COVID-19: सार्वजनिक जगहों पर कूड़ा फेंका या थूकने पर 5000 रुपए तक जुर्माना, अदालत का निर्देश
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COVID-19: सार्वजनिक जगहों पर कूड़ा फेंका या थूकने पर 5000 रुपए तक जुर्माना, अदालत का निर्देश
नैनीताल हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

हाईकोर्ट (Highcourt) में उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Govt) से कहा है कि सार्वजनिक जगहों पर कूड़ा फेंकने और थूकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे. शहरी निकाय इस कानून के तहत 3 साल से नहीं वसूल रहे जुर्माना.

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नैनीताल. उत्तराखण्ड (Uttarakhand) के विभिन्न शहरों में अब गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई कर सकती है. हाईकोर्ट (High Court) ने सरकार से कहा है कि शहरी निकायों में सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकते या थूकते हुए पकड़े जाने वालों पर 500 से 5000 रुपए तक का जुर्माना लगाएं. हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि कूड़ा फेंकने व थूकना प्रतिषेद एक्ट 2016 को कठोरता से लागू करें. सभी शहरी निकायों में इसका पालन हो, यह भी सुनिश्चित करें. कोर्ट ने माना है कि इस कदम से कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सकता है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी है कि अगर सरकार एक्ट को लागू नहीं करवाती है तो वो कोर्ट में तथ्यों के साथ याचिका दाखिल कर सकते हैं.

क्या है मामला
दरअसल, अधिवक्ता अभिजय नेगी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी कि कोरोना के चलते सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा 2016 में विधानसभा में पास कूड़ा फेंकना व थूकना प्रतिषेद अधिनियम का पालन नहीं कराया जा रहा है. याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि इस एक्ट में 500 से 5 हजार तक का जुर्माना रखा गया है, लेकिन ये ठीक से लागू ना होने के चलते कई निकायों ने 2016 से 2019 तक एक भी रुपए का जुर्माना नहीं वसूला. याचिकाकर्ता का कहना है कि सूचना के अधिकार में जब सूचना मांगी गई तो चौंकाने वाली जानकारी ये मिली कि 39 निकायों ने इसमें कोई कार्रवाई नहीं की गई. वहीं जिन निकायों में कार्रवाई की भी वो सिर्फ नाम की. अभिजय नेगी कहते हैं कि कोरोना का खतरा देखते हुए इस एक्ट को लागू करना अनिवार्य है.

कोर्ट की टिप्पणी



हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रमेश रंगनाथन व जस्टिस आरसी खुल्बे ने सुनवाई के बाद आदेश जारी करते हुए कहा कि सरकार केवल पत्राचार कर अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकती. लिहाजा इस अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने के लिए ध्यान आकृर्षित करना होगा. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर इस अधिनियम को सख्ती से लागू करें तो कोरोना जैसी बीमारी से भी बचाव संभव है.



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First published: May 30, 2020, 5:31 PM IST
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