देहरादूनः जहां नेहरू ने बिताई थी अपनी आखिरी रात

News18India
Updated: November 14, 2017, 8:09 PM IST
देहरादूनः जहां नेहरू ने बिताई थी अपनी आखिरी रात
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का देहरादून से गहरा रिश्ता रहा है. यहां तक कि अपने जीवन की आखिरी रात भी उन्होंने देहरादून में ही गुजारी थीं.
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Updated: November 14, 2017, 8:09 PM IST
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का देहरादून से गहरा रिश्ता रहा है. यहां तक कि अपने जीवन की आखिरी रात भी उन्होंने देहरादून में ही गुजारी थीं.

पंडित नेहरू पहली बार सोलह साल की उम्र में मसूरी आए थे. 1906 में उस पहले दौरे के बाद तो मानो जैसे पंडित नेहरू का दिल देहरादून और आस पास के इलाके में ही बस गया था. वक्त मिलने पर वह अपने परिवार के साथ यहां आते रहते थे.

देहरादून में उनका पहला इंटरव्यू लिया था वरिष्ठ पत्रकार राजकंवर ने. वह तब इंडियन एक्सप्रेस के लिए काम करते थे. राजकंवर कहते हैं कि नेहरू से मिलकर यह लगता ही नहीं था कि वह इतने बड़े आदमी हैं. वह सहजता से न सिर्फ पत्रकारों बल्कि आम आदमियों से भी मिलते थे.

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तेईस मई उन्नीस सौ चौंसठ को पंडित नेहरू तीन दिन के लिए देहरादून पहुंचे थे. उनके साथ उनकी बेटी इंदिरा भी थीं. सर्किट हाउस में कुछ देर रुकने के बाद वह इंदिरा और पार्टी नेताओं के साथ सहस्रधारा गए जहां डाक बंगले में उन्होंने विश्राम किया.

1962 में बना यह डाक बंगला आज लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि यहां पंडित नेहरू की कोई तस्वीर या स्मृति चिन्ह तक नहीं है.

डाक बंगले के तत्कालीन केयरटेकर अरविंद नेगी की यादें ही संभवतः वह सुबूत है जो पंडित नेहरू और सहस्रधारा के संबंध को स्थापित करता है.

सहस्त्रधारा में निकलने वाले गंधक की जलधारा के बारे में माना जा है कि इस प्राकृतिक जलस्त्रोत में स्नान और जलग्रहण करने से चर्मरोग और पेट की सभी बीमारियां दूर हो जाती हैं. इस पर वैज्ञानिक शोध भी कर रहे हैं.

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तत्कालीन देहरादून जेल का वह कमरा जहां जवाहरलाल नेहरु को रखा गया था.


पंडित नेहरू भी अक्सर यहां आते और गंधक की इसी जलधारा में स्नान करते थे. 26 मई को भी पंडित जी ने यहां स्नान करने के बाद इलाके के विकास के लिए कई घोषणाएं की थीं. नेगी बताते हैं कि उन्होंने 10 लाख रुपये दिए जाने का ऐलान भी कर दिया था, लेकिन आज तक ये सब घोषणाएं अधूरी हैं.

नेगी बताते हैं कि पंडित नेहरू ने 26 मई को यहां अधिकारियों के साथ मीटिंग की तो यहां बहुत भीड़ हो गई थी. दरअसल जैसे ही यह पता चला कि पंडित नेहरू आए हैं तो आस-पास के इलाकों से लोग उन्हें देखने के लिए पहुंचने लगे.

आखिर फिर आने का वायदा कर शाम करीब चार बजे पंडित नेहरू दिल्ली के लिए रवाना हो गए और फिर उनके हमेशा के लिए चले जाने की ख़बर ही यहां पहुंचीं.

(देहरादून से भारती सकलानी के साथ आसिफ़ की रिपोर्ट)
First published: November 14, 2017
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