Lockdown में नहीं उठा कूड़ा तो जलाने लगे लोग, देहरादून में निगम की व्यवस्था चौपट
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Lockdown में नहीं उठा कूड़ा तो जलाने लगे लोग, देहरादून में निगम की व्यवस्था चौपट
देहरादून के कई इलाक़ों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में कई-कई दिन की देर होने की वजह से लोग अब ये कूड़ा जलाने लगे हैं.

देहरादून नगर निगम का न कॉल सेंटर काम कर रहा है और न ही वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है. अधिकारी फ़ोन उठा लें तो ठीक से बात नहीं करते.

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देहरादून. कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग में स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिस समेत सुरक्षाकर्मियों के साथ ही सफ़ाईकर्मियों को भी कोरोना वॉरियर्स माना गया है. देशभर में कई जगह लोग सफ़ाईकर्मियों का जैसा सम्मान कर रहे हैं वैसा शायद ही उन्हें पहले कभी मिला हो. इससे सफ़ाईकर्मियों के साथ ही सफ़ाई की ज़रूरत का भी महत्व उजागर होता है लेकिन जिस देहरादून से राज्य चलता है उसके नगर-निगम के अधिकारियों को शायद यह बात समझ नहीं आती. इस अस्थाई राजधानी के कई इलाक़ों में लॉकडाउन के दौरान सफ़ाई व्यवस्था ढह गई है और कमाल की बात है कि इस बारे में शिकायत करने का कोई सिस्टम भी काम नहीं कर रहा.

कूड़ा जलाने लगे हैं लोग

देहरादून का वॉर्ड नंबर 65 नगर निगम की व्यवस्थाओं का उदाहरण है. यह क्षेत्र उन नए 40 वॉर्डो में से एक है जो निगम की सीमा में विस्तार के समय ग्रामीण इलाक़े से शहर में आया था. इन नए वॉर्डों में रहने वाले लोग और जनप्रतिनिधि भी यह शिकायत करते रहे हैं कि निगम प्रशासन इनके साथ भेदभाव करता है. लेकिन लॉकडाउन के दौरान सफ़ाई व्यवस्था ढह जाने के मामले में अधिकारियों का रवैया और निगम का सिस्टम शायद सबके लिए ही बेकार है.



वार्ड 65 में रहने वाले कुछ लोगों ने स्थानीय पार्षद से क्षेत्र के वॉट्सऐप ग्रुप में सोमवार को शिकायत की कि कई दिन से डोर-टू-डोर कूड़े का उठान नहीं हो पा रहा है. इसकी वजह से लोगों के घरों में कूड़ा जमा होता जा रहा है और अब कई लोग उसे जलाने लगे हैं जो पर्यावरण के लिए नुक़सानदेह है और प्रतिबंधित है.
dehradun nagar nigum sanitation department, देहरादून नगर निगम का न कॉल सेंटर का नंबर काम कर रहा है और न ही वेबसाइट पर सैनिटेशन डिपार्टमेंट रिस्पॉंड कर रहा है.
देहरादून नगर निगम का न कॉल सेंटर का नंबर काम कर रहा है और न ही वेबसाइट पर सैनिटेशन डिपार्टमेंट रिस्पॉंड कर रहा है.


कोई व्यवस्था ही नहीं

न्यूज़ 18 ने वार्ड 65 के पार्षद नरेश रावत से इस बारे में जानना चाहा तो उन्होंने वही पुरानी कहानी दोहराई. रावत बताते हैं कि निगम में नए शामिल हुए वार्डों में कूड़ा उठाने की व्यवस्था नगर निगम करता ही नहीं है. डेढ़ साल बाद भी यहां पुरानी व्यवस्था ही चल रही है और जैसे-तैसे चल रही है.

रावत के अनुसार क्षेत्र में पंचायत के समय से ही एक व्यक्ति कूड़ा उठवाने के लिए गाड़ियां चलवाता है. उस पर न निगम का कोई नियंत्रण है और न ही वह पार्षद की सुनता है. वह अपनी मर्ज़ी से काम करता है. जब तक निगम से गाड़ियां नहीं मिल जातीं तब तक यह व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकती.

कहीं सुनवाई नहीं

मेयर सुनील उनियाल गामा के समय में देहरादून नगर निगम केंद्रीकृत तरीके से काम कर रहा है. निगम क्षेत्र में किसी भी काम की शिकायत के लिए उन्होंने इस साल एक जनवरी से एक कॉल-सेंटर नंबर जारी किया था. न्यूज़ 18 ने इस नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवानी चाही लेकिन यह नंबर, 0135-2719100, काम ही नहीं कर रहा है.

हमने निगम क्षेत्र में की सफ़ाई व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार चीफ़ म्युनिसिपल हेल्थ ऑफिसर डॉक्टर कैलाश जोशी  से भी बात की. उन्होंने सफ़ाई व्यवस्था करवाने वाली कंपनी से बात करने को कहा. हमारे आग्रह पर उन्होंने कंपनी के अधिकारी का नंबर देने की भी बात कही लेकिन सात घंटे बाद भी न उन्होंने नंबर दिया, न ही मैसेज का जवाब.

आप यह नंबर निगम में कहीं और से भी नहीं ले सकते न शिकायत दर्ज करवा सकते हैं क्योंकि फ़ोन नंबर की तरह देहरादून नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर भी काम नहीं कर रही. इसमें शिकायतों (ग्रीवाइन्स) का पेज खुल ही नहीं रहा है और सैनिटाइज़ेशन डिपार्टमेंट के ऑप्शन पर कोई रिस्पॉंस नहीं मिलता.

dehradun nagar nigum complaint, लॉकडाउन में अगर आपको नगर निगम में किसी चीज़ (जैसे की सफ़ाई व्यवस्था) की शिकायत करनी हो तो यह संभव नहीं है क्योंकि वेबसाइट के यह हाल हैं और कमोबेश अफ़सरों के भी.
लॉकडाउन में अगर आपको नगर निगम में किसी चीज़ (जैसे की सफ़ाई व्यवस्था) की शिकायत करनी हो तो यह संभव नहीं है क्योंकि वेबसाइट के यह हाल हैं और कमोबेश अफ़सरों के भी.


फ़ोटो-नाम छपवाने पर ज़ोर

कोरोना काल में गरीबों की मदद करने और उसके प्रचार में नेताओं के साथ ही कई सामाजिक संस्थाएं भी लगी हुई हैं. एक स्थानीय अख़बार के अनुसार देहरादून के मेयर मुख्यमंत्री राहत कोष में सबसे ज़्यादा दान देने वाले व्यक्तियों में से एक बन चुके हैं. हालांकि उन्होंने यह दान अपनी जेब से नहीं दिया कर्मचारियों का अंशदान, निगम के विकास कार्यों के पैसे, विभिन्न लोगों द्वारा दी गई सहायता से दिया है.

अब चूंकि सिस्टम ठीक तरह से काम करता रहे इसके लिए वाहवाही नहीं मिलती और ख़बर नहीं छपती, इसलिए शायद ही इस ओर किसी का ध्यान है.
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