COVID-19 की वजह से 'भुतहा गांवों' में लौटी चहल-पहल, 2 जिलों में लौटे 22 हजार से ज्यादा लोग
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COVID-19 की वजह से 'भुतहा गांवों' में लौटी चहल-पहल, 2 जिलों में लौटे 22 हजार से ज्यादा लोग
लॉकडाउन से ठीक पहले की स्थिति में 700 से ज़्यादा गांवों में तो एक भी परिवार नहीं रह गया था, ऐसे बहुत से गांवों में अब चहल-पहल दिखाई दे रही है.

उत्तराखंड में पलायन बड़ी समस्या रही है. ऐसे में लॉकडाउन (Lockdown) में घर लौटे युवाओं को सरकार इस बार रोज़गार और गांव से जोड़ना चाहती है

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देहरादून. उत्तराखंड के गांवों में इन दिनों रौनक लौट आई है. कुछ दिन पहले तक जिन खाली गांवों में इक्का-दुक्का लोग दिखते थे, वे आबाद नजर आ रहे हैं. उत्तराखंड बनने के बाद रोजगार के लिए हजारों लोगों ने गांव छोड़ दिए. साल 2010 के बाद बिगड़ते हालात ने इन गांवों के कई घरों में ताले लगा दिए. एक के बाद एक गांव खाली होते चले गए. स्थिति यह हो गई कि लॉकडाउन (Lockdown) से ठीक पहले की स्थिति में 700 से ज़्यादा गांवों में तो एक भी परिवार नहीं रह गया था. ऐसे गांवों को घोस्ट विलेज यानी 'भुतहा गांव' कहा जा रहा था.

पलायन प्रभावित जिलों में लौटे लोग

अब कोरोना वायरस से फैले संक्रमण की वजह से पूरा माहौल बदल गया है. सिर्फ गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के दो जिलों की ही बात कर ली जाए तो आंकड़े बताते हैं कि भुतहा हो चुके गांवों में अब इंसानों की आमद-रफ़्त लौट आई है. कोरोना के डर और मजबूरी में ही सही लोग गांव लौटे हैं. पौड़ी जिले की बात करें तो करीब 12,000 लोग अपने गांव लौटे हैं और अल्मोड़ा में लगभग 10,000 लोग अपने घर वापस आए हैं.



सर्वे किया जाएगा  
पौड़ी ज़िले के प्रभारी मंत्री हरक सिंह के मुताबिक ज़िले के खाली गांवों में आजकल माहौल बदला हुआ है. हरक सिंह रावत के मुताबिक प्रभारी मंत्री के नाते पौड़ी जिले के डीएम के साथ उन्होंने एक खास प्लान तैयार किया है.

पौड़ी जिले में खंड विकास अधिकारियों को फॉर्म दिए गए हैं, जिन्हें लॉकडाउन के दौरान लौटे लोगों से भरवाया जाएगा. इनमें यह पूछा जाएगा कि वे कहां से लौटे हैं, वहां कितना पैसे कमाते थे और फिर इसी के आधार पर युवाओं के लिए ज़िले में ही स्वरोजगार की व्यवस्था की जाएगी..

पलायन आयोग भी करेगा सर्वे 

रिवर्स पलायन के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने 2017 में एक पलायन आयोग का गठन किया था. यह आयोग अब तक पलायन पर कई सर्वे कर चुका है और अब मुख्यमंत्री ने इसे एक और सर्वे की जिम्मेदारी सौंप दी है. इस सर्वे में हर जिले में लॉकडाउन में कितने लोग लौटे हैं और आगे भविष्य को लेकर वे क्या सोचते हैं. इसके आधार पर ज़्यादा से ज़्यादा युवाओं को राज्य से ही जोड़े रखने की योजना बनाई जा सकेगी.

उत्तराखंड में पलायन बड़ी समस्या रही है और सरकारें रिवर्स पलायन कराने में करीब-करीब असफल रही हैं. ऐसे में लॉकडाउन में घर लौटे युवाओं को सरकार इस बार रोज़गार और गांव से जोड़ना चाहती है ताकि वीरान पड़ चुके गांव फिर आबाद हों.

 

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