेताओं का बागी होने का दौर चल पड़ा है. उन्हें मनाने के लिए भी पार्टी लगातार प्रयास करती नजर आ रही है.

    कांग्रेस ने बगावती तेवर दिखाने वाले नेताओं को मनाने का जिम्मा पार्टी में उनके पैरोकार नेताओं को ही सौंपा है. पार्टी के बड़े नेता जिन बागियों को टिकट देने की सिफारिश कर रहे थे, अब वे ही समझाने का काम करेंगे. इसके लिए पार्टी ने पहले ही दावेदारों के बायोडाटा और सूची में उन नेताओं के नाम भी लिख लिए थे.

    दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यालय में लगातार टिकट पाने में नाकाम रहे दावेदारों के फैक्स और शिकायती चिट्ठियां पहुंच रही हैं. पंजाब के बाद अब उत्तराखंड में भी बागियों को समझाओ-बुझाओ पर काम शुरू हो गया है.

    कांग्रेस के बागियों और दलबदल करने वालों से निपटने के लिए अनोखी रणनीति कारगर साबित हो रही है. दरअसल हर बार टिकट बंटवारे के बाद पार्टी में अधिकृत उम्मीदवार को विरोधी दल से अधिक अपनों के विरोध का सामना करना पड़ता था. इसी को ध्यान में रखकर पार्टी ने इस बार पांच राज्यों के लिए फार्मूला निकाला था. पैनल में शामिल प्रमुख दावेदारों के लिए कौन नेता पैरवी कर रहा है इसका उल्लेख भी उसके नाम के सामने किया गया है.

    बगावत करने वाले या पार्टी का नुकसान पहुंचाने वाले को समझाने और साथ जोड़े रखने का जिम्मा उन्हीं नेताओं पर होगा. पार्टी के सामने फिलहाल उत्तराखंड बड़ी चुनौती है. बागियों के खुलकर विरोध करने को पार्टी चुनाव में नुकसान मानती है. देहरादून स्थित प्रदेश कार्यालय में तोड़फोड़ पर आलाकमान चिंतित है.

    प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की सहसपुर सीट पर बगावत के स्वर सुनाई दे रहे हैं. वहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत का नाम घोषित होने के बाद वहां से दावा ठोंक रहे जिला पंचायत अध्यक्ष ने पार्टी छोड़ दी है. कुमाऊं की गदरपुर सीट पर भी गदर मचा है यहां परिवारवाद की शिकायत सामने आई है. सितारगंज में भी दमदार दावेदार रहे नेता अधिकृत उम्मीदवार का नुकसान कर सकते हैं.

    रामनगर सीट पर भी पार्टी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है. गढ़वाल में भी विरोध तेज हैं. लक्सर सीट पर सैनी समाज ने पंचायत कर अंतरिक्ष सैनी को लड़ाने की तैयारी कर ली है. रायपुर में पार्टी ने उम्मीदवार नहीं उतारा है लेकिन संभावित एक नाम पर राय बनते ही जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है. ज्वालापुर में पिछली बार कम अंतर से हारी ब्रजरानी निर्दलीय उतरने की तैयारी में हैं. खानपुर पर विरोध हो रहा है. मुख्यमंत्री के करीबी कहे जाने वाले राजेंद्र सिंह की नाराजगी भी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है. लिहाजा इसका जिम्मा हरीश रावत पर है.

    उत्तराखंड कांग्रेस को लगा झटका, कांग्रेस प्रदेश महामंत्री ने छोड़ी पार्टी

    गदरपुर विधानसभा से टिकट नहीं मिलने से नाराज कांग्रेस प्रदेश महामंत्री शिल्पी अरोड़ा ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अब शिल्पी किच्छा से मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी. शिल्पी ने मुख्यमंत्री रावत पर खनन माफियाओं से मिले होने का आरोप लगाया है.

    ‌शिल्पी ने 2012 के विधानसभा चुनावों में चुनाव प्रदेश प्रभारी चौधरी विरेंद्र सिंह के साथ कैंपेन के साथ राज्य में मीडिया प्रबंधन का काम भी किया था. इसलिए इन चुनावों में उन्हें गदरपुर विधानसभा सीट से टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा न होने पर शिल्पी ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ किच्छा से चुनाव लड़ने का एलान कर दिया.

    Tags: Harish rawat

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