उत्तराखंड: लगातार हो रहा वन्य जीवों का शिकार! वन विभाग पर उठ रही उंगलियां

उत्तराखंड में लगातार हो रहे वन्यजीवों के शिकार के मामलों ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पिछले तीन दिनों में 3 तेंदुओं का शिकार, दो तेंदुए एवं 1 हाथी की संदिग्ध मौत हो चुकी है. शिकार के पिछले मामलों पर भी अब तक विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है.

Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: August 5, 2019, 6:24 PM IST
उत्तराखंड: लगातार हो रहा वन्य जीवों का शिकार! वन विभाग पर उठ रही उंगलियां
उत्तराखंड में लगातार हो रहा वन्य जीवों का शिकार
Sunil Navprabhat
Sunil Navprabhat | News18 Uttarakhand
Updated: August 5, 2019, 6:24 PM IST
उत्तराखंड में जहर खाने से एक साथ तीन तेंदुओं की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को सकते में डाल दिया है. इनका का बिसरा बरेली स्थिति आईवीआरआई (Indian Veterinary Research Institute IVRI LAB) की लैब में भेजा गया है. आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये तेंदुए पोचिंग के शिकार हुए हैं. उत्तराखंड में वाइल्ड लाइफ पोचिंग के पहले से ही कई केस लंबित पड़े हैं. जिनमें वन विभाग अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाया. इससे भी विभाग पर उंगलियां उठ रही है.

वन्य जीवों के शिकार की आशंका?
उत्तराखंड वन विभाग में 2 अगस्त को उस समय हडकंप मच गया, जब पता चला कि तीन तेंदुए मृत पाए गए हैं. बताया गया कि तीनों की मौत जहर खाने से हुई है. इन तेंदुओं में से एक राजाजी टाइगर रिजर्व की रवासन रेंज में तो एक-एक तेंदुआ इससे लगे लैंसडाउन और हरिद्वार वन प्रभाग की रेंज में मरे पड़े मिले. संभावना ये है कि ये तेंदुए राजाजी टाइगर रिजर्व के ही रहे होंगे. इसी कारण जहर खाने के बाद वे आसपास ही मरे पड़े पाए गए. मृत तेंदुओं का बिसरा जांच के लिए बरेली भेजा गया है. वन विभाग की ओर से क्षेत्र में सघन कॉबिंग जारी है साथ ही पूरे गढ़वाल क्षेत्र में  रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है. इस मामले में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से 15 दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी गई है.

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शिकार के पुराने मामलों में भी वन विभाग ने अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है


CBI तक भी पहुंचा था पोचिंग का एक मामला
राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में मार्च 2018 में गड्ढ़ों में दबाकर रखे गए बाघ, तेंदुए के मांस, खाल और हड्डियां बरामद किए गए थे. इस मामले में छह से अधिक जांच अधिकारी बदले गए. राज्य में वाइल्ड लाइफ पोचिंग से जुड़ा ये पहला मामला था जिस पर सीबीआई जांच भी बैठी लेकिन इससे पहले कि सीबीआई पूछताछ करने से लेकर कुछ आगे बढ़ पाती. पूर्व चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डीबीएस खाती सीबीआई जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले आए. ताज्जुब की बात ये कि विभाग इस स्टे के खिलाफ कोर्ट नहीं गया. इसकी जांच भी अब STF के हवाले है.

पकड़े गए शिकारियों ने खोली वन विभाग की पोल
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एक मामले में पकड़े गए 2 शिकारियों ने पूछताछ में वन विभाग की कार्यशैली को लेकर अहम खुलासे किए थे. शिकारियों ने पूछताछ में वन विभाग की कलई खोल दी थी. 16 जुलाई 2018 को देहरादून वन प्रभाग की लच्छी वाला रेंज में मिले हाथी के पैर के कंकाल को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मादा हाथी का बताया गया था. लेकिन पकड़े गए शिकारियों ने खुलासा किया कि ये नर हाथी था जिसे उन्होंने ही जहर देकर मारा था और उसके दांत भी उन्होंने बेच दिए थे. इससे साफ है कि गलत पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाई गई. लेकिन वन विभाग ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की.

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मारे गए हाथी का अवशेष


तीन दिन में पांच तेंदुए और एक हाथी का शिकार
उत्तराखंड वन विभाग के लिए अगस्त का फर्स्ट वीक काला सप्ताह साबित हो रहा है.

>> 2 अगस्त को 3 तेंदुओं की जहर खाने से मौत हो गई. 2 अगस्त को ही ऋषिकेश में एक तेंदुआ मृत पाया गया. बताया गया कि ये तेंदुआ आपसी संघर्ष में मारा गया.

>> 3 अगस्त को मसूरी में तेंदुए का एक शावक मरा पड़ा पाया गया.

>> 4 अगस्त को राजाजी टाइगर रिजर्व के चीला कैंप में 3 साल की हाथी जूही की मौत हो गई. इसी दिन शाम को देहरादून की बड़कोट रेंज में करीब 14 साल का एक हाथी घायल मिला.

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First published: August 5, 2019, 2:36 PM IST
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