दून-मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी ही पता नहीं MDDA को, पर्यटन सीज़न में कैसे होंगे इंतज़ाम

एक अनुमान के अनुसार 1.10 करोड़ की आबादी वाले उत्तराखंड में हर साल 50 लाख से ज़्यादा पर्यटक पहुंचते हैं यानि कुल आबादी के आधे तो पर्यटक ही आते हैं.

Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: June 13, 2019, 7:57 PM IST
दून-मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी ही पता नहीं MDDA को, पर्यटन सीज़न में कैसे होंगे इंतज़ाम
वीकेंड्स पर मसूरी में पर्यटकों को लंबे जाम से जूझना पड़ता है.
Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: June 13, 2019, 7:57 PM IST
पर्यटन उत्तराखंड की कमाई का मुख्य ज़रिया है. राज्य सरकार की कोशिशें ज़्यादा से ज़्यादा पर्यटकों को आकर्षित करने की है और इसके लिए त्रिवेंद्र रावत सरकार ने 13 ज़िलों में 13 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने का अभियान भी शुरू किया है. लेकिन इस साल इतने ज़्यादा पर्यटक आ गए हैं कि सारी व्यवस्थाएं ढह गई नज़र आ रही हैं. खुद प्रदेश के पर्यटन मंत्री यह स्वीकार कर रहे हैं कि प्रदेश के टूरिस्ट डेशटिनेशन अपनी क्षमता से अधिक पर्यटकों से जूझ रहे हैं. लेकिन समस्या यह है कि मसूरी जैसे पर्यटक स्थल की कैरिंग कैपिसिटी (क्षेत्र कितनी संख्या में लोगों का भार उठा सकता है) यही अभी पता नहीं है.

आधी आबादी के बराबर पर्यटक 



प्रदेश के टूरिस्ट डेस्टीनेशन अपनी क्षमता से ज्यादा पर्यटकों को ढो रहे हैं और यही वजह है कि राज्य भर से लोगों के लंबे ट्रैफ़िक जामों में फंसने की ख़बरें आ रही हैं. ख़ासकर वीकेंड पर नैनीताल, मसूरी जैसे मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर इतनी ज़्यादा संख्या में लोग पहुंच रहे हैं कि सारे इंतज़ाम धरे के धरे रह जा रहे हैं. प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी कह रहे हैं कि इन टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स में कैरिंग कैपेसिटी से ज़्यादा पर्यटक आ रहे हैं और इसीलिए समस्या पैदा हो रही है.

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एक अनुमान के अनुसार 1.10 करोड़ की आबादी वाले उत्तराखंड में हर साल 50 लाख से ज़्यादा पर्यटक पहुंचते हैं यानि कुल आबादी के आधे तो पर्यटक ही आते हैं. इतनी बड़ी फ़्लोटिंग पॉपुलेशन के लिए इंन्फ्रस्ट्रक्चर प्रदेश के पास है ही नहीं. पर्यटन के लिहाज से मई और जून राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इन दो महीनों में धार्मिक पर्यटन और घूमने के लिए पहुंचते हैं.

कैरिंग कैपेसिटी का ही पता नहीं 

मशहूर हिल स्टेशनों पर तो वीकेंड्स में जगह मिलनी मुश्किल हो जाती है. मौजूदा व्यवस्थाएं इतनी बड़ी फ़्लोटिंग पॉपुलेशन के लिए नाकाफ़ी साबित होती हैं. देहरादून-मसूरी के लिए सिटी प्लानिंग का काम कर एमडीडीए यानि मसूरी देहरादून डेवलपमेंट अथॉरिटी करती है.
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एमडीडीए के उपाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव कहते हैं कि देहरादून और मसूरी के विकास के लिए मास्टर प्लान बनाया जा रहा है. इसमें अगले 20 साल तक की ज़रूरतों का ख़्याल रखा जाएगा. लेकिन कमाल की बात यह है कि अभी एमडीडीए तक को नहीं पता कि देहरादून-मसूरी कि कैरिंग कैपेसिटी है कितनी. श्रीवास्तव कहते हैं कि मास्टर प्लान में इसका भी अध्ययन किया जा रहा है.

इस पर्यटन सीज़न में भी मसूरी में जाम से राहत नहीं

राज्य बनने के बाद से उत्तराखंड टूरिज़्म के आधार पर विकास के सपने तो देखता-बुनता रहा लेकिन  अपने पर्यटक स्थलों की सेहत की सुधार और इंफ़्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए कुछ नहीं किया. अब जबकि बड़ी संख्या में पर्यटक आने लगे हैं तो व्यवस्थाओं के सारे दावे हवा हो जा रहे हैं.

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