देहरादून: अब नगर निगम को मिलेगा सड़कों का स्वामित्व, पक्ष-विपक्ष उठा रहा सवाल
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देहरादून: अब नगर निगम को मिलेगा सड़कों का स्वामित्व, पक्ष-विपक्ष उठा रहा सवाल
अब ऐसे में सरकार की मंशा है कि देहरादून के बाद इसे सभी नगर निगम क्षेत्रों में लागू किया जाए.

कांग्रेस के साथ ही सरकार के विधायक भी इस फैसले से सहमत नहीं हैं. कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना (Suryakant Dhasmana) का कहना है कि पहले ही शहर की सड़कों की हालत खस्ता है. नगर निगम के पास जाने के बाद तो भगवान ही मालिक हैं.

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देहरादून. अगर आप नगर निगम (Municipal Corporation) क्षेत्र में रहते हैं तो ये खबर आपके काम की है. गली और मोहल्ले की सड़क (Road) की दुर्दशा को लेकर अब आपको लोनिवि, एडीबी और सिंचाई विभाग (Irrigation Department) के ऑफिसों का चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. अब आप सीधे नगर निगम को शिकायत कर पाएंगे, क्योंकि, नगर निगम क्षेत्र में जितनी भी सड़कें हैं सरकार उनका स्वामित्व नगर निगम को सौंपने जा रही है.

दरअसल, नेशनल हाइवे, स्टेट हाइवे को छोड़ शहर की तमाम आंतरिक सड़कों का जिम्मा या तो लोक निर्माण विभाग के पास होता है या फिर एडीबी, सिंचाई विभाग या अन्य एजेंसियों के पास. ऐसे में कौनसी सड़क कौन से विभाग की है, किससे शिकायत करें. ये एक आम समस्या बनी रहती है. सड़क खोदकर कोई विभाग चला जाता है तो सड़क बनाता कोई और विभाग है. इसके लिए अब नगर निगम क्षेत्र में पड़ने वाली सभी सड़कों का जिम्मा नगर निगमों को सौंपने की तैयारी है. शुरुआत देहरादून नगर निगम से की जा रही है. शासन में सीएम और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में दो दौर की मीटिंग हो चुकी हैं. लोक निर्माण विभाग ने देहरादून नगर निगम क्षेत्र में बकायदा ऐसी 655 किलोमीटर लंबी 497 सड़कों की सूची तैयार भी कर ली है. ये वो सड़के हैं, जो नगर निगम क्षेत्र में पड़ती हैं और उनका रखरखाव लोक निर्माण विभाग करता है.

विधायक भी इस फैसले से सहमत नहीं हैं
लेकिन, कांग्रेस के साथ ही सरकार के विधायक भी इस फैसले से सहमत नहीं हैं. कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि पहले ही शहर की सड़कों की हालत खस्ता है. नगर निगम के पास जाने के बाद तो भगवान ही मालिक हैं. वहीं, भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ का कहना है कि सड़कों का स्वामित्व किसी को भी दें, हमें तो काम चाहिए. लेकिन वे नगर निगम के संसाधनों और एक्सपर्टीज पर भी सवाल उठा रहे हैं. नगर निगम के पास ऐसे न संसाधन मौजूद हैं न मैन पावर.
इसे सभी नगर निगम क्षेत्रों में लागू किया जाए


अब ऐसे में सरकार की मंशा है कि देहरादून के बाद इसे सभी नगर निगम क्षेत्रों में लागू किया जाए, लेकिन शुरुआती दौर में ही नगर निगम की क्षमता उसकी एक्सपर्टीज को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. वो एक हद तक वाजिब भी लगते हैं, क्योंकि नगर निगम पहले ही संसधानों का रोना रोता रहा है. उसके पास न मशीनें हैं न एक्सपर्ट इंजीनियर.
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