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COVID-19: खुद न उठाओ खतरा, 'देहरादून हैप्पी मील्स' से करो संपर्क... ज़रूरतमंद तक पहुंचेगी आपकी मदद
Dehradun News in Hindi

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: March 31, 2020, 10:02 AM IST
COVID-19: खुद न उठाओ खतरा, 'देहरादून हैप्पी मील्स' से करो संपर्क... ज़रूरतमंद तक पहुंचेगी आपकी मदद
सोमवार को शुरु देहरादून हैप्पी मील्स सर्विस वेबपेज के माध्यम से कोई भी गरीब लोगों की मदद के अभियान में अपना योगदान दे सकता है.

बहुत सारे लोग, संगठन बना हुआ खाना उपलब्ध करवा रहे हैं. पुलिस-प्रशासन उसे ज़रूरतमंदों तक पहुंचा रहा है.

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देहरादून. करोड़ों की संख्या में श्रमिकों के पैदल ही घर लौटने की तस्वीरों, महिलाओं-बच्चों के भूखे ही यात्रा करने के वीडियोज़ से देश भर में इनके प्रति सहानुभूति की बाढ़ आ गई है और लोग मदद करने के लिए बढ़-चढ़कर आगे आ रहे हैं. लेकिन लोगों के अति-उत्साह और लापरवाही से कोरोना वायरस फैलने का खतरा बढ़ गया है. अच्छी ख़बर यह है कि देहरादून ज़िला प्रशासन दून पुलिस, एनजीओ, सामाजिक-धार्मिक संगठनों और व्यक्तिगत रूप से मदद करने वाले का सामंजस्य बना ज़रूरतमंदों को खाना और राशन पहुंचा रहा है. इससे यह भी सुनिश्चित हो रहा है कि हर ज़रूरतमंद को मदद मिले और अपात्र माहौल का नाजायज़ फ़ायदा न उठाएं.

कोई न रहे भूखा

ज़िले में हर भूखे को खाना उपलब्ध करवाने की ज़िम्मेदारी देहरादून की सीडीओ नितिका खंडेलवाल की है. वह कहती हैं कि बहुत सारे लोग ज़रूरतमंदों को खाना पहुंचाना चाह रहे हैं, वे लोग बना हुआ खाना भी उपलब्ध करवा रहे हैं. ऐसे में पुलिस और प्रशासन का काम यह हो जाता है कि वह उन्हें सही जगह पहुंचा दे, खाना उसी को मिले जो सचमुच में ज़रूरतमंद है.



कई सारे सामाजिक-धार्मिक संगठन मदद के लिए आगे आए हैं. राधास्वामी सत्संग, आरएसएस, कई गुरुद्वारे, सर्राफ़ा मंडल जैसे और भी कई संगठन खाना बनाकर दे रहे हैं. खाना बांटने का काम पुलिस-प्रशासन की टीमें कर रही हैं और वह सुरक्षा और सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित कर रही हैं.



dehradun police, food to poor, देहरादून पुलिस गरीब मज़दूरों को खाना खिलवा रही है.
देहरादून पुलिस और प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि गरीब मज़दूरों को खाना मिले.


इसके अलावा सोशल जो लोग खाना बना सकते हैं उन्हें राशन देने के लिए एक अन्नपूर्णा किट बनाई गई है. इसमें आटा, चावल, दाल, तेल समेत एक परिवार के लिए लगभग 15 दिन का राशन है. खंडेलवाल की टीम यह देख रही है कि जहां राशन दे दिया गया है वहां पका हुआ खाना न दिया जाए और जहां राशन नहीं पहुंचाया जा सका है वहां पका हुआ खाना दिया जाए ताकि कोई भूखा न रहे.

