संकट में साथ तो आए कांग्रेसी दिग्गज... क्या कायम रहेगी यह एकजुटता?  

शुक्रवार को उत्तराखंड कांग्रेस के शीर्ष नेता लंबे समय बाद एक साथ नज़र आए.
शुक्रवार को उत्तराखंड कांग्रेस के शीर्ष नेता लंबे समय बाद एक साथ नज़र आए.

उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाज़ी जोरों पर है. पार्टी के प्रदेश में चारों बड़े नेताओं के अपने-अपने अहम और गुट हैं. यही वजह है कि कांग्रेस सरकार जाने के बाद से ये एक साथ एक मंच पर विरले ही दिखे हैं.

  • Share this:
देहरादून. शुक्रवार को उत्तराखंड कांग्रेस (Uttarakhand Congress) के शीर्ष नेता लंबे समय बाद एक साथ नज़र आए, शायद राजनीतिक संकट (Political Crisis) में साथ रहना ज़रूरी लगा. उत्तराखंड में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता हरीश रावत (Harish Rawat) शुक्रवार को नैनीताल में थे. हाईकोर्ट (Nainital High Court) में 2016 में विधायकों की खरीद-फरोख्त (MLA Horse Trading Case of 2016) के मामले में सुनवाई होनी थी. आशंका इस बात की थी कि अगर हाईकोर्ट सीबीआई (CBI) को एफ़आईआर (FIR) दर्ज करने की इजाज़त दे देता तो हरीश रावत की गिरफ्तारी (Arrest) हो सकती थी. लेकिन रावत के वकीलों के तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई एक अक्टूबर तक टाल दी. बहरहाल हरीश रावत के साथ एकजुटता दिखाने कि लिए कांग्रेसियों ने अपने मतभेद किनारे कर दिए और नैनीताल पहुंच गए.

चारों दिग्गज एक साथ 

कहते हैं कि राजनीति का उसूल है कि मन मिलें न मिलें, साथ दिखना ज़रूरी है. उत्तराखंड कांग्रेस के बड़े नेताओं ने आज ऐसा ही किया. पूर्व सीएम और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के साथ खड़े होने सभी बड़े नेता नैनीताल पहुंच गए. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के साथ नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृयेश और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी नैनीताल क्लब में हरीश रावत के समर्थन में जुटे.



बता दें कि उत्तराखंड में हरीश रावत, प्रीतम सिंह, इंदिरा हृदयेश और किशोर उपाध्याय चार बड़े नेता गिने जाते हैं. अपने राजनीतिक अनुभव और कद की वजह से हरीश रावत बाकी तीनों नेताओं पर भारी पड़ते हैं. शायद यही कारण था कि आज हर कोई नैनीताल में था.
मजबूरी की एकजुटता

उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाज़ी जोरों पर है. पार्टी के प्रदेश में चारों बड़े नेताओं के अपने-अपने अहम और गुट हैं. यही वजह है कि कांग्रेस सरकार जाने के बाद से ये एक साथ एक मंच पर विरले ही दिखे हैं. वैसे खेमेबंदी और खींचतान में अभी दो खेमे बने हुए दिखते हैं. एक खेमा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का माना जाता है तो दूसरे में हरीश रावत और किशोर उपाध्याय की जोड़ी है.

साल 2017 के बाद दोनों खेमों की कोशिश एक-दूसरे पर दबाव बनाने की रही है जिसका नुकसान यह हुआ है कि उत्तराखंड में कांग्रेस कार्यकर्ता भी एक नहीं हो पाए और प्रदेश कांग्रेस की नई कमेटी तक नहीं बन पाई. अंततः हरीश रावत का बड़ा कद सब पर भारी पड़ा और मजबूरी में ही सही ज़रूरत के वक्त सभी को नैनीताल में एक साथ दिखना पड़ा.

सबक सीखेगी कांग्रेस?

उत्तराखंड के कांग्रेस नेताओं की जो तस्वीर नैनीताल में दिखी अगर वही तस्वीर राजनीति के मंचों पर दिख जाए और साथ बैठने के साथ चारों नेताओं के मन भी मिल जाएं तो शायद उत्तराखंड कांग्रेस का भला हो जाए. दरअसल नेताओं के बंटने से सबसे ज्यादा नुकसान कार्यकर्ता को भुगतना पड़ा है जो सत्ता में आने की उम्मीद में पार्टी का झंडा तो उठाता है लेकिन नारा किस नेता के नाम का लगाना है इसे लेकर कंफ़्यूज़ रहता है और यही कंफ्यूजन कांग्रेस को बर्बाद कर रहा है.

ये भी देखें: 

हरीश रावत स्टिंग केसः CBI को नहीं मिली FIR की इजाजत, हाईकोर्ट में 1 अक्टूबर तक टाली सुनवाई 

बीजेपी ने बोली लगाकर ख़रीदे हैं हमारे एक्सपर्ट, अब भुगतेः हरीश रावत
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज