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प्रीति के शरीर का जख्म तो भर जाएगा, ससुरालियों की गिरफ्तारी से क्या भर जाएगा उसके मन का जख्म? जानें माजरा

Dowry Harassment Case: उत्तराखंड को लेकर नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के बताती है कि यहां दहेज उत्पीड़न ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

झकझोर देने वाला यह मामला है देहरादून के विकासनगर का. 14 साल पहले प्रीति की शादी यहां हुई थी.
लगातार फोन करने के बाद भी बेटी फोन नहीं उठा रही थी तो 16 सितंबर को उसकी ससुराल पहुंच गई.
वहां पहुंचकर उसने बेटी का हाल देखा और उसे वहां से निकालकर सरकारी अस्पताल में इलाज करवाया.
20 सितंबर को उसने तहरीर दी, तब पुलिस ने केस दर्जकर सास-ससुर और ननद को गिरफ्तार कर लिया.

रिपोर्ट: हिना आज़मी

देहरादून. उसके जख्म देख आप सिहर जाएंगे. भरोसा ही नहीं होगा कि किसी इनसान की देह पर कोई इनसान ऐसे जख्म दे सकता है. अब तो यह मामला हफ्ते भर पुराना हो चला, लेकिन उस स्त्री के मन पर इसके जख्म अब भी बिल्कुल ताजे हैं. हम बात कर रहे हैं देहरादून की प्रीति की, जिसे 10 साल से उसकी ससुराल के लोग दहेज की मांग के साथ प्रताड़ित कर रहे थे. अस्पताल से घर लौटी प्रीति बताती है कि उसे हर रोज पीटा जाता था, उसके शरीर को दागा जाता था. दाने-दाने के लिए तरसाया जाता था. लेकिन वह बेबस किसी से अपना दर्द बयां नहीं कर पाई.

झकझोर देने वाला यह मामला है देहरादून के विकासनगर का. 14 साल पहले टिहरी के जाखनी धार प्रखंड के रिंडोल गांव की प्रीति की शादी देहरादून के विकासनगर में रहने वाले एक लड़के से हुई थी. गरीब मां-बाप की बेटी प्रीति को पिछले कई सालों से दहेज के लिए ससुराल वाले प्रताड़ित कर रहे थे. उसके जिस्म पर चोट के निशान इस बात की गवाही देते हैं कि उसने हर दिन इनके दिए दर्द को झेला होगा. लेकिन ससुराल वालों ने हद पार कर दी, उन्होंने गर्म तवे से प्रीति के पूरे शरीर को जलाया. उसे कई दिनों तक भूखा रखकर पीटा.

प्रीति की मां सरस्वती ने बताया कि मेरी बेटी को वे लोग परेशान करते थे. कई दिनों से वह फोन नहीं उठा रही थी. इस वजह से हम परेशान हो गए और बिना देरी किए विकासनगर पहुंचे. यह बात इसी 16 सितंबर की है. उसके ससुराल वाले हमें घर के अंदर नहीं जाने दे रहे थे. हम जबरदस्ती अंदर घुसे. घर में घुसे तो बेटी का मुंह चुन्नी से ढंका देखा. मैंने चुन्नी हटाई तो मेरी बेटी रोने लगी. मैंने उसे चुप कराया. उसने मुझे कुछ नहीं बताया कि उसके साथ क्या हुआ. तब मेरा दामाद आया और उसने बताया कि उसके परिजनों ने उसके साथ ऐसा किया है. मेरी बेटी कुछ नहीं बता पा रही थी, बस रो रही थी. तब हमने अपनी बेटी को वहां से निकाला और अस्पताल ले आए. बेटी का इलाज देहरादून के सरकारी अस्पताल में कराया गया. वह अब पहले से ठीक है, उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर हमलोग घर ला चुके हैं.

प्रीति की मां सरस्वती ने बताया कि उसकी बेटी से की गई अमानवीय हरकत के खिलाफ उन्होंने 20 सितंबर को पुलिस में तहरीर दी. पुलिस ने तहरीर पर एक्शन लेते हुए प्रीति के सास, ससुर और ननद के खिलाफ केस दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया. सरस्वती ने कहा कि हमलोग बहुत गरीब हैं. मेरे पति पिछले 9 महीने से बीमार हैं और बिस्तर पर पड़े हैं. हमें हमारी बेटी के लिए इंसाफ चाहिए.

बता दें कि उत्तराखंड को लेकर नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के बताती है कि यहां दहेज उत्पीड़न के मामले बढ़े हैं. साल दर साल यह ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है. साल 2020 में दहेज हत्या के 63 मामले सामने आए थे, जो 2021 में बढ़कर 70 हो गए. ऐसे ही समय में उत्तराखंड के कवि नंदकिशोर हटवाल की कविता की कुछ पंक्तियां याद आती हैं. उनकी कविता की शुरुआती पंक्ति थी – ‘बोये जाते हैं बेटे और उग आती हैं बेटियां, खाद-पानी बेटों में और लहलहाती हैं बेटियां. ‘ इसी कविता के अंत में वे लिखते हैं ‘जीवन का स्वप्न दिखाते बेटे और यथार्थ दिखातीं बेटियां/ जीवन तो बेटों का है और मारी जाती हैं बेटियां’.

Tags: Crime against women, Dehradun news, Dowry Harassment, Uttarakhand news

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