गले में सेफ़्टी पिन फंसने से मारी गई 4 साल की मासूम, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि चूंकि बच्ची की मौत हो गई है इसलिए परिजन कुछ भी निराधार आरोप लगा रहे हैं.

News18 Uttarakhand
Updated: April 18, 2019, 8:23 PM IST
गले में सेफ़्टी पिन फंसने से मारी गई 4 साल की मासूम, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
अस्पताल में बिलखते परिजन पूछते रहे कि उनकी बच्ची क्यों मारी गई.
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Updated: April 18, 2019, 8:23 PM IST
उत्तराखंड में बदहाल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और लापरवाह निजी अस्पताल कैसे लोगों की ज़िंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं इसका एक और उदाहरण देहरादून में देखने को मिला है. विधानसभा से कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित एक निजी अस्पताल में चार साल की एक मासूम बच्ची की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि गले में सेफ़्टी पिन फंसने के बाद अस्पताल लाई गई बच्ची को 24 घंटे तक कोई डॉक्टर झांकने तक नहीं आया और इसी लापरवाही की वजह से बच्ची की जान चली गई.

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हरिद्वार में रहने वाली चार साल की तेजस्विनी ने बुधवार को ग़लती से सेफ़्टी पिन निगल ली थी. बच्ची को स्थानीय नर्सिंग होम में दिखाया गया तो उसने राजधानी के कनिष्क अस्पताल के लिए रेफ़र कर दिया और एंबुलेंस में बैठाकर देहरादून पहुंचा दिया.

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मासूम तेजस्विनी के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में बच्ची को भर्ती तो कर दिया गया लेकिन पूरे दिन एक भी डॉक्टर ने आकर बच्ची को चेक तक नहीं किया. खानापूर्ति के लिए बच्ची को ग्लुकोज़ चढ़ा दिया गया लेकिन बच्ची के गले में फंसी पिन को निकालने की कोई कोशिश नहीं की गई. जब बच्ची की मौत हो गई तो कह दिया कि ‘शॉक लगने की वजह से’ बच्ची की मौत हो गई.

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अस्पताल में रोते-बिलखते परिजनों को तो अस्पताल प्रबंधन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया तो उसने पुलिस को बुला लिया. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि चूंकि बच्ची की मौत हो गई है इसलिए परिजन कुछ भी निराधार आरोप लगा रहे हैं.तो क्या फ्लॉप हो गई है उत्तराखंड सरकार की ई-हेल्थ स्टूडियो योजना?

उत्तराखंड में निजी अस्पतालों की लापरवाही का यह पहला और अकेला मामला नहीं है. दो अस्पतालों के बीच मिलीभगत का भी यह कोई अनूठा उदाहरण नहीं है लेकिन ऐसे मामलों में किसी अस्पताल या डॉक्टर की ग़लती शायद ही कभी पकड़ी जाती है. पीड़ित परिजन अंततः किस्मत को दोष देकर रह जाते हैं.

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