अनूठी पहल

नितिका खंडेलवाल कहती हैं कि ज़रूरतमंदों की मदद करने के लिए बड़ी संख्या में लोग मदद करने के लिए फ़ोन कर रहे हैं इसलिए सोमवार से ही एक नई सर्विस शुरु की गई है, 'देहरादून हैप्पी मील'. यह एक वेबपेज है जो देहरादून स्मार्ट सिटी की वेबसाइट में बनाया गया है. मदद करने का इच्छुक व्यक्ति (कम से कम 50 लोगों का खाना देना होगा) इसमें जाकर अपनी डिटेल्स भर सकता है. इसके बाद प्रशासन की टीम तय समय पर इसे उठा लेती है और ज़रूरतमंदों में बांट देती है.

इसके साथ ही पुलिस की मदद से क्षेत्रवार एक डाटाबेस भी तैयार किया जा रहा है. इसमें यह रिकॉर्ड किया जा रहा है किस क्षेत्र में किसको कितना राशन चला गया है और कितना पका खाना दिया गया है.

'dehradun happy meals 2, देहरादून हैप्पी मील' वेबपेज पर मदद करने का इच्छुक व्यक्ति अपनी डिटेल्स भर सकता है. जिसके बाद प्रशासन की टीम उससे संपर्क कर लेती है.
'देहरादून हैप्पी मील' वेबपेज पर मदद करने का इच्छुक व्यक्ति अपनी डिटेल्स भर सकता है. जिसके बाद प्रशासन की टीम उससे संपर्क कर लेती है.


एक बजे तक सबको मिला खाना

नितिका कहती हैं कि शुरुआत के दो-तीन दिन में तो बेशक कुछ दिक्कत हुई थीं आखिर ऐसी स्थिति किसी ने भी पहली बार देखी थी. एक दिन में 3-400 कॉल आ रही थीं खाना पहुंचाने के लिए लेकिन सोमवार को चौथे दिन तक सिस्टम दुरुस्त हो गया.

जो सामाजिक संगठन खाना दे रहे हैं उनसे सामंजस्य ठीक बैठ गया है. ये लोग भी पहले खुद ही खाना दे रहे थे, अब उन्हें समझ आ गया है कि यह बेहतर तरीका है क्योंकि पहले एक ही जगह दो-दो बार खाना पहुंच जा रहा था और शायद कोई भूखा रह जा रहा था.

सोमवार को स्थिति यह रही कि 11 बजे खाना बांटना शुरु किया गया और एक बजे तक हर ज़रूरतमंद को खाना मिल गया था. सोमवार से रात को भी खाना देना शुरु कर दिया गया.

dehradun, food to poor individual, अब भी कई लोग अपने स्तर पर ही गरीबों को खाना बांट रहे हैं लेकिन इसमें सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर ज़रूरी सावधानियां बरते जाने का अभाव दिख रहा है.
अब भी कई लोग अपने स्तर पर ही गरीबों को खाना बांट रहे हैं लेकिन इसमें सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर ज़रूरी सावधानियां बरते जाने का अभाव दिख रहा है.


अब तक बंटा इतना खाना

25 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद 26 तारीख को ज़िला प्रशासन की ओर से 1500 खाने के पैकेट बांटे गए थे और सोमवार को 5500 खाने के पैकेट बांटे गए हैं. नितिका कहती हैं कि अब भी ऐसे कुछ लोग हो सकते हैं जिनकी सूचना प्रशासन तक नहीं पहुंच पाई है और लोग उन्हें अपने स्तर पर खाना पहुंचा रहे हैं.

इसके अलावा अब तक राशन के 2157 पैकेट गरीब परिवारों को बांटे जा चुके हैं.

कोरोना के ख़िलाफ़ इस जंग ने कुछ अभूतपूर्व चुनौतियां पेश की हैं तो समाज का मानवीय चेहरा भी दमकता हुआ सामने आया है. इस संकटकाल में जिस तरह मदद के हाथ आगे बढ़े हैं वह इंसानियत के लिए संजीवनी है और पुलिस-प्रशासन का जज़्बा, कार्य कुशलता भी काबिले तारीफ़ है.

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First published: March 31, 2020, 10:02 AM IST
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