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उत्तराखंडः दूध से आमदनी हो नहीं रही, खींचातानी से हर रोज लाखों का नुकसान
Dehradun News in Hindi

Bharti Saklani | News18 Uttarakhand
Updated: February 15, 2020, 6:49 PM IST
उत्तराखंडः दूध से आमदनी हो नहीं रही, खींचातानी से हर रोज लाखों का नुकसान
उत्तराखंड में डेयरी विकास को लेकर सरकार उदासीन. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

उत्तराखंड (Uttarakhand) में सरकारी विभागों की आपसी खींचातानी की वजह से डेयरी विकास की योजनाओं पर पड़ रहा असर. दूध उत्पादन और सप्लाई (milk production & supply) की समुचित व्यवस्था न बन पाने से हो रहा लाखों का नुकसान.

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देहरादून. उत्तराखण्ड (Uttarakhand) में डेयरी विकास विभाग (Dairy Development) घाटे में जा रहा है और इसकी बड़ी वजह है दुग्ध फेडरेशन और डेयरी विभाग के बीच में तालमेल की कमी है. इस कारण टिहरी और पौड़ी की डेयरी तो बंदी की कगार पर पहुंच गई है. उत्तराखण्ड में सरकारी विभागों के बीच आपसी खींचतान की वजह से विभाग को हर साल जहां 10 प्रतिशत का घाटा झेलना पड़ रहा है. वहीं अधिकारियों और मिल्क कमेटी के अध्यक्ष के बीच दूध की सप्लाई (milk production & supply) को लेकर कोई व्यवस्था नहीं बन पा रही है. इधर, दुग्ध विकास मंत्री धन सिंह रावत कहते हैं कि अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय बनाना बेहद जरूरी है. विभाग की समस्याएं संज्ञान में हैं. जब विभाग हाथ में आया था, तब स्थिति ज्यादा खराब थी, लेकिन अब स्थिति सुधर रही है. टिहरी की स्थिति बेहतर करने की कोशिश जारी है.

रोजाना 5 लाख लीटर की खपत
उत्तराखंड में रोजाना 5 लाख लीटर दूध की खपत है, लेकिन डेयरी विकास विभाग मात्र 1.77 लाख लीटर दूध की सप्लाई ही कर पा रहा है. कई जगह तो हालात इतने खराब हैं कि डेयरी विभाग औसत दैनिक दूध उपार्जन से काफी पीछे है. इनमें टिहरी में 66 प्रतिशत, देहरादून में 17 प्रतिशत तो हरिद्वार में 13 प्रतिशत से ज्यादा का घाटा उठाना पड़ रहा है. दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ इसके पीछे अधिकारियों के साथ तालमेल की कमी मानते हैं. दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ नैनीताल के अध्यक्ष मुकेश बोरा ने बताया कि वे बार-बार खामियों को उजागर करते हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में 11 मिल्क यूनियन हैं और हर जिले में अपनी समस्या है, लेकिन अधिकारी इस पर संज्ञान ही नहीं लेते.

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विभागों की खींचातानी से दूध उत्पादन भी कम हुआ.




मार्केटिंग न होने से नुकसान


वैसे 2006 तक हालात ऐसे नहीं थे. श्रीनगर में नोडल ऑफिस होने के कारण श्रीनगर, टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी की डेयरी से अच्छा उत्पादन हो रहा था. मगर अब पौड़ी में दुग्ध उत्पादन बेहद कम हो गया है. न तो डेयरी विभाग मार्केटिंग पर ध्यान दे रहा है और न ही सरकारी स्तर पर उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं. वहीं दुग्ध संघ और अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल का अभाव भी समस्या को और बढ़ा रहा है. डेयरी विभाग के निदेशक जीवन सिंह नाग्नयाल ने भी माना कि जिन जिलों में दूध की सबसे ज्यादा खपत होती है, वहीं दूध की सप्लाई नहीं हो पा रही है. पहाड़ी जिलों में भी इकाइयां घाटे में जा रही हैं.

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First published: February 15, 2020, 6:49 PM IST
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