उत्तराखंड: इस रिपोर्ट ने किया खुलासा, मैदानी इलाकों में होता है बाढ़ से ज्यादा नुकसान

आपदा विभाग की 'डिजास्टर रिस्क एसेसमेंट रिपोर्ट' बताती है कि प्रदेश में हर साल बाढ़ से करीब 64 करोड़ का नुकसान हो रहा है. इसमें भी सबसे ज्यादा नुकसान मैदानी जिलों में हो रहा है.

Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: July 31, 2019, 5:27 PM IST
उत्तराखंड: इस रिपोर्ट ने किया खुलासा, मैदानी इलाकों में होता है बाढ़ से ज्यादा नुकसान
'डिजास्टर रिस्क एसेसमेंट रिपोर्ट' में खुलासा, मैदानी इलाकों में बाढ़ से ज्यादा नुकसान
Robin Singh Chauhan | News18 Uttarakhand
Updated: July 31, 2019, 5:27 PM IST
उत्तराखंड में हर साल बाढ़ से करीब 64 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. इसमें सबसे ज्यादा नुकसान मैदानी जिलों में हो रहा है. आपदा विभाग की एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है. आपदा विभाग की 'डिजास्टर रिस्क एसेसमेंट रिपोर्ट' बताती है कि राज्य में सिर्फ बाढ़ से ही हर साल कम से कम 4 लोग मारे जाते हैं. आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा वित्तीय नुकसान हरिद्वार में तो जनहानि देहरादून में होती है. वित्तीय नुकसान में दूसरा नंबर देहरादून और तीसरा उत्तरकाशी का  है.

100 सालों बाद आई बाढ़ ने किया ज्यादा नुकसान
उत्तराखंड डिजास्टर मैनेजमेंट आथॉरिटी  के कंसलटेंट गिरीश जोशी का कहना है कि दो आपदाओं के बीच जितना ज्यादा अंतराल होगा, उसमें नुकसान उतना ही ज्यादा होगा. 2013 जैसी आपदा 100 साल से नहीं आई थी. यानी 100 साल बाद आई इस बाढ़ ने सबसे ज्यादा नुकसान किया है. जोशी बताते हैं इस नुकसान का आकलन पुराने समय के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है. जैसे उस इलाके मे कितनी वर्षा होती रही है. इसके अलावा उस इलाके में जनसंख्या क्या है? और नदी के फ्लड एरिया की जद मे कितने लोग रह रहे हैं?

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मैदानी इलाकों में बाढ़ से ज्यादा नुकसान होता है


प्रदेश में आने वाली बाढ़ का सर्वे
दरअसल प्रदेश में दो तरह की बाढ़ आती है. पहाड़ों में जो बाढ़ आती है, उसे फ्लैश फ्लड कहा जाता है. ये तीव्र गति से आनी वाली बाढ़ है. ये अपने साथ बड़े बोल्डर, पत्थर और मलबा लेकर आती है. ये अचानक से आने वाली बाढ़ है. वहीं दूसरे तरह की बाढ़ को फ्लूफियल फ्लड कहा जाता है. ये मैदानी इलाकों की बाढ़ है. जो कि नदी का जलस्तर बढ़ जाने से आती है. और इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. इससे बचाव के लिए भी अधिक समय मिलता है. इस रिपोर्ट में पूरे प्रदेश में ब्लाक स्तर पर माडल बनाकर सर्वे किया गया है.

आकलन के हिसाब से योजनाएं बनाएगा विभाग
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आंकड़े बताते हैं कि पूरे प्रदेश में हर साल करीब 64 करोड़ का नुकसान बाढ़ से होता है, जिसमें अकेले हरिद्वार में हर साल बाढ़ से करीब 39 करोड़ का नुकसान होता है. इसके मुकाबले पहाड़ी ज़िलों उत्तरकाशी और देहरादून में हर साल लाखों का नुकसान होता है. आपदा सचिव अमित नेगी का कहना है कि इस तरह का रिस्क एसेसमेंट आने वाली आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने में कारगर रहेगा. सभी विभागों को अब इस आकलन के हिसाब से अपनी योजनाएं बनाने की हिदायत दी जा रही है. उत्तराखण्ड़ कई तरह की आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील है. ऐसे में इस रिपोर्ट में निकले तथ्यों को गंभीरता से लेने की जरूरत है.

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First published: July 31, 2019, 5:11 PM IST
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