देहरादून: बागेश्वर से पहले लखीमपुर खीरी भी गया था उत्तराखंड सरकार का हेलीकॉप्टर!

नियमानुसार गार्ड ऑफ ऑर्नर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री को ही प्रदान किया जाता है.

नियमानुसार गार्ड ऑफ ऑर्नर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री को ही प्रदान किया जाता है.

कांग्रेस (Congress) ने रेखा वर्मा की इसी पोस्ट को मुद्दा बना लिया है. कांग्रेस नेत्री गरिमा दशौनी ने ट्वीट कर पूरे मामले की जानकारी शेयर करते हुए कहा है कि ये सरकारी धन का दुरुपयोग है.

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देहरादून. उत्तराखंड की सियासत और सियासतदान दोनों ही इन दिनों देशभर में चर्चा का बिषय बने हुए हैं. पहले फटी जींस और बीस बच्चे पैदा करने जैसे बयानों के कारण नए नवेले मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत देश भर में सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल हुए तो अब उत्तराखंड सरकार का हेलीकाप्टर और बीजेपी संगठन के पदाधिकारी भी चर्चाओं में बने हुए हैं. ताजा मामला बीजेपी की उत्तराखंड सह प्रभारी एवं यूपी के लखीमपुर खीरी से सांसद रेखा वर्मा से जुड़ा हुआ है. रेखा वर्मा शनिवार को देहरादून में आयोजित पार्टी की कोर ग्रुप मीटिंग में शामिल होने उत्तराखंड आई थीं. शनिवार को देर शाम तक चली मीटिंग के बाद रेखा वर्मा रविवार को उत्तराखंड सरकार के हेलीकाप्टर से लखीमपुर खीरी स्थित अपने संसदीय क्षेत्र में पहुंची. रेखा वर्मा ने बकायदा अपनी फेसबुक पोस्ट पर लखीमपुर खीरी से उत्तराखंड सरकार के हेलीकाप्टर के साथ अपनी फोटो भी शेयर की है.

मदन कौशिक ने ससम्मान इसे स्वीकार भी किया

कांग्रेस ने रेखा वर्मा की इसी पोस्ट को मुद्दा बना लिया है. कांग्रेस नेत्री गरिमा दशौनी ने ट्वीट कर पूरे मामले की जानकारी शेयर करते हुए कहा है कि ये सरकारी धन का दुरुपयोग है. बीजेपी अपने संगठन के कामकाज के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है. कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं कि रेखा वर्मा को किस हैसियत से उत्तराखंड सरकार ने राजकीय हेलीकाप्टर दिया. मामला सिर्फ रेखा वर्मा का ही नहीं है सोमवार को बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक भी इसी हेलीकाप्टर से बागेश्वर पहुंचे थे. बागेश्वर में मदन कौशिक की रैली थी. मदन कौशिक के राजकीय हेलीकाप्टर से पार्टी कार्यक्रमों में जाने को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं. बात सिर्फ इतनी ही नहीं है. मदन कौशिक को बागेश्वर में बकायदा गार्ड ऑफ आर्नर भी दिया गया है. और मदन कौशिक ने ससम्मान इसे स्वीकार भी किया.

उन्हें मामले की जानकारी नहीं है
नियमानुसार गार्ड ऑफ ऑर्नर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री को ही प्रदान किया जाता है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष को किस नाते ये गार्ड ऑफ ऑर्नर प्रदान किया गया ये अभी भी सवाल बना हुआ है.  हालांकि, कांग्रेस द्वारा इसमें कड़ी आपत्ति जताए जाने के बाद पुलिस विभाग द्वारा इसमें जांच बैठा दी गई है. अलबत्ता मदन कौशिक इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. बीजेपी इसका सारा ठीकरा पुलिस के सर मढ़ रही है. बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता विनोद सुयाल का कहना है कि ये पुलिस की जिम्मेदारी बनती थी कि किसे गार्ड ऑफ आर्नर दिया जाए , किसे नहीं. विनोद सुयाल का कहना है कि पुलिस ने गलतीफहमी में उन्हें गॉर्ड ऑफ ऑर्नर दे दिया. मदन कौशिक ने गॉर्ड ऑफ ऑर्नर क्यों लिया, इस पर सुयाल कुछ भी बोलने को तैयार नहीं. दूसरी ओर पार्टी सह प्रभारी रेखा वर्मा द्वारा हेलीकाप्टर का यूज किए जाने के सवाल पर विनोद सुयाल का कहना है कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है.
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