COVID-19: कोरोना वायरस से जंग में साथ आया IIP भी... बना रहा WHO मानकों के अनुसार सैनिटाइज़र
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COVID-19: कोरोना वायरस से जंग में साथ आया IIP भी... बना रहा WHO मानकों के अनुसार सैनिटाइज़र
देहरादून स्थित आईआईपी केंद्र में न तेज़ी से सैनिटाइज़र बनाने का काम किया जा रहा है.

आईआईपी की सैनिटाइज़र निर्माण को कुटीर उद्योग से जोड़ने की भी योजना है ताकि यह राज्य में युवाओं को रोज़गार देने में सहायक हो सके.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ पैट्रोलियम यानी आईआईपी ने राज्य में सेनिटाइज़र की कमी दूर करने के लिए हाथ बढ़ाया है. देहरादून स्थित आईआईपी केंद्र में न तेज़ी से सैनिटाइज़र बनाने का काम किया जा रहा है. आईआईपी वैज्ञानिकों का दावा है कि ज़रूरत पड़ने पर प्रोडक्शन को बढ़ाया भी जा सकता है. इसके साथ ही आईआईपी ने भविष्य में सैनिटाइज़र निर्माण को कुटीर उद्योग से जोड़ने की भी योजना बनाई है ताकि यह राज्य में युवाओं को रोज़गार देने में सहायक हो सके.

अब तक इतना तैयार 

कोरोना वायरस से फैलने वाली महामारी के दौरान गल्वस, मास्क और सैनिटाइज़र की राज्य में भारी कमी देखने को मिल रही है. अब इस कमी को दूर करने की ज़िम्मेदारी आईआईपी ने सम्भाली है. आईआईपी अभी तक 2,000 लीटर सैनिटाइज़र तैयार कर भी चुका है. इस सैनिटाइज़र का उपयोग कोरोना महामारी के दौरान फर्स्ट लाइन के कोरोना वॉरियर्स कर सकते हैं.



बता दें कि इंडियन इंस्टीयूट ऑफ पैट्रोलियम का काम पैट्रोलियम पदार्थों पर रिसर्च करना है. कोरोना वायरस से हो रही महामारी के दौरान राज्य में सैनिटाइज़र कि कमी को देखते हुए आईआईपी डायरेक्टर अंजन रॉय ने संस्थान के वैज्ञानिकों को तात्कालनिक आवश्यकता के तहद सैनिटाइज़र बनाने के लिए काम करने को कहा. इसके लिए एक विशेष टीम बनाई गई जो अब WHO की गाइडलाइन के तहत सैनिटाइज़र बना रही है.



ज़रूरत पर बढ़ जाएगा उत्पादन 

राय कहते हैं कि इस सैनिटाइज़क की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसकी खासियत यह है कि यूज़ करने के बाद यह सूखता नहीं है जिससे स्किन को भी कोई नुक़सान नहीं पहुंचता.

सैनिटाइज़र बनाने वाले वैज्ञानिक उमेश कुमार का कहना है कि अभी उनकी टीम केवल अस्पताल, पुलिस, एसडीआरएफ और नगर निगम की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए सैनिटाइज़र बना रही है. ज़रूरत महसूस हुई तो वह अधिक मात्रा में सैनिटाइज़र बना सकते हैं. यह भी बता दें कि आईआईपी के वैज्ञानिकों को एक लीटर सैनिटाइज़र बनाने में मात्र 3 मिनट का समय लग रहा है.

बेरोज़गारी भी दूर होगी 

आईआईपी डायरेक्टर मानते हैं कि सैनिटाइज़र कोरोना वायरस संकट खत्म होने के बाद भी आम आदमी के जीवन में रहेगा. इसलिए पह सैनिटाइज़र को कुटीर उद्योग से जोड़ना चाहते हैं जिससे उत्तराखंड को दोहरा लाभ होगा. पहला तो प्रदेश-देश में सैनिटाइज़र की कमी को दूर किया जा सकेगा और दूसरा एक तो युवाओं को रोज़गार मिलेगा.

निकट भविष्य में आईआईपी बेरोज़गार युवकों के लिए सैनिटाइज़र बनाने के लिए ट्रेनिंग भी मुहैया करवाएगा.
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