प्रदेश में डिजिटल इंडिया का निकला दम, लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा मामले लंबित

उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग ने अब इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई भी शुरू कर दी है.


Updated: June 13, 2018, 8:01 PM IST
प्रदेश में डिजिटल इंडिया का निकला दम, लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा मामले लंबित
सभी तेरह जिलों की तहसीलों और जन सुविधा कन्द्रों में ई-डिस्ट्रिक्ट की सेवाओं का बुरा हाल है.

Updated: June 13, 2018, 8:01 PM IST
उत्तराखंड में साल 2013 में शुरू हुई ई-डिस्ट्रिक्ट सेवा का मकसद था लोगों को आसानी से कम वक़्त में ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देना. इसी के तहत राजस्व विभाग की आठ सेवाएं भी ई-डिस्ट्रिक्ट की विंडो पर दी जाती हैं. जिसमें जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, और चरित्र प्रमाण पत्र जैसी अहम सेवाएं शामिल हैं, लेकिन बीते एक साल के आवेदनों पर नज़र डालें तो लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं.

जिलों में लंबित मामले

  • देहरादून के लम्बित  मामले - 20486


  • हरिद्वार के लम्बित  मामले - 31454

  • नैनीताल के लम्बित  मामले -15366

  • उधमसिंह नगर के लम्बित  मामले - 37353

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उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग ने अब इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है. सभी तेरह जिलों को नोटिस जारी कर आयोग में सुनवाई भी शुरू कर दी है. वहीं लंबित मामलों पर अधिकारी इसे तकनीकी खामी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं. सुनवाई में आयोग आने वाले अधिकारी अब सॉफ्टवेयर को ही दोषी साबित करने में लगे हैं.

जब न्यूज 18 ने सचिवालय में मौजूद भारत सरकार की ई-डिस्ट्रिक्ट वेबसाइट बनाने और देखरेख करने वाली एजेन्सी एनआईसी के अधिकारी से इस मामले में बातचीत की, तो उन्होंने भी माना कि मामले लंबित तो हैं लेकिन विभागों की आपसी तालमेल में कमी की वजह से ऐसी समस्या सामने आ रही हैं. जिसको लगभग दो महीनों में सुलझा लिया जाएगा.

एनआईसी ने जहां ई-डिस्ट्रिक्ट वेबसाइट को बनाया है, वहीं देहरादून में मौजूद सूचना प्रौद्योगिकी सेन्टर को इसके संचालन और सुपर विजन का जिम्मा दिया गया है. जिलों में मौजूद तहसील और जन-सुविधा केन्द्र क्या काम कर रहे हैं इसका जवाब दोनों के ही पास नहीं है.

(देहरादून से आसिफ की रिपोर्ट)
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