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COVID-19: लाकर ही मानेंगे स्टेज़ 3! सोशल डिस्टेंसिंग का अब भी नहीं हो रहा पूरी तरह पालन
Dehradun News in Hindi

Rajesh Dobriyal | News18 Uttarakhand
Updated: March 30, 2020, 9:56 PM IST
COVID-19: लाकर ही मानेंगे स्टेज़ 3! सोशल डिस्टेंसिंग का अब भी नहीं हो रहा पूरी तरह पालन
यह तस्वीर गवाह है कि कैसे देहरादून में सरेआम लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

मुफ़्त राशन मिलने की आशा में डोभाल चौक पर दसियों लोग इकट्ठे हो गए थे और सोशल डिस्टेंसिंग का ख़्याल किसी को नहीं दिख रहा था.

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उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में अब भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है. लॉकडाउन की वजह से खाने-पीने को मोहताज हो गए लोगों की मदद के लिए पूरे देश में मदद के हाथ बढ़ रहे हैं और उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है लेकिन जल्दबाज़ी, उत्साह और लापरवाही से मदद के नाम पर कोरोना वायरस फैलने का खतरा यहां बढ़ रहा है. देहरादून ज़िला प्रशासन तो अब काफ़ी बेहतर ढंग से पका हुआ खाना और राशन ज़रूरतमंदों तक पहुंचा रहा है लेकिन लोग खुद भी राशन बांट रहे हैं या लोगों से उनके नाम-पते पूछ रहे हैं और इसमें सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार हो जा रही है.

यह क्या हो रहा है?

न्यूज़ 18 की टीम को देहरादून की रायपुर रोड पर डोभाल चौक ऐसी भीड़ दिखी जैसी एक्सीडेंट होने या तमाशा होने पर होती है. कोरोना वायरस को लेकर लॉकडाउन के समय यह डरावनी तस्वीर थी. पूछने पर पता चला कि एक पूर्व प्रधान लोगों की मदद करने के लिए उनके नाम नोट कर रहे हैं. नाम बाकायदा आधार कार्ड देखकर नोट किए जा रहे थे.



मुफ़्त राशन मिलने के नाम पर दसियों लोग इकट्ठे हो गए थे और सोशल डिस्टेंसिंग यानी न्यूनतम दूरी बनाए रखने का ख़्याल किसी को नहीं दिख रहा था. पूछने पर पूर्व प्रधान ने बताया कि वह 'कहीं न कहीं से' ज़रूरतमंद लोगों की मदद के लिए राशन दिलवाएंगे.



corona, no social distancing, dehradun 2, इलाक़े के एक पूर्व प्रधान आधार कार्ड देखकर नाम नोट कर रहे थे हालांकि वह यह नहीं बता पाए कि ज़रूरतमंद लोगों को मदद मिलेगी कहां से?
इलाक़े के एक पूर्व प्रधान आधार कार्ड देखकर नाम नोट कर रहे थे हालांकि वह यह नहीं बता पाए कि ज़रूरतमंद लोगों को मदद मिलेगी कहां से?


सौभाग्य से थोड़ी ही देर में एक पुलिस पैट्रोलिंग टीम वहां पहुंच गई और उसे देखकर भीड़ तितर-बितर हो गई. यह सोचकर डर लगता है कि अगर इस भीड़ में से कोई कोरोना संक्रमित हुआ तो...

कैसी सोशल डिस्टेंसिंग?

इसी वार्ड-65 के पार्षद भी ज़रूरतमंद लोगों की मदद के लिए उनके नाम-पते नोट कर रहे हैं. उसे वह स्थानीय विधायक को दे रहे हैं जहां से उसे ज़िला प्रशासन को मदद के लिए प्रस्तावित किया जा रहा है. यह तो एक सही चैनल लगता है लेकिन इसके अलावा लोग खुद भी 'ज़रूरतमंद' लोगों को राशन बांट रहे हैं और 'मदद के उत्साह' में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन पूरी तरह नहीं किया जा रहा.

इसी वार्ड के क्षेत्र में 6 नंबर पुलिया पर एक सब्ज़ी मंडी भी लगती है जहां नगर-निगम ने रेहड़ियां बांटी हैं. इस सब्ज़ी मंडी में भी सोशल डिस्टेंसिंग की परवाह करता कोई नज़र नहीं आता. न्यूनतम दूरी तो छोड़िए लोग लगभघ सटकर सब्ज़ियां छांटते नज़र आते हैं और पैसे के लेन-देन में भी एक-दूसरे को छू ले रहे हैं.

corona, no social distancing, dehradun 3, NHM के मिशन डायरेक्टर युगल किशोर पंत कहते हैं कि समझदार लोग खुद ही घरों में रह रहे हैं लेकिन गरीब तबके के लोगों के लिए राशन पहले है, सोशल डिस्टेंसिंग बाद में.
NHM के मिशन डायरेक्टर युगल किशोर पंत कहते हैं कि समझदार लोग खुद ही घरों में रह रहे हैं लेकिन गरीब तबके के लोगों के लिए राशन पहले है, सोशल डिस्टेंसिंग बाद में.


समझदार खुद ही हैं घरों में कैद

नेशनल हेल्थ मिशन के उत्तराखंड में मिशन डायरेक्टर युगल किशोर पंत कहते हैं कि कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग तो हम सबको मिलकर लड़नी है. अगर कोई यह सोचता है कि सरकार इसे अकेले कर लेगी तो इतनी मैनपावर जुटाना संभव ही नहीं है. अगर एक आदमी संक्रमित पाया जाता है तो फिर हमें उन सभी लोगों को ट्रेस करना पड़ता है जो उसके संपर्क में आए थे. उनमें से एक भी छूट गया तो फिर उसके संक्रमण फैलाने का खतरा होता है. इसीलिए बार-बार कहा जा रहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखें 21 दिन.

पंत कहते हैं कि जो समझदार लोग हैं वह खुद ही बाहर नहीं आ रहे हैं और उनकी अपनी कॉलोनी में किसी को बेवजह घूमने भी नहीं दिया जा रहा है. वह कहते हैं कि यह समझदारी सबको दिखानी होगी.

 

corona, no social distancing, dehradun 4, पुलिस पेट्रोलिंग टीम के पहुंचने पर ही लोग वहां से निकले.
पुलिस पेट्रोलिंग टीम के पहुंचने पर ही लोग वहां से निकले.


सिटिज़न पार्टनरशिप की ज़रूरत

लेकिन एनजीओ सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी (एसडीसी) फाउंडेशन के अनूप नौटियाल का विचार इससे अलग और थोड़ी ज़्यादा प्रैक्टिकल है. वह कहते हैं कि एक सोसायटी के रूप में हमारी (ज़्यादातर लोगों की) आदत हो गई है कि कोई हमें नियमों का पालन करवाने के लिए टोकता रहे, बाध्य करे.

वह कहते हैं अगर सरकार चाहे तो उनके जैसे लोगों का सहयोग इसमें ले सकती है क्योंकि बिना सिटिज़न पार्टनरशिप सोशल डिस्टेंसिंग को लागू कर पाना संभव ही नहीं है.

पंत कहते हैं कि शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रबुद्ध नागरिकों का सहयोग तो प्रशासन लेता ही है. कोरोना वायरस के लिए किए गए लॉकडाउन में इसके इस्तेमाल का सुझाव विचारणीय सुझाव है और इस बारे में सभी ज़िला प्रशासन को बताएंगे.

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First published: March 30, 2020, 9:50 PM IST
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