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बेटियों की चीखों से टूट रही है देवभूमि की शांति... महिलाओं के प्रति अपराध में भारी वृद्धि

बेटियों की चीखों से टूट रही है देवभूमि की शांति... महिलाओं के प्रति अपराध में भारी वृद्धि

देहरादून में कॉ़लेज छात्राएं  कह रही हैं उन्हें रोज ही छेड़खानी का सामना करना पड़ता है.

देहरादून में कॉ़लेज छात्राएं कह रही हैं उन्हें रोज ही छेड़खानी का सामना करना पड़ता है.

कॉलेज जाने वाली छात्राएं खुलकर बोल रही हैं कि उन्हें रोज़ ही छेड़खानी का सामना करना पड़ता है और ऐसी वारदातों का असर यह भी हुआ है कि परिजन उन्हें कहीं आने-जाने से टोकने लगे हैं.

जिस प्रदेश की नींव में महिला आंदोलन हो, जो प्रदेश महिला सशक्तिकरण के लिए जाना जाता हो, जिसके समाज में महिलाएं बराबरी की भागीदार हों... उस प्रदेश में आज महिलाएं सुरक्षित नहीं लग रही हैं. पौड़ी में युवती को ज़िंदा जलाने की वारदात, देहरादून में बेवफ़ाई के शक में किशोरी की हत्या, छेड़छाड़ के चलते दून में पढ़ने आई पुरोला की युवती की ख़ुदकुशी और उत्तरकाशी में ही छात्राओं का शिक्षक पर छेड़छाड़ का आरोप पिछले दिनों हुई ऐसी घटनाएं हैं जिन्होंने उत्तराखंड को हिलाकर रख दिया है.

उत्तराखण्ड पुलिस के महिला उत्पीड़न के अपराध आकंड़े पिछले 3 साल में तेज़ी से बढ़े हैं. रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से अक्टूबर तक बलात्कार के 438 केस सामने आए हैं, तो दहेज़ के चलते 56 विवाहिताओं को मौत के घाट उतार दिया गया. इस अवधि में एसिड अटैक के दो केस और छेड़खानी के 67 केस दर्ज हुए हैं. इसके साथ ही यह भी पता चला कि महिलाओं के खिलाफ 70 फीसदी अपराध देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में हुए हैं. यहां तक की बीजेपी के दो और कांग्रेस के एक विधायक पर भी महिलाओं के प्रति अपराध के केस दर्ज हैं.

एक नज़र पिछले 3 साल के महिलाओं के ख़िलाफ़ किए गए अपराधों पर...







































अपराध 2016 2017 2018
बलात्कार 278 337 438
छेड़खानी 031 029 067
शारीरिक शोषण 196 195 226
चेन लूट 018 035 035
हत्या 046 047 042

यह वारदातें बढ़ने का असर राजधानी में लड़कियों पर दिख रहा है. कॉलेज जाने वाली छात्राएं खुलकर बोल रही हैं कि उन्हें रोज़ ही छेड़खानी का सामना करना पड़ता है और ऐसी वारदातों का असर यह भी हुआ है कि परिजन उन्हें कहीं आने-जाने से टोकने लगे हैं.

बुधवार की घटना के बाद राजधानी पुलिस दावा कर रही है कि इन घटनाओं से सबक लेते हुए गश्त बढ़ाई जाएगी,  ख़ासकर महिला कॉलेजों के बाहर पिकेट स्थापित की जाएगी और चीता पुलिस को बढ़ाया जाएगा.

ऐसा पहले भी हुआ है कि किसी बड़े अपराध के बाद पहले भी पुलिस सतर्कता में तेज़ी आई है और समय बीतने के साथ ही सब ठंडा पड़ गया है. पिछले कुछ समय की यह घटनाएं यह भी बता रही हैं तेज़ी से हो रहे निर्माण कार्यों और डैमोग्राफ़िक बदलावों के साथ शायद राज्य का सामाजिक ताना-बाना मेल नहीं खा रहा है और देवभूमि की सुकून भरी शांति के लिए जानी जाती थी वह अब बेटियों की चीखों से टूट रही है.

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