पर्यटकों के बोझ से कराह रहे हैं उत्तराखंड के फ़ेमस टूरिस्ट प्लेस, पर्यटन मंत्री ने कहा... इधर-उधर भी घूमो

बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के लिए विशेष सुविधाएं तो छोड़िए इंफ़्रास्ट्रक्चर तक उपलब्ध नहीं हैं. इसकी वजह से राज्य सरकार के इंतज़ाम फ़ेल नज़र आ रहे हैं.

News18 Uttarakhand
Updated: June 14, 2019, 6:16 PM IST
पर्यटकों के बोझ से कराह रहे हैं उत्तराखंड के फ़ेमस टूरिस्ट प्लेस, पर्यटन मंत्री ने कहा... इधर-उधर भी घूमो
वीकेंड्स में तो हालत यह हो जा रही है कि लोग 4-5 घंटे में दिल्ली से देहरादून तो पहुंच जाते हैं लेकिन देहरादून से मसूरी पहुंचने में भी इतना ही समय लग रहा है.
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Updated: June 14, 2019, 6:16 PM IST
साल भर पर्यटकों को आकर्षित करने वाला उत्तराखंड अब पर्यटकों के बोझ तले कराह रहा है. माना जाता है कि 1.10 करोड़ की आबादी वाले उत्तराखंड में हर साल 50 लाख से ज़्यादा पर्यटक आते हैं जो इसकी आबादी के आधे से भी ज़्यादा हैं. इतने लोगों के लिए विशेष सुविधाएं तो छोड़िए इंफ़्रास्ट्रक्चर तक उपलब्ध नहीं हैं. इसकी वजह से राज्य सरकार के इंतज़ाम फ़ेल नज़र आ रहे हैं. राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी कह रहे हैं कि मशहूर टूरिस्ट प्लेस पर उनकी कैरिंग कैपेसिटी से ज़्यादा भार हो गया है इसलिए दिक्कतें हो रही हैं. वह कहते हैं कि बेहतर होगा कि सीधे चार धाम पहुंचने के बजाय पर्यटक दूसरी जगहों पर भी घूमते हुए आएं ताकि एक साथ बहुत ज़्यादा भीड़ न हो और ज़रूरी सुविधाएं मिल पाएं.

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वीकेंड्स में तो हालत यह हो जा रही है कि लोग 4-5 घंटे में दिल्ली से देहरादून तो पहुंच जाते हैं लेकिन देहरादून से मसूरी पहुंचने में भी इतना ही समय लग रहा है. यही हाल नैनीताल और सभी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों का है. ऐसे में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या उत्तराखंड इतने सारे पर्यटकों की आमद के लिए तैयार नहीं है? क्या उत्तराखंड को पर्यटन की अपनी नीति बदलने की ज़रूरत है? पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि वक्त पुनर्विचार का है.

भीड़ से ढहीं व्यवस्थाएं

रुद्रप्रयाग में वाट्सऐप पर एक मैसेज वायरल हो रहा है जिसमें कथित रूप से राजस्थान की एक तीर्थयात्री ज्योति दधीच ने चारधाम यात्रा आने वाले तीर्थयात्रियों से किया यात्रा में न आने अनुरोध किया है. इस मैसेज में यात्रा, महंगाई, अव्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं.

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मैसेज में ज्योति दधीच ने दावा किया है कि वह 24 साल से लगातार यात्रा पर आ रही थीं लेकिन इस बार बिना चारधाम यात्रा पूरी किए उन्हें वापस लौटना पड़ा है. इस मैसेज की सत्यता तो प्रमाणित नहीं हो सकी है लेकिन  स्थानीय युवाओं ने इसके विरोध में अभियान भी छेड़ दिया.उधर 6 जून को केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रीयों से बदसलूकी के मामले में सीएम त्रिवेन्द्र सिंह के निर्देश के बाद ज़िला प्रशासन जांच करवा रहा है. कथित बदसलूकी भी बहुत ज़्यादा भीड़ और जबरन मंदिर में घुसने, पुलिस के बाहर निकालने को लेकर हुई थी.
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कम लेकिन पैसे खर्च करने वाले टूरिस्ट आएं

उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी कहते हैं कि होटल इंडस्ट्री बहुत समय से यह बात कह रही है कि 10 आदमी आकर एक रुपये खर्च करें उससे कहीं अच्छा है कि एक आदमी आकर 10 रुपये खर्च करे. ज़्यादा भीड़ को राज्य का इंफ़्रास्ट्रक्चर ही सपोर्ट नहीं करता. कोशिश यह करनी चाहिए कि पैसा खर्च करने वाला टूरिस्ट आए, लुत्फ़ ले और पैसा ख़र्च करे.

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पर्यावरण के लिए काम करने वाली संस्था हेस्को के संस्थापक पद्मश्री अनिल जोशी कहते हैं कि हमें पर्यटन पर नियंत्रण रखने की ज़रूरत है. यह जो लाखों लोग आते हैं यह अपने साथ हज़ारों-लाखों प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन का कचरा लाते हैं और वहीं छोड़कर आ जाते हैं. यह हमारे संवेदनशील पहाड़ों, नदियों, गाड़-गदेरों के लिए बेहद ख़तरनाक हैं. जोशी कहते हैं कि जो भी यहां आ रहा है चाहे वह धार्मिक पर्यटन के लिए आ रहा हो, चाहे प्राकृतिक सुंदरता के लिए, हमारे पास उनके लिए पैकेज होने चाहिएं. उन्हें यह साफ़ भी कर देना चाहिए कि वह क्या कर सकते हैं और क्या नहीं.

‘बोतलें मत लाओ, गदेरों में है पानी’

साहनी कहते हैं कि ज़रूरत इस बात की है कि यह पर्यटन सीज़न ख़त्म होते ही हाई पावर कमेटी बनाकर स्थितियों की समीक्षा की जाए. इसमें पर्यटन और व्यवस्था से जुड़े सभी पक्षोंको शामिल किया जाए और फिर एक-एक क्षेत्र की समीक्षा हो. यह तय करना चाहिए कि अगले टूरिस्ट सीज़न से पहले क्या किया जा सकता है और लॉंग टर्म में क्या किया जाना चाहिए.

 

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अनिल जोशी कहते हैं कि मसूरी की तर्ज पर पहाड़ पर जाने वाले सभी लोगों पर 500 रुपये प्रति व्यक्ति ईको टैक्स लगा दें. इससे विकल्प खड़ा करें. खाने के लिए जो सामान लोग प्लास्टिक पैकिंग में लेकर जाते हैं उसे हरिद्वार. ऋषिकेश में ही रोक दिया जाए और पहाड़ी उत्पादों से बने खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाए जाएं. वह यह भी कहते हैं कि हमारे पास गंगा, यमुना जैसी बड़ी नदियों के अलावा बड़ी संख्या में गाड़ गदेरे हैं. इनका पानी इस्तेमाल करें, फ़िल्टर लगाकर पानी बेचें. बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों को कह दें कि आपको पानी की बोतलें लाने की ज़रूरत नहीं है.

'पर्यटकों की भीड़ बनी समस्या' 

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर मानते हैं कि पर्यटकों की भीड़ समस्या हो गई है. वह कहते हैं, “ज़्यादा पर्यटकों का आना एक समस्या तो है. हम इस बारे में एकराय बनाने की कोशिश करेंगे और फिर इससे निबटने की कोई रणनीति तैयार करेंगे.”

 

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