1926... जंगली जानवर दिखे तो करें यह नंबर डायल, उत्तराखंड वन विभाग ने जारी किया टोल फ़्री नंबर

आपके घर के आस-पास, गांव में गुलदार दिखता है या घर मे सांप घुस जाता है या फिर जंगल मे आग लग जाती है तो आप इसकी सूचना-1926 नंबर पर दे सकते हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)
आपके घर के आस-पास, गांव में गुलदार दिखता है या घर मे सांप घुस जाता है या फिर जंगल मे आग लग जाती है तो आप इसकी सूचना-1926 नंबर पर दे सकते हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

यह नंबर चौबीस घंटे काम करेगा. मकसद यह है कि समय पर विभाग को सूचना मिल जाए ताकि रिस्पॉंस टाइम कम से कम किया जा सके.

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देहरादून. उत्तराखण्ड में वन विभाग ने एक टोल फ्री नंबर-1926 जारी किया है. इस नंबर पर कोई भी जंगल और जंगली जानवरों से जुड़ी सूचनाएं दर्ज करा सकते हैं. उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बड़ी समस्या है. 70 फ़ीसदी से ज़्यादा क्षेत्रफल में जंगल होने के कारण प्रदेश में जंगली जानवर भी बड़ी संख्या में हैं और इसलिए इंसानों के साथ उनका टकराव अक्सर होता है. इसकी वजह से बड़ी संख्या में जानवर मारे जाते हैं और हर साल दर्जनों इंसानों को भी जान से हाथ धोना पड़ता है.

24 घंटे करेगा काम

मानव-वन्यजीव संघर्ष टालने  के लिए वन विभाग समय-समय पर नए प्रयोग करता है. ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए वन विभाग ने गुरुवार को टोल फ्री नंबर-1926 जारी किया. मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह टोल फ्री नंबर लांच किया.



यह नंबर चौबीस घंटे काम करेगा. मकसद यह है कि समय पर विभाग को सूचना मिल जाए ताकि रिस्पॉंस टाइम कम से कम किया जा सके. इसे ऐसे समझिए आपके घर के आस-पास, गांव में गुलदार दिखता है या घर मे सांप घुस जाता है या फिर जंगल मे आग लग जाती है तो आप इसकी सूचना-1926 नंबर पर दे सकते हैं. इसके अलावा कहीं वन भूमि पर कोई अतिक्रमण कर रहा है तो भी आप 1926 पर फ़ोन करके बता सकते हैं.
एक नज़र उत्तराखंड में मावन-वन्यजीव संघर्ष के आंकड़ों पर...

  • साल 2019 में हाथी, भालू, गुलदार, बाघ, सांप, जंगली सुअर से संघर्ष में उत्तराखंड में 58 लोग मारे गए. इनमें 18 लोग गुलदार, तो 12 लोग हाथी के हमले में मारे गए.

  • इस अवधि के दौरान जंगली जानवरों ने 260 लोगों को घायल भी किया. घायल होने वालों में 76 पर भालू, तो 61 पर गुलदार ने हमला किया था.

  • इस साल अगस्त महीने तक जंगली जानवरों के हमले में 27 लोगों की मौत हो चुकी थी और 140 लोग इस दौरान घायल भी हुए थे. मारे गए लोगों में से 14 अकेले गुलदार के हमले में मारे गए थे.



वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक, मुख्यालय पराग मधुकर धकाते का कहना है कि एक सेंट्रलाइज़्ड नंबर की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी. इससे अब सूचनाएं तुरंत मिलेंगी तो एक्शन भी उतनी ही जल्दी किया जा सकेगा.
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