भारी बर्फबारी और कोरोना वायरस से चारधाम यात्रा पर छाए संकट के बादल

17 मई को लॉकडाउन का थर्ड फेज खत्म होने के बाद चारधाम यात्रा रूट से लेकर टूरिस्ट स्पॉट्स में कारोबारियों को राहत मिल सकती है. (फाइल फोटो)
17 मई को लॉकडाउन का थर्ड फेज खत्म होने के बाद चारधाम यात्रा रूट से लेकर टूरिस्ट स्पॉट्स में कारोबारियों को राहत मिल सकती है. (फाइल फोटो)

चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक शुरू हो जाती है, लेकिन बर्फबारी (Snowfall) के कारण अभी तक बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में 10 से 15 फुट तक बर्फ जमी हुई है. ऐसे में चारधाम यात्रा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) में इस बार की रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी (Snowfall) ने चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) को मुश्किलों में डाल दिया है तो चारधाम यात्रा के साथ पर्यटन क्षेत्र पर कोरोना वायरस की छाया पड़ गई है. चारधाम यात्रा अप्रैल के आखिरी हफ्ते तक शुरू हो जाती है, लेकिन अभी तक बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में 10 से 15 फुट तक बर्फ जमी हुई है. ऐसे में चारधाम यात्रा पर बर्फबारी भारी पड़ रही है, जबकि माना जाता है कि उत्तराखंड में लोगों की लगभग 30 फीसदी आजीविका साधन तीर्थाटन और पर्यटन है.

यात्रा मार्ग को साफ करने में आ रही हैं काफी दिक्कतें
वैसे तो उत्तराखंड में पिछले साल और इस साल लंबे समय बाद रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी हुई है. यह बर्फबारी अपने साथ कई मुश्किलें भी साथ लाई है. प्रदेश के चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत ऊपरी इलाकों में अभी भी काफी बर्फ जमी हुई है. कई क्षेत्रों में तो अभी  भी बर्फबारी हुई है. इस बर्फबारी से चारधाम यात्रा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. दरअसल पिछले साल पूरे सीजन में अगर केदारनाथ में बर्फबारी का रिकॉर्ड देखें तो 50 फुट तक बर्फबारी हुई थी. हालत यह है कि पिछले साल भी अच्छी बर्फबारी हुई थी, इसके कारण पहले की बर्फ और अभी की बहुत बर्फ जमा है. इसके कारण यात्रा मार्ग को आवाजाही के लायक बनाने में काफी दिक्कतें आ रही हैं.

यात्रा की तैयारी के लिए बचा है डेढ़ माह का समय
वहीं दूसरी तरफ कोरोना वायरस के कारण यात्रा समेत पर्यटन व्यवसाय भी संकट में पड़ गया है. होटलों में बुकिंग पर संकट आ गया है. दरअसल यात्रा के साथ ही उत्तराखंड में पर्यटन व्यवसाय की भी शुरुआत हो जाती है, लेकिन कोरोना वायरस के कारण अभी चारधाम यात्रा पर संशय के बादल छाए हुए हैं. अगर इस वायरस के फैलने का डर लंबे समय तक रहा तो चारधाम यात्रा के साथ-साथ उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को भी काफी नुकसान होगा, जबकि यात्रा की तैयारी के लिए अब मात्र डेढ़ महीने का ही समय रह गया है. चारधाम यात्रा और पर्यटन से जुड़े कारोबारी अभी भी खुलकर यात्रा की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में सरकार के पास सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह इतनी बर्फबारी में चार धाम यात्रा कैसे करवाए? क्योंकि उत्तराखंड सरकार के लिए न सिर्फ बर्फबारी ने मुश्किलें खड़ी की हैं बल्कि कोरोना वायरस की छाया भी यात्रा पर पड़ती दिख रही है.



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