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देहरादून तहसील में मदद चाहिए तो विनोद को बुलाइए, दिव्यांग होकर भी बने मिसाल, पढ़ें कहानी

देहरादून की तहसील में पिछले 25 वर्षों से विनोद लोगों की सेवा करते आ रहे हैं. वह बताते हैं कि उन्हें दूसरों की सेवा करना ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- हिना आज़मी

देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की तहसील में पिछले 25 वर्षों से विनोद लोगों की सेवा करते आ रहे हैं. वह उन लोगों की मदद करते हैं जिन्हें फॉर्म आदि भरना नहीं आता. इस दौरान वह लोगों को फॉर्म भरने से लेकर दस्तावेजों की जानकारी देते हैं. इसके अलावा दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन आदि दिलाने में लोगों की मदद करते हैं. इतना ही नहीं वह दिव्यांगजनों की बेटियों की शादी के लिए भी समाज कल्याण की तरफ से मदद दिलवाने का काम करते हैं. जबकि विनोद का एक हाथ और एक पैर काम नहीं करता है. इसके अलावा वह 4 से 5 किलोमीटर की दूरी तय करके रोजाना पैदल तहसील पहुंचते हैं और लोगों की सेवा करते हैं.

विनोद बताते हैं कि उन्हें दूसरों की सेवा करना अच्छा लगता है, इसलिए वह पिछले दो दशकों से ज्यादा वक्त से तहसील में ही लोगों की मदद करते हैं. उन्होंने बताया कि खुश होकर कुछ लोग उन्हें 20-50 रुपये दे देते हैं और पेंशन के साथ उनका गुजारा हो जाता है. विनोद ने जानकारी दी कि वह 15 वर्ष की उम्र से तहसील में लोगों की मदद कर रहे हैं. उन्होंने महसूस किया था कि विकलांग लोगों को बहुत परेशानी होती है. कई बार उन्हें मदद नहीं मिल पाती, इसलिए उन्होंने समाजसेवा शुरू की. उनका कहना है कि हम जैसे विकलांग लोगों को भी नौकरी के अवसर मिलने चाहिए, ताकि हम भी सभी लोगों की तरह सामान्य जीवन जी सके.

तहसील में ही काम करने वाले रणजीत का कहना है कि जिस तरह सेवा भाव के साथ विनोद दूसरों की मदद करते हैं, सरकार उनको नौकरी देने के साथ आर्थिक सहायता भी प्रदान करें. वहीं, मुकेश शर्मा ने बताया कि विनोद निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद करते हैं, जो लोग पढ़ लिख नहीं सकते विनोद उनका फॉर्म भी भर कर देते हैं और साथ ही अफसरों के सिग्नेचर भी खुद ही करवाते हैं. वह दूसरे लोगों के लिए आदर्श हैं.

Tags: Dehradun news, Uttarakhand news

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