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पढ़िए, क्यों शहरों से गांवों की तरफ भाग रहे हैं लोग

पढ़िए, क्यों शहरों से गांवों की तरफ भाग रहे हैं लोग

 शहर में घर बनने की लिए ढूंढने से भी जमीन नहीं मिल रही है. लगातार जमीनों के रेट बढ़ रहे हैं. इसलिए अब घर बनाने की लिए लोग गांवों का रुख कर रहे हैं.

शहर में घर बनने की लिए ढूंढने से भी जमीन नहीं मिल रही है. लगातार जमीनों के रेट बढ़ रहे हैं. इसलिए अब घर बनाने की लिए लोग गांवों का रुख कर रहे हैं.

शहर में घर बनने की लिए ढूंढने से भी जमीन नहीं मिल रही है. लगातार जमीनों के रेट बढ़ रहे हैं. इसलिए अब घर बनाने की लिए लोग गांवों का रुख कर रहे हैं.

राजधानी देहरादून के शहरी क्षेत्रों में अब अपने सपनों का घर बनना सपने जैसे हो गया है.

लोग एक बार फिर गांवों की ओर लौट रहे हैं. इसकी क्या वजह है दून में अपने सपनों का आशियाना के बनने में मुश्किलों का होना. शहर में घर बनने की लिए ढूंढने से भी जमीन नहीं मिल रही है. लगातार जमीनों के रेट बढ़ रहे हैं. इसलिए अब घर बनाने की लिए लोग गांवों का रुख कर रहे हैं.

स्टांप रजिस्ट्री विभाग का लगातार राजस्व बढ़ रहा है. गांवों में जमकर जमीनों की खरीद-फरोख्त हो रही है. राजधानी देरादून में हर साल करीब 60 हजार लोग जमीनों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं. 2015 में स्टांप रजिस्ट्री विभाग को 270 करोड़ का राजस्व मिला था. वहीं इस साल राजस्व बढ़कर 346 करोड़ रुपए हो गया है.

शहर की जमीनों की बिक्री में लगातार गिरावट आ रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनों की जमकर खरीद-फरोख्त हो रही है. सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनों के सर्किल रेट भी बढ़ चुके हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी जमीनें उपलब्ध हैं. यही वजह है कि अपने सपनों के आशियाने की तलाश में लोग गांवों की ओर लौट रहे हैं.

झरना कमठान एडीएम दून का कहना है कि विभाग की कोशिश है कि जहां ज्यादा जमीनों की बिक्री हो रही है. ऐसे एरिया को चिन्हित की जाए, जिससे विभाग को अधिक से अधिक राजस्व को प्राप्ति हो सके. राजधानी के आउट एरिया यानी ग्रामीण क्षेत्रों में खास तौर से दौड़वाला, रायपुर, नकरौंदा, गुलरघाटी, सहसपुर, विकासनगर और डोईवाला जैसे क्षेत्रों में प्लाटिंग हो रही है.

दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में अभी बुनियादी सुविधाओं का विकास नहीं हुआ है. यही वजह है कि शहर से कम रेट पर जमीनें मिल रही हैं. लोगों का कहना है शहर की जमीनों के दाम सातवें आसमान पर हैं. ऐसे में घर बनाने के लिए गांव में जमीन तलाशी जा रही है.

गांव में जहां लोगों को सस्ते दामों पर जमीनें मिल रही हैं. वहीं, स्टांप रजिस्ट्री विभाग के राजस्व में भी इजाफा भी हो रहा है. ऐसे में अपने आशियाने की तलाश में लोगों का गांवों की ओर वापस आना भी लाजिमी है.

फिलहाल वक्त के साथ गांव की तस्वीर भी बदल रही है और लोगों को गांवों में अपनी मंजिल भी मिल रही है.

Tags: Uttarakhand news

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