टीएचडीसी के निजीकरण का सड़क से सदन तक विरोध करेगी कांग्रेस... किया रणनीति का ऐलान

कांग्रेस टीएचडीसी के निजीकरण   का विरोध कर रहीलह. (टिहरी बांध की तस्वीर, साभार टीेचडीसी)
कांग्रेस टीएचडीसी के निजीकरण का विरोध कर रहीलह. (टिहरी बांध की तस्वीर, साभार टीेचडीसी)

किशोर उपाध्याय कहते हैं कि राजनीतिक दल (Political Parties) की खुराक ही आंदोलन (movement) होते हैं. सभी दल आंदोलनों से उपजे हैं और इनके ज़िंदा रहने के लिए भी आंदोलन ज़रूरी हैं.

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देहरादून. टीएचडीसी के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार को सदन से सड़क तक घेरने की तैयारी में है लेकिन सवाल यह है कि कांग्रेस का रुख बदला कैसे? क्या आयुर्वेद आंदोलन में यूथ कांग्रेस और NSUI के रोल ने कांग्रेस संगठन को समझा दिया कि जनता की लड़ाई सड़क पर लड़ी जाती है कमरे में नहीं. ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार के 30 महीने के कार्यकाल में कांग्रेस ने किसी भी बड़े मुद्दे पर आंदोलन नहीं छेड़ा है लेकिन टिहरी बांध के निजीकरण के मुद्दे पर कांग्रेस बड़े विरोध की तैयारी में है.

बधाई की पात्र 

कांग्रेस ने टीएचडीसी के निजीकरण के विरोध की रणनीति तैयारी कर ली है. पार्टी 27 नवंबर को सभी ज़िला मुख्यालयों में केंद्र और राज्य सरकार का पुतला फूंकेगी. 2 दिसंबर को प्रदेश कांग्रेस टिहरी में THDC ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करेगी और 4 दिसंबर से शुरु होने वाले शीतकालीन सत्र में मुद्दा उठाने की तैयारी है.



कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष किशोर उपाध्याय कहते हैं कि राजनीतिक दल की खुराक ही आंदोलन होते हैं. कांग्रेस, बीजेपी, वामपंथी दल सभी आंदोलनों से ही उपजे हैं और इनके ज़िंदा रहने के लिए भी आंदोलन ज़रूरी हैं. उपाध्याय कहते हैं कि अगर कांग्रेस ने एनएसयूआई से प्रेरणा ली है तो यह अच्छी बात है, पार्टी बधाई की पात्र है.
जन से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन ज़रूरी 

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष प्रीतम सिंह कहते हैं कि कांग्रेस के सभी संगठन एक ही छतरी के नीचे आते हैं. एनएसयूआई या यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन, आंदोलन को अलग करके नहीं देखा जा सकता. टीएचडीसी के निजीकरण के ख़िलाफ़ हो रहे कांग्रेस के आंदोलन में भी सभी दल एक साथ शामिल होंगे.

कांग्रेस के युवा नेता अपनी राजनीति को लेकर ज़्यादा स्पष्ट नज़र आते हैं. एननएसयूआई नेता मोहन भंडारी कहते हैं कि राजनीतिक उठापटक के बजाय जनता के मुद्दों पर आंदोलन करना ज़रूरी है और जब तक ऐसा नहीं होगा तब तक लोग कांग्रेस से नहीं जुड़ेंगे.

30 महीने में सरकार को घेरने के मुद्दे तो बहुत थे पर कांग्रेस संगठन की बात धरने और मार्च से आगे नहीं बढ़ी. ऐसे में टीएचडीसी के निजीकरण के मुद्दे पर क्या कांग्रेस विरोध को अंजाम तक पहुंचा पाएगी? इस सवाल के जवाब के लिए अभी इंतज़ार करना होगा.

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