फिसड्डी है देहरादून नगर निगम ! हर साल बारिश खोलती है पोल
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फिसड्डी है देहरादून नगर निगम ! हर साल बारिश खोलती है पोल
मेयर सुनील उनियाल गामा और ज़िलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव कहते हैं कि स्मार्ट सिटी के काम के चलते यह दिक्कतें आ रही हैं.

एक हफ़्ते में 2 बार हुई तेज़ बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया क्योंकि ड्रेनेज काम नहीं कर रही है.

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देहरादून. उत्तराखंड में अकेली स्मार्ट सिटी देहरादून बननी है लेकिन स्मार्ट सिटी के हालात पर देहरादून नगर निगम पलीता लगा रहा. न ड्रेनेज की व्यवस्था है और सड़कें तो लगता है गड्ढों के लिए बनाई जा रही हैं. देर रात से हो बारिश ने देहरादून में इंतज़ामों की पोल एक बार फिर खोलकर रख दी है. यह बात अलग है कि देहरादून के मेयर सुनील उनियाल गामा और मुख्यमंत्री तक स्वच्छता रैंकिंग में 124वें पायदान पर आने पर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं.

घरों में घुसा पानी 

स्वच्छता रैंकिंग का आधार क्या है यह तो यह रैंकिंग देने वाले ही जानें क्योंकि देहरादून के लोग बारिश के इस मौसम में देहरादून नगर निगम से कितने त्रस्त हैं यह कोई उनसे पूछे. एक हफ़्ते में 2 बार हुई तेज़ बारिश में तो ऐसे हालात बने कि अपने घरों में सो रहे लोग जान बचाकर भागे क्योंकि ड्रेनेज की व्यवस्था न होने के चलते लोगों के घरों में पानी घुस गया.



इस पर मेयर सुनील उनियाल गामा और ज़िलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव कहते हैं कि स्मार्ट सिटी के काम के चलते यह दिक्कतें आ रही हैं. मलबे के चलते नालियां चोक हो गई हैं और लोगों ने जगह-जगह पर अतिक्रमण किया है जो उन्हीं के लिए परेशानी का सबब बन रहा है.
कोर्ट के आदेश का इंतज़ार!

कितने कमाल की सफ़ाई है, है न? स्मार्ट सिटी के सीईओ पहले भी आशीष श्रीवास्तव थे और थोड़े अंतराल के बाद फिर बन गए हैं. शहर से अतिक्रमण हटाना देहरादून के मेयर और डीएम की ज़िम्मेदारी नहीं तो किसकी है? क्या नालियों की सफ़ाई, अतिक्रमण हटाने जैसे काम करने के लिए भी इन ज़िम्मेदार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश का इंतज़ार है.

लेकिन नहीं मेयर की प्राथमिकता तो प्लास्टिक हटाने के लिए सबसे बड़ी ह्यूमन चेन बनाने की है भले ही उससे सिंगल यूज़ प्लास्टिक का कूड़ा शहर में और फैला हो. इसके अलावा जब स्वच्छता रैंकिंग में शहर ऊपर चढ़ जाए तो फिर लोगों की दिक्कतों से नेताओँ, अधिकारियों को क्या मतलब? लोगों की रैंकिंग की चिंता तो अब तीन, साढ़े तीन साल बाद ही करनी है.
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