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देवस्थानम बोर्ड के बाद किसकी बारी? धामी सरकार पर अब इस कानून वापसी के लिए कांग्रेस ने बनाया दबाव

देवस्थानम बोर्ड के बाद किसकी बारी? धामी सरकार पर अब इस कानून वापसी के लिए कांग्रेस ने बनाया दबाव

उत्तराखंड में भू कानून वापसी को लेकर चर्चा शुरू हुई.

उत्तराखंड में भू कानून वापसी को लेकर चर्चा शुरू हुई.

विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election 2022) से पहले पुष्कर सिंह धामी की सरकार ​एक और मुद्दे पर घिरती नज़र आ रही है. तीर्थ पुरोहितों (Teerth Purohit) के आंदोलन पर सरकार को देवस्थानम बोर्ड भंग करना पड़ा. BJP की राज्य सरकार पर अब भू कानून को लेकर दबाव बढ़ रहा है. कांग्रेस, AAP, उत्तराखंड क्रांति दल सहित कई सामाजिक संगठन मज़बूत भू कानून (Land Law) के पक्ष में हैं. यह भी दिलचस्प है कि देवस्थानम बोर्ड की तरह ज़मीनों का संशोधित कानून भी त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) की सरकार में बना था, जिसे खत्म किए जाने की पूरी संभावना बन रही है. देखिए.

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    देहरादून. देवस्थानम बोर्ड एक्ट वापस लिये जाने की घोषणा के बाद विपक्ष ने उत्तराखंड सरकार पर एक और कानून वापस लेने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मौजूदा भाजपा सरकार को रोलबैक की सरकार कहते हुए संशोधित भू सुधार कानून भी वापस लिये जाने की मांग रखी. विपक्ष के साथ ही कई संगठनों के बैनर तले राज्य में इन कानूनों को वापस लिये जाने की मांग चल रही है और सरकार पर इसे वापस लेने का दबाव बढ़ता दिख रहा है. इन कानूनों पर जो कमेटी बनी है, वह भी जल्द अपनी रिपोर्ट सरकार को दे सकती है.

    उत्तराखंड में संशोधित भू कानून को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जो कमेटी पूर्व सीएस सुभाष कुमार की अगुवाई में बनाई थी, उसकी बैठक आगामी 7 दिसंबर को होनी है. खबरों की मानें तो इस बैठक में कमेटी अब तक मिले 160 से ज़्यादा सुझावों पर विचार करने के बाद अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देगी. भू कानूनों का मुद्दा राज्य में बड़ा हो चुका है, इसका सबूत यही है कि सीधे लोगों से सार्वजनिक सूचना जारी कर सुझाव मांगे गए और जल्द ही कमेटी के विमर्श के बाद जन सुनवाई भी हो सकती है.

    हिमाचल जैसे भू कानून मांग रहे हैं लोग
    सीएम धामी द्वारा बनाई गई एक्सपर्ट कमेटी के पास जो सुझाव आए हैं, उनके मुताबिक ज़्यादातर लोग इसी पक्ष में हैं कि उत्तराखंड में भी हिमाचल प्रदेश जैसे ही भू कानून होने चाहिए ताकि राज्य की ज़मीन बाहरी पूंजीपतियों के कब्ज़े में न चली जाए. मांग करने वालों का दावा है कि ज़मीनों की खरीद फरोख्त से जुड़े 1950 के कानून में संशोधन कर 2018 में राज्य सरकार ने नियमों को लचीला बनाया था, जिससे कोई भी पूंजीपति कितनी भी जमीन खरीद सकता है.

    विपक्ष और सत्ता का क्या कहना है?
    कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने साफ तौर पर सरकार के भू माफियाओं के साथ मिले होने का आरोप लगाते हुए कहा कि कृषि कानून और देवस्थानम बोर्ड एक्ट वापस लेने वाली भाजपा को अब ये कानून भी वापस लेने चाहिए. वहीं, भाजपा नेता और इस भू कानून अध्ययन कमेटी के सदस्य अजेंद्र अजय ने तो यहां तक कह दिया कि देवस्थानम बोर्ड पर जिस तरह सबके हित में फैसला लिया, उसी तरह सीएम धामी भू कानून मामले में भी फैसला लेंगे.

    Tags: Devsthanam board act cancel, Law, Pushkar Singh Dhami, Uttarakhand Government, Uttarakhand news, Uttarakhand politics

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