उत्तराखंड के 'अच्छे' किसानों को 'खेती सिखाने' विदेश ले जाएंगे धन सिंह रावत... किसान बोले- हिमाचल से ही सीख लो

धन सिंह रावत ने किसानों को 'खेती सिखाने' के लिए विदेश ले जाने के लिए नाबार्ड से निवेदन किया है.
धन सिंह रावत ने किसानों को 'खेती सिखाने' के लिए विदेश ले जाने के लिए नाबार्ड से निवेदन किया है.

किसानों और कांग्रेस का कहना है कि सेब के लिए हिमाचल और धान, गेहूं के लिए पंजाब-हरियाणा का दौरा काफी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 5:53 PM IST
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देहरादून. उत्तराखंड में पहाड़ों से पलायन की बड़ी वजह रोज़गार का न होना और खेती का बंजर होते जाना है. कृषि और उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल अपनी इनोवेटिव योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री की शाबासी हासिल कर रहे है तो प्रदेश के सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धन सिंह रावत को भी एक नायाब आइडिया आया है. धन सिंह रावत खेती के गुर सिखाने के लिए नाबार्ड के ज़रिए अच्छे किसानों को विदेश ले जाना चाहते हैं. हालांकि प्रदेश के किसान और कांग्रेस दोनों कह रहे हैं कि खेती के गुर सीखने विदेश जाने की नहीं, इसके लिए पड़ोसी प्रदेश ही काफी हैं.

हिमाचल, हरियाणा-पंजाब का दौरा काफ़ी 

नेशनल बैंक फ़ॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेन्ट बैंक यानि नाबार्ड उत्तराखंड में किसानों के लिए सस्ता कर्ज देगा. लेकिन सहकारिता विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धन सिंह रावत को लगता है उनके पास खेती की स्थिति सुधारने के लिए बेहतर विचार है. वह अच्छे किसानों को विदेश ने जाने का प्लान बना रहे हैं और इसके लिए उन्होंने नाबार्ड से निवेदन भी किया है. हालांकि 'अच्छे किसान' से मतलब क्या है यह धन सिंह रावत ने नहीं बताया.



सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का कहना है कि वह कोई भी काम पूरी तैयारी के साथ करते हैं लेकिन किसानों को विदेश ले जाने उनकी तैयारी न किसानों को समझ आ रही है और न ही कांग्रेस को. दोनों का कहना है कि सेब के लिए हिमाचल और धान, गेहूं के लिए पंजाब-हरियाणा का दौरा काफी है.

उत्तराखंड को अच्छी खेती के लिए देश में पुरस्कार भले ही मिले हों, भले ही सस्ता लोन मिल रहा हो लेकिन बीते 20 सालों में पहाड़ के खेतों को आबाद करने की ठोस प्लानिंग कभी नज़र नहीं आई. हां किसानों को पड़ोस के शानदार और सफल मॉडल की ओर आंखें मूंद किसानों को विदेश घुमाने की हवाई योजनाएं बनती रही हैं और पहाड़ के बदहाल किसान पलायन करते रहे हैं.
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