EXCLUSIVE:  अब पूरा देहरादून MDDA का... त्यूणी, कालसी तक भी सुनियोजित विकास का रास्ता खुला

बिल्डर कम्युनिटी का कहना है कि इससे लोगों को कुछ फ़ायदा मिल सकता है. देहरादून के बिल्डर शारिक ने बताया कि अब उन इलाकों में भी प्रोजेक्ट्स लांच किए जा सकेंगे.

Manish Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: July 19, 2019, 3:47 PM IST
EXCLUSIVE:  अब पूरा देहरादून MDDA का... त्यूणी, कालसी तक भी सुनियोजित विकास का रास्ता खुला
सरकार ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण यानी एमडीडीए की सीमा का विस्तार कर दिया है.
Manish Kumar
Manish Kumar | News18 Uttarakhand
Updated: July 19, 2019, 3:47 PM IST
सरकार ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण यानी एमडीडीए की सीमा का विस्तार कर दिया है. अब एमडीडीएम की सीमा के अंदर पूरा देहरादून ज़िला आ गया है. आवास विभाग द्वारा जारी शासनादेश के मुताबिक कालसी चकराता और त्यूणी तक का पूरा इलाका अब एमडीडीए का हिस्सा होगा. नेशनल या फिर स्टेट हाइवे के दो सौ मीटर के दायरे के सभी राजस्व गांवों को एमडीडीए के दायरे में कर दिया गया है. देहरादून जिले में सिर्फ ऋषिकेश ही एमडीडीए के दायरे से बाहर है बाकी अब पूरा जिला ही प्राधिकरण के अंतर्गत आ गया है.

'अनियोजित निर्माण रुकेगा'

सरकार के इस फ़ैसले के बाद अब देहरादून सिटी में बढ़ता जा रहा आबादी का दबाव थोड़ा कम होने की सम्भावना है. अब आवासीय इलाकों का विकास कालसी, चकराता और त्यूणी तक किया जा सकेगा. साधारण शब्दों में कहें तो बिल्डरों के लिए अब दरवाजे पहाड़ में भी खुल गए हैं. साथ ही साथ एमडीडीए भी देहरादून शहर से बाहर नई आवासीय योजनाओं को लांच कर पाएगा.

कम ही राज्यों के पास बची है हरियाली, उत्तराखंड को बर्बाद करना ठीक नहीं: हाईकोर्ट

कालसी, चकराता और त्यूणी के कुल 38 गांवों को एमडीडीए के अंतर्गत ला दिया गया है. त्यूणी में हनोल, सिलवाड़ा जबकि चकराता में कोरूवा,  लाखामण्डल और कालसी में तिलवाड़ी और कोटी तक का इलाका अब एमडीडीए में शामिल हो गया है. इस फैसले से जहां एक तरफ इन इंटीरियर पहाड़ी इलाकों में एमडीडीए की सुविधाओं के पहुंचने की उम्मीद जगी है वहीं दूसरी ओर पहाड़ में हो रहे अनियोजित कन्स्ट्रक्शन पर भी लगाम लगाने में मदद मिल सकती है.

'दून पर कम होगा दबाव'

एमडीडीए के क्षेत्र में आ जाने के बाद अब इन इलाकों में किसी भी निर्माण से पहले उसका नक्शा एमडीडीए से पास कराना पड़ेगा. नक्शा पास कराने का मामला नए जुड़े क्षेत्र के लोगों के लिए थोड़ा चिन्ताजनक हो सकता है लेकिन, एमडीडीए के अधिकारियों ने दावा किया है कि नक्शा पास कराने की ऑनलाइन व्यवस्था बहुत कारगर है और इसमें लोगों को बिल्कुल भी दिक्कत नहीं होगी.
Loading...

एमडीडीए दफ्तर से कंपाउंडिग फाइल गायब, विजिलेंस को थमाई डमी फाइल

एमडीडीए के वीसी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि इस फ़ैसले से देहरादून शहर पर बढ़ता आबादी का भीषण दबाव कम होगा. नए इलाकों में आवासीय विकल्प मिलने शुरु होंगे. ऐसे इलाकों का शहरीकरण तो होगा साथ ही पहाड़ में मनमाने निर्माण पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा.

'देहरादून तक भागदौड़ बढ़ेगी'

दूसरी ओर बिल्डर कम्युनिटी का कहना है कि इससे लोगों को कुछ फ़ायदा मिल सकता है. देहरादून के बिल्डर शारिक ने बताया कि अब उन इलाकों में भी प्रोजेक्ट्स लांच किए जा सकेंगे. इससे लोगों के पास पहले से ज्यादा ऑप्शन होंगे. हालांकि चकराता के स्थानीय निवासी की राय इससे बिल्कुल अलग है.

दारू नहीं ज़रूरी... सरकार के पास हैं पैसा जुटाने के ये विकल्प

सचिवालय में कार्यरत चकराता के एक निवासी का कहना है कि अब गांव वालों की देहरादून तक भागदौड़ बढ़ जाएगी. एमडीडीए तो अपने इलाक़े में मौजूद अपने सभी अधिकार चाहेगा लेकिन, अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा.

उन्होंने कहा कि एमडीडीए से मिलने वाली सुविधाएं तो देहरादून में ही पूरी हासिल नहीं होती, गांववालों तक कहां पहुंच पाएंगीं. इसके उलट अब अपनी जमीन पर उन्हें किसी भी निर्माण कार्य के लिए अफसरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे. इससे काम में देरी तो होगी रिश्वतखोरी की नई ज़मीन भी तैयार होगी.

Facebook पर उत्‍तराखंड के अपडेट पाने के लिए कृपया हमारा पेज Uttarakhand लाइक करें.  
First published: July 19, 2019, 3:22 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...