भारत की बेटी, नेपाल की बहू का गुस्सा... सब काठमांडू का किया है, अपनी राजनीति के लिए कर रहा हमारा नुक़सान'
Dehradun News in Hindi

भारत की बेटी, नेपाल की बहू का गुस्सा... सब काठमांडू का किया है, अपनी राजनीति के लिए कर रहा हमारा नुक़सान'
सुगौली संधि के मुताबिक कालापानी से निकलने वाली काली नदी ही दोनों देशों की सीमाओं को तय करती है.

ताज़ा सीमा विवाद बढ़ने से बॉर्डर पर रहने वाले दोनों मुल्कों के नागरिकों की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं.

  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
पिथौरागढ़. नेपाल ने भारत के साथ अपनी सीमाओं को नए सिरे से तय करने का पूरा मन बना लिया है. इसे लेकर नेपाली संसद में बीते रोज़ संविधान संशोधन बिल भी पेश हो चुका है. इस बिल के मुताबिक उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में मौजूद लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को नेपाल अपने नए नक्शे में शामिल करेगा जबकि सुगौली संधि के मुताबिक कालापानी से निकलने वाली काली नदी ही दोनों देशों की सीमाओं को तय करती है. ताज़ा सीमा विवाद बढ़ने से बॉर्डर पर रहने वाले दोनों मुल्कों के नागरिकों की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं.

दिल भी न बंट जाएं 

उत्तराखंड में कालापानी से लेकर बनबसा तक 250 किलोमीटर की खुली सीमा है. इस दायरे में दोनों मुल्कों के लोगों को भले ही काली नदी बांटती हो, लेकिन सामाजिक ताना-बाना इनका एक ही है. सीतापुल में नेपाल ने हाल ही में बीओपी बनाई है, उसके ठीक सामने भारतीय गांव गर्वयांग है. वहां के निवासी इस स्थिति पर चिंता जताते हैं.



गर्वयांग गांव के नृप सिंह गर्ब्याल कहते हैं कि उन्हें आज तक नहीं लगा कि भारत और नेपाल दो अलग-अलग देश हैं लेकिन जिस प्रकार नेपाल आए दिन भारत विरोधी रुख दिखा रहा है, उससे उन्हें दुःख हो रहा है. गर्ब्याल को चिंता है कि अगर ऐसा चलता रहा तो काली नदी का बहाव सीमाओं के साथ ही दिलों को भी बांट देगा.



पहले की तरह ही रहें रिश्ते 

नेपाल के छांगरु की रहने वाली सुधा बोहरा सीतापुल में मजदूरों की मदद से भारी मात्रा में जरूरी सामान इंडिया से ले जा रही थीं. इसी दौरान न्यूज़ 18 ने उनसे सीमा विवाद पर पूछा तो वे तपाक से बोलीं कि यह सब काठमांडू का किया है, वो अपनी राजनीति के लिए सीमा विवाद को तूल दे रहा है. इससे नुकसान उन जैसे लोगों को होगा. सुधा भारत से नेपाल ब्याही हैं. वह चाहती है कि नेपाल और भारत के रिश्ते पहले की ही तरह रहें.

नेपाल खुली सीमा पर सेना तैनात करने जा रहा है. इसके बाद 20 फिक्स स्पॉट होंगे जहां से आवाजाही हो सकेगी. ऐसे में सुधा के साथ सीतापुल में आए राम बहादुर की चिंता ये है कि वे छांगरु से अपने ज़िला मुख्यालय दार्चुला कैसे जाएंगे. असल में आज भी नेपाल के छांगरु में रहने वाले भारत के रास्ते से होकर ही अपने ज़िला मुख्यालय पहुंचते हैं.

 

 
First published: June 1, 2020, 7:17 PM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